10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बिहार में कक्षा 6-8 के लिए विषयवार शिक्षक नियुक्ति का नया मानक लागू, RTE और NEP 2020 के तहत बड़ा बदलाव

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बिहार में कक्षा 6-8 के लिए विषयवार शिक्षक नियुक्ति का नया मानक लागू, RTE और NEP 2020 के तहत बड़ा बदलाव

सारांश

बिहार ने कक्षा 6-8 में विषयवार शिक्षक तैनाती का नया मानक लागू किया — 105 से अधिक छात्रों पर अतिरिक्त अंग्रेजी शिक्षक अनिवार्य, 175 से अधिक पर और नियुक्ति। RTE 2009 और NEP 2020 के तहत उठाया गया यह कदम राज्य की शिक्षक-छात्र असंतुलन की पुरानी समस्या से निपटने की कोशिश है।

मुख्य बातें

बिहार शिक्षा विभाग ने 22 जून 2026 को कक्षा 6 से 8 के लिए विषयवार शिक्षक नियुक्ति का नया मानक लागू किया।
विज्ञान-गणित, सामाजिक अध्ययन और भाषा विषयों के लिए अलग-अलग शिक्षकों की तैनाती अनिवार्य होगी।
105 से 140 छात्र होने पर एक अतिरिक्त अंग्रेजी शिक्षक ; 140 से 175 पर संस्कृत या उर्दू शिक्षक की नियुक्ति का प्रावधान।
शिक्षक निर्धारण के लिए कक्षा 1-5 और कक्षा 6-8 को अलग शैक्षणिक इकाई माना जाएगा; प्रधानाध्यापक पद एक ही रहेगा।
प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर ने सभी जिला पदाधिकारियों को नए मानकों पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
यह कदम RTE अधिनियम 2009 और NEP 2020 के प्रावधानों के अनुरूप उठाया गया है।

बिहार शिक्षा विभाग ने 22 जून 2026 को राज्य के प्रारंभिक विद्यालयों में कक्षा 6 से 8 तक के लिए विषयवार शिक्षक नियुक्ति का नया मानक लागू किया है। प्राथमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, अब प्रत्येक उच्च प्राथमिक कक्षा में कम से कम एक शिक्षक की उपलब्धता अनिवार्य होगी और विज्ञान-गणित, सामाजिक अध्ययन तथा भाषा जैसे विषयों के लिए अलग-अलग शिक्षकों की तैनाती की जाएगी। यह कदम शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE), 2009 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 के प्रावधानों के अनुरूप उठाया गया है।

नया शिक्षक निर्धारण मानक क्या है

नए मानक के तहत विद्यालय में छात्र संख्या के आधार पर शिक्षकों की तैनाती तय की जाएगी। यदि किसी विद्यालय में 105 से 140 छात्र हैं, तो एक अतिरिक्त अंग्रेजी शिक्षक की नियुक्ति की जाएगी। 140 से 175 छात्र होने पर एक और अतिरिक्त शिक्षक उपलब्ध कराया जाएगा, जो छात्रों की आवश्यकता के अनुसार संस्कृत या उर्दू विषय का होगा। यदि छात्र संख्या 175 से अधिक हो जाती है, तो आवश्यकता के अनुसार और शिक्षकों की व्यवस्था की जाएगी।

शैक्षणिक इकाइयों का पृथक्करण

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि शिक्षक निर्धारण के प्रयोजन से कक्षा 1-5 और कक्षा 6-8 को अलग-अलग शैक्षणिक इकाई माना जाएगा। हालाँकि, प्रशासनिक ढाँचे में कक्षा 1 से 8 तक के प्रारंभिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक का पद एक ही रहेगा। यह व्यवस्था शिक्षण और प्रशासन के बीच संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है।

