बिहार विधानसभा: आंबेडकर आवासीय स्कूलों में 2,151 शिक्षक पद रिक्त, CM सम्राट चौधरी ने एक माह में भरने का दिया निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार, 21 जुलाई को शिक्षा विभाग से जुड़े तीन अहम मुद्दों पर तीखी बहस हुई — बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी, सरकारी स्कूलों में ड्रेस कोड का अनुपालन, और भवनहीन विद्यालयों की समस्या। बहस इतनी गंभीर हुई कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को स्वयं हस्तक्षेप करना पड़ा और शिक्षा विभाग को एक माह के भीतर रिक्त पदों की भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का स्पष्ट निर्देश देना पड़ा।
शिक्षक रिक्तियों का मुद्दा: आँकड़ों में विरोधाभास
पूर्व मंत्री एवं विधायक श्याम रजक ने प्रश्न के माध्यम से सदन का ध्यान आंबेडकर आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी की ओर आकर्षित किया। उनके अनुसार इन विद्यालयों में 3,456 पद स्वीकृत हैं, जबकि केवल 1,305 शिक्षक कार्यरत हैं — यानी 2,151 पद रिक्त हैं, जो स्वीकृत पदों का लगभग 62 प्रतिशत है। उन्होंने यह भी कहा कि अनेक विद्यालयों में संगीत शिक्षकों की नियुक्ति तक नहीं हुई है।
हालांकि, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री लखींद्र राम ने विभागीय आँकड़े पेश करते हुए कहा कि कुल स्वीकृत पद 2,406 हैं और उनमें से 1,290 शिक्षक कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि 20 संगीत शिक्षक भी कार्यरत हैं और शेष रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए अधिसूचना बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) को भेजी जा चुकी है। गौरतलब है कि विधायक और मंत्री के आँकड़ों में स्वीकृत पदों की संख्या को लेकर स्पष्ट अंतर रहा, जिससे सदन में तनाव और बढ़ा।
CM का हस्तक्षेप और एक माह की समय सीमा
मंत्री के जवाब से श्याम रजक संतुष्ट नहीं हुए। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने आश्वस्त किया कि सरकार इस दिशा में गंभीरता से प्रयासरत है। तत्पश्चात मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी स्वयं खड़े हुए और स्वीकार किया कि विधायक की चिंता पूरी तरह उचित है। उन्होंने शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि एक माह के भीतर बहाली प्रक्रिया पूरी करने के लिए विशेष मