बिहार में कक्षा 6-8 के लिए विषयवार शिक्षक नियुक्ति का नया मानक लागू, RTE और NEP 2020 के तहत बड़ा बदलाव
सारांश
मुख्य बातें
बिहार शिक्षा विभाग ने 22 जून 2026 को राज्य के प्रारंभिक विद्यालयों में कक्षा 6 से 8 तक के लिए विषयवार शिक्षक नियुक्ति का नया मानक लागू किया है। प्राथमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, अब प्रत्येक उच्च प्राथमिक कक्षा में कम से कम एक शिक्षक की उपलब्धता अनिवार्य होगी और विज्ञान-गणित, सामाजिक अध्ययन तथा भाषा जैसे विषयों के लिए अलग-अलग शिक्षकों की तैनाती की जाएगी। यह कदम शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE), 2009 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 के प्रावधानों के अनुरूप उठाया गया है।
नया शिक्षक निर्धारण मानक क्या है
नए मानक के तहत विद्यालय में छात्र संख्या के आधार पर शिक्षकों की तैनाती तय की जाएगी। यदि किसी विद्यालय में 105 से 140 छात्र हैं, तो एक अतिरिक्त अंग्रेजी शिक्षक की नियुक्ति की जाएगी। 140 से 175 छात्र होने पर एक और अतिरिक्त शिक्षक उपलब्ध कराया जाएगा, जो छात्रों की आवश्यकता के अनुसार संस्कृत या उर्दू विषय का होगा। यदि छात्र संख्या 175 से अधिक हो जाती है, तो आवश्यकता के अनुसार और शिक्षकों की व्यवस्था की जाएगी।
शैक्षणिक इकाइयों का पृथक्करण
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि शिक्षक निर्धारण के प्रयोजन से कक्षा 1-5 और कक्षा 6-8 को अलग-अलग शैक्षणिक इकाई माना जाएगा। हालाँकि, प्रशासनिक ढाँचे में कक्षा 1 से 8 तक के प्रारंभिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक का पद एक ही रहेगा। यह व्यवस्था शिक्षण और प्रशासन के बीच संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है।
समीक्षा में सामने आई कमियाँ
विभाग की आंतरिक समीक्षा में पाया गया कि राज्य के कई विद्यालयों में निर्धारित मानकों के अनुसार न्यूनतम संख्या में शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि शिक्षक-छात्र अनुपात में असंतुलन राज्य की प्राथमिक शिक्षा प्रणाली की एक पुरानी चुनौती रही है।
प्रशासनिक निर्देश और क्रियान्वयन
प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर द्वारा जारी पत्र में सभी जिला पदाधिकारियों और जिला शिक्षा पदाधिकारियों को नए मानकों के अनुसार तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। पत्र में कहा गया है कि शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए। शिक्षा विभाग के सचिव ने इस नए मानक को औपचारिक मंजूरी दे दी है।
आगे की राह
अब राज्य के प्रारंभिक विद्यालयों में वास्तविक नामांकन संख्या, कक्षा संरचना और विषयों की जरूरत के आधार पर शिक्षकों की आवश्यकता का आकलन किया जाएगा। इस नई व्यवस्था से उम्मीद की जा रही है कि उच्च प्राथमिक स्तर पर शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होगा और छात्रों को विशेषज्ञ विषय-शिक्षक मिल सकेंगे।