18 सितंबर 2026
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दिल्ली-एनसीआर वायु प्रदूषण: भूपेंद्र यादव और CM योगी ने लखनऊ में की यूपी एक्शन प्लान की समीक्षा

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दिल्ली-एनसीआर वायु प्रदूषण: भूपेंद्र यादव और CM योगी ने लखनऊ में की यूपी एक्शन प्लान की समीक्षा

सारांश

सर्दियों की दस्तक से ठीक पहले केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने लखनऊ में CM योगी के साथ दिल्ली-एनसीआर के वायु प्रदूषण एक्शन प्लान की समीक्षा की। मिशन मोड में कार्रवाई, एमआरएसएम की जियो-टैगिंग और ईओएल वाहनों की स्क्रैपिंग — केंद्र ने राज्य को समय पर परिणाम देने के लिए स्पष्ट संकेत दिए।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और CM योगी आदित्यनाथ ने 18 सितंबर 2026 को लखनऊ में दिल्ली-एनसीआर वायु प्रदूषण एक्शन प्लान की समीक्षा की।
सर्दियों से पहले प्रदूषण नियंत्रण उपायों को मिशन मोड में लागू करने का निर्देश; एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर।
सभी मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों (एमआरएसएम) को जियो-टैग करने और रियल-टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने का निर्देश।
यूपी एनसीआर क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती और ईवी चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना में तेज़ी लाने पर जोर।
एंड-ऑफ-लाइफ (ईओएल) वाहनों के लिए एनओसी जारी करने की प्रक्रिया तेज़ करने और वैज्ञानिक स्क्रैपिंग को बढ़ावा देने का निर्देश।
बैठक में राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह , यूपी पर्यावरण मंत्री अरुण कुमार और परिवहन राज्य मंत्री दयाशंकर सिंह भी उपस्थित रहे।

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 18 सितंबर 2026 को लखनऊ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की, जिसमें दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए राज्य के एक्शन प्लान की प्रगति का मूल्यांकन किया गया। यह बैठक सर्दियों के मौसम की दस्तक से पहले, जब दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण स्तर चरम पर होता है, अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मिशन मोड में कार्रवाई का निर्देश

भूपेंद्र यादव ने बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि सर्दियों से पहले के समय का पूरा उपयोग करते हुए प्रदूषण नियंत्रण उपायों को मिशन मोड में लागू किया जाए। उन्होंने कहा, 'दिल्ली-एनसीआर की हवा की गुणवत्ता में साफ सुधार लाने के लिए समय पर काम पूरा करना, असरदार तालमेल और नियमों का सख्ती से पालन बहुत जरूरी होगा।' उन्होंने विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और नियमों के कड़े अनुपालन पर भी विशेष जोर दिया।

सड़क धूल नियंत्रण और हरियाली पर फोकस

केंद्रीय मंत्री ने सड़क की धूल को रोकने के उपायों की समीक्षा करते हुए कहा कि सड़कों को पूरी तरह पक्का करने और मानसून के दौरान स्थानीय किस्म की झाड़ियों व घास से हरियाली बढ़ाने का काम प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। इसके अलावा गड्ढों की पहचान और मरम्मत, फुटपाथ निर्माण तथा सड़कों की नियमित सफाई पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।

यादव ने मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों (एमआरएसएम) की तैनाती में मौजूद कमियों को तत्काल दूर करने का आदेश दिया। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सड़क सफाई की रियल-टाइम मॉनिटरिंग और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सभी एमआरएसएम को जियो-टैग किया जाए।

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और पुराने वाहनों पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने उत्तर प्रदेश के एनसीआर नगर निगम क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक बसों की तैनाती और ईवी चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना में तेज़ी लाने का आह्वान किया, क्योंकि मौजूदा बेड़े में अभी काफी कमियाँ बताई जा रही हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि 'एंड-ऑफ-लाइफ' (ईओएल) वाहनों को एनसीआर के बाहर भेजने के लिए 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (एनओसी) जारी करने की प्रक्रिया में तेज़ी लाई जाए और पुरानी व अनफिट गाड़ियों को वैज्ञानिक तरीके से स्क्रैप करने को बढ़ावा दिया जाए।

भूपेंद्र यादव ने प्रदेश में तेज़ी से बढ़ रहे पेड़-पौधों के आवरण के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को विशेष रूप से बधाई दी।

योगी का आश्वासन और 'पूरी सरकार' का दृष्टिकोण

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण रोकने के लिए केंद्र के प्रयासों का स्वागत किया और राज्य के सभी वरिष्ठ अधिकारियों को बैठक में तय उपायों पर समय पर कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने केंद्रीय मंत्री का इस उच्चस्तरीय समीक्षा के लिए आभार व्यक्त किया।

भूपेंद्र यादव ने यह भी रेखांकित किया कि वायु प्रदूषण से प्रभावी ढंग से तभी निपटा जा सकता है जब 'पूरी सरकार' और 'पूरा समाज' मिलकर काम करे — जनभागीदारी और संस्थागत समन्वय दोनों अनिवार्य हैं।

बैठक में कौन-कौन मौजूद रहा

आधिकारिक बयान के अनुसार, बैठक में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह, उत्तर प्रदेश के पर्यावरण और वन मंत्री अरुण कुमार, परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह और राज्य के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। यह बैठक इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है कि अगले कुछ हफ्तों में दिल्ली-एनसीआर में पराली जलाने का मौसम और ठंड की शुरुआत एक साथ होती है, जो प्रदूषण को बेकाबू स्तर तक पहुँचा देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें निर्देश तो कड़े होते हैं लेकिन जमीनी नतीजे अक्सर उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते। एमआरएसएम की जियो-टैगिंग और ईओएल वाहनों की स्क्रैपिंग जैसे उपाय तकनीकी दृष्टि से सही हैं, लेकिन असली परीक्षा इनके क्रियान्वयन की समयसीमा और जवाबदेही तंत्र होगी। गौरतलब है कि दिल्ली-एनसीआर में हर साल अक्टूबर-नवंबर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 'गंभीर' श्रेणी में पहुँच जाता है — इसके बावजूद वार्षिक समीक्षाओं की यह श्रृंखला जारी है। 'पूरी सरकार और पूरा समाज' की अवधारणा सही दिशा में है, लेकिन बिना मापने योग्य मील के पत्थरों के यह नारे तक सीमित रह सकती है।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भूपेंद्र यादव और CM योगी की लखनऊ बैठक किस विषय पर थी?
यह बैठक दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए उत्तर प्रदेश के एक्शन प्लान की प्रगति की समीक्षा के लिए 18 सितंबर 2026 को लखनऊ में हुई। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सर्दियों से पहले मिशन मोड में कार्रवाई के निर्देश दिए।
मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों (एमआरएसएम) की जियो-टैगिंग क्यों जरूरी है?
जियो-टैगिंग से सड़क सफाई कार्य की रियल-टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी और जवाबदेही बेहतर होगी। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस उपाय को एमआरएसएम की तैनाती में मौजूद कमियों को दूर करने के समाधान के रूप में सुझाया।
एनसीआर में ईओएल वाहनों के बारे में क्या निर्देश दिए गए?
'एंड-ऑफ-लाइफ' (ईओएल) यानी अपनी उम्र पूरी कर चुकी गाड़ियों को एनसीआर के बाहर भेजने के लिए 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (एनओसी) जारी करने की प्रक्रिया तेज़ करने के निर्देश दिए गए। साथ ही पुरानी व अनफिट गाड़ियों को वैज्ञानिक तरीके से स्क्रैप करने को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की क्या स्थिति है?
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि यूपी के एनसीआर नगर निगम क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक बसों के बेड़े और ईवी चार्जिंग स्टेशनों में अभी काफी कमियाँ हैं। उन्होंने इनकी तैनाती और स्थापना में तत्काल तेज़ी लाने का निर्देश दिया।
दिल्ली-एनसीआर वायु प्रदूषण में उत्तर प्रदेश की भूमिका क्यों अहम है?
उत्तर प्रदेश के कई जिले — जैसे नोएडा, गाजियाबाद, हापुड़ — सीधे दिल्ली-एनसीआर में आते हैं और यहाँ से उठने वाली धूल, वाहन उत्सर्जन तथा पराली का धुआँ दिल्ली की वायु गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करता है। इसीलिए केंद्र सरकार ने यूपी के साथ समन्वित एक्शन प्लान पर जोर दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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