समीक्षा में सामने आई कमियाँ

विभाग की आंतरिक समीक्षा में पाया गया कि राज्य के कई विद्यालयों में निर्धारित मानकों के अनुसार न्यूनतम संख्या में शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि शिक्षक-छात्र अनुपात में असंतुलन राज्य की प्राथमिक शिक्षा प्रणाली की एक पुरानी चुनौती रही है।

प्रशासनिक निर्देश और क्रियान्वयन

प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर द्वारा जारी पत्र में सभी जिला पदाधिकारियों और जिला शिक्षा पदाधिकारियों को नए मानकों के अनुसार तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। पत्र में कहा गया है कि शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए। शिक्षा विभाग के सचिव ने इस नए मानक को औपचारिक मंजूरी दे दी है।

आगे की राह

अब राज्य के प्रारंभिक विद्यालयों में वास्तविक नामांकन संख्या, कक्षा संरचना और विषयों की जरूरत के आधार पर शिक्षकों की आवश्यकता का आकलन किया जाएगा। इस नई व्यवस्था से उम्मीद की जा रही है कि उच्च प्राथमिक स्तर पर शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार होगा और छात्रों को विशेषज्ञ विषय-शिक्षक मिल सकेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में है — राज्य में शिक्षक रिक्तियों की संख्या हजारों में है और मानक तय करना तथा पद भरना दो अलग बातें हैं। RTE 2009 के डेढ़ दशक बाद भी न्यूनतम शिक्षक-छात्र अनुपात कई विद्यालयों में पूरा नहीं हो सका — यह नई अधिसूचना उसी पुरानी खाई को स्वीकार करती है। विषयवार विशेषज्ञ शिक्षकों की अवधारणा NEP 2020 की भावना के अनुकूल है, परंतु बिना पर्याप्त प्रशिक्षित जनशक्ति और बजट आवंटन के यह महज कागजी व्यवस्था बनकर रह सकती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में कक्षा 6 से 8 के लिए नई शिक्षक व्यवस्था क्या है?
बिहार शिक्षा विभाग ने 22 जून 2026 को एक नया मानक लागू किया है जिसके तहत कक्षा 6 से 8 में विज्ञान-गणित, सामाजिक अध्ययन और भाषा जैसे विषयों के लिए अलग-अलग शिक्षकों की तैनाती अनिवार्य होगी। प्रत्येक कक्षा में न्यूनतम एक शिक्षक की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
छात्र संख्या के अनुसार अतिरिक्त शिक्षक कब मिलेंगे?
105 से 140 छात्र होने पर एक अतिरिक्त अंग्रेजी शिक्षक, 140 से 175 छात्र होने पर संस्कृत या उर्दू का एक और शिक्षक, और 175 से अधिक छात्र होने पर आवश्यकतानुसार अतिरिक्त शिक्षकों की व्यवस्था का प्रावधान है।
यह नई व्यवस्था किन कानूनों के तहत लागू की गई है?
यह नई शिक्षक नियुक्ति व्यवस्था शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE), 2009 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020 के प्रावधानों के तहत लागू की गई है। इसका उद्देश्य उच्च प्राथमिक स्तर पर गुणवत्तापूर्ण और विशेषज्ञ शिक्षण सुनिश्चित करना है।
क्या कक्षा 1-5 और 6-8 के लिए शिक्षक अलग-अलग होंगे?
हाँ, शिक्षक निर्धारण के प्रयोजन से कक्षा 1-5 और कक्षा 6-8 को अलग शैक्षणिक इकाई माना जाएगा। हालाँकि, प्रशासनिक दृष्टि से कक्षा 1 से 8 तक के विद्यालय में प्रधानाध्यापक का पद एक ही रहेगा।
इस नई व्यवस्था को लागू करने की जिम्मेदारी किसकी है?
प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर द्वारा जारी पत्र में सभी जिला पदाधिकारियों और जिला शिक्षा पदाधिकारियों को नए मानकों के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षा विभाग के सचिव ने इस मानक को औपचारिक मंजूरी दे दी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 1 साल पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले