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क्या एनसीआर में वायु प्रदूषण के समाधान के लिए हाई-लेवल बैठक हुई?

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क्या एनसीआर में वायु प्रदूषण के समाधान के लिए हाई-लेवल बैठक हुई?

सारांश

क्या एनसीआर में वायु प्रदूषण के मुद्दे पर उच्च स्तरीय बैठक ने समाधान खोजने में मदद की? जानिए भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में कौन से कदम उठाए गए और वायु गुणवत्ता में सुधार की उम्मीदें क्या हैं।

मुख्य बातें

स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन को प्राथमिकता दी जाएगी।
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जाएगा।
औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए जन जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।
दिल्ली मेट्रो और बस सेवाओं का विस्तार होगा।

नई दिल्ली, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के शहरों में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार की कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा हेतु एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक प्रदूषण नियंत्रण में हुई प्रगति का आकलन करने और पहले से तय उपायों को और मजबूत करने के लिए नियमित सालाना समीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा थी।

बैठक में दिल्ली के मुख्यमंत्री, केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह, दिल्ली के पर्यावरण मंत्री सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा, पर्यावरण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और दिल्ली सरकार के उच्च अधिकारी शामिल हुए।

बैठक की शुरुआत में मंत्री भूपेंद्र यादव ने दिल्ली सरकार और संबंधित एजेंसियों के निरंतर प्रयासों की सराहना की। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2021 में केंद्र सरकार ने विशेष कानून बनाकर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग का गठन किया था। इस आयोग ने दिल्ली-एनसीआर के एयरशेड की पहचान की, जिससे प्रदूषण के स्रोतों का सटीक पता लगाना संभव हुआ। मंत्री ने कहा कि एनसीआर में वायु प्रदूषण मानवीय गतिविधियों और मौसम संबंधी कारणों से होता है। उन्होंने जोर दिया कि तत्काल समाधान के बजाय लंबी अवधि की नीतिगत कार्रवाई जरूरी है।

वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर चर्चा करते हुए मंत्री ने स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन की जरूरत बताई, खासकर 62 चिह्नित भीड़भाड़ वाले स्थानों पर। उन्होंने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, विशेष पंजीकरण अभियान, बॉर्डर पर स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली लगाने और कार्यालय समय में बदलाव की संभावना पर जोर दिया। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा, चार्जिंग सुविधाओं का विस्तार, सड़क शुल्क, स्मार्ट पार्किंग, और एनसीआर के लिए एक समान वाहन पंजीकरण नीति जैसे उपायों पर भी बात हुई। उन्होंने कहा कि इन उपायों की सफलता जनता की भागीदारी और व्यवहार में बदलाव पर निर्भर है।

औद्योगिक प्रदूषण की समीक्षा में बताया गया कि एनसीआर की 240 औद्योगिक इकाइयों में से 227 पहले ही पाइपलाइन गैस पर आ चुकी हैं। लेकिन अनियोजित विकास और तय क्षेत्रों के बाहर चलने वाली इकाइयों का नियमितीकरण अभी भी चिंता का विषय है। मंत्री ने नियमों का पालन न करने वाली इकाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया, जिसमें आवश्यकता पड़ने पर सील करने की कार्रवाई भी शामिल है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 88 ऐसी इकाइयों को नोटिस जारी किए हैं, जिन्होंने ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली नहीं लगाई। 23 जनवरी 2026 से इनके बंद करने की कार्रवाई शुरू होगी।

निर्माण और विध्वंस कचरे के प्रबंधन पर चर्चा में तय स्थलों का चयन, प्रदूषण के चरम समय में विध्वंस गतिविधियां रोकना और वैज्ञानिक निपटान के लिए रीसाइक्लर संघों से साझेदारी पर जोर दिया गया। दिल्ली के तेहखंड में एक निर्माण-विध्वंस कचरा प्रसंस्करण संयंत्र इस साल के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है। बैठक में दिल्ली के 10 किलोमीटर दायरे में स्थित थर्मल पावर प्लांटों में फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन सिस्टम लगाने और इन प्लांटों में फसल अवशेषों का कम से कम 5 प्रतिशत उपयोग अनिवार्य करने की प्रगति पर भी चर्चा हुई।

सड़क विकास और धूल नियंत्रण पर मंत्री ने मिशन मोड में पूर्ण रूप से पक्की सड़कें बनाने, स्थानीय झाड़ियों के पौधे लगाने और पर्यावरण कार्य बल, एनसीसी, एनएसएस तथा युवा क्लबों को शामिल करने पर जोर दिया। अगले साल दिल्ली में 3,300 किलोमीटर से अधिक सड़कों का पुनर्विकास होगा, जिसमें धूल नियंत्रण और ट्रैफिक प्रबंधन भी शामिल होगा। मैकेनाइज्ड रोड स्वीपिंग मशीनें बड़े पैमाने पर लगाई जाएंगी और छोटी सड़कों के लिए हाथ से चलने वाली वैक्यूम मशीनें भी इस्तेमाल होंगी। सड़क रखरखाव अनुबंध में 72 घंटे के अंदर गड्ढों की मरम्मत का प्रावधान करने और दिल्ली सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया।

मंत्री ने एनसीआर के लिए एकीकृत परिवहन योजना के तहत दिल्ली मेट्रो और सिटी बस सेवाओं को तेजी से बढ़ाने पर बल दिया ताकि अधिक लोग सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें। दिल्ली मेट्रो कॉर्पोरेशन ने आने वाले वर्षों की विस्तार योजना पेश की, जबकि दिल्ली परिवहन विभाग ने बताया कि 14,000 बसों की योजना में से 3,350 इलेक्ट्रिक बसों का आदेश दिया जा चुका है। इन बसों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ा जाएगा ताकि आवासीय, व्यावसायिक और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच बढ़े। इससे निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी और वाहन प्रदूषण में लगातार कमी आएगी। 31 जनवरी 2026 तक 10 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर ई-ऑटो, बाइक टैक्सी और फीडर कैब का पायलट एकीकरण लागू होगा।

पुराने कचरे के निपटान पर प्रगति की समीक्षा में ओखला (जुलाई 2026), भलस्वा (अक्टूबर 2026), और गाजीपुर (दिसंबर 2027) की समयसीमा दोहराई गई। 5×5 किलोमीटर ग्रिड में कचरा संग्रह केंद्र लगाए जाएंगे, ऐप आधारित संग्रह सेवाओं पर विचार किया जाएगा, और सितंबर 2027 तक 4,600 मीट्रिक टन ताजा कचरे के प्रसंस्करण की सुविधा पूरी हो जाएगी। कचरे से ऊर्जा बनाने वाले संयंत्र सितंबर 2026 तक पूरे किए जाएंगे।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने बताया कि जनवरी 2026 से टीईआरआई, आईआईटी दिल्ली, आईआईटीएम पुणे और एआरएआई के माध्यम से प्रदूषण स्रोतों का वैज्ञानिक अध्ययन शुरू हो गया है। कोविड लॉकडाउन वाले वर्ष को छोड़कर 2025 में 2018 के बाद सबसे अच्छे वायु गुणवत्ता सूचकांक दर्ज किए गए, जो एनसीआर में हवा की गुणवत्ता में सुधार दर्शाते हैं। बैठक में जनजागरूकता के लिए गहन अभियान चलाने पर भी जोर दिया गया। सभी एनसीआर सरकारों द्वारा समन्वित और लक्ष्य आधारित कार्ययोजना से इस साल के अंत तक वायु गुणवत्ता सूचकांक में 15-20 प्रतिशत सुधार की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाना है। भूपेंद्र यादव और अन्य नेताओं के प्रयासों से एनसीआर में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनसीआर में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए कौन से उपाय प्रस्तावित किए गए हैं?
वायु प्रदूषण को कम करने के लिए स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा, और औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जैसे उपाय प्रस्तावित किए गए हैं।
क्या बैठक में कोई नई योजनाएं पेश की गईं?
हाँ, दिल्ली मेट्रो और सिटी बस सेवाओं का विस्तार, और कचरे के प्रबंधन के लिए नई योजनाएं पेश की गईं।
वायु गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद कब तक है?
इस साल के अंत तक वायु गुणवत्ता सूचकांक में 15-20 प्रतिशत सुधार की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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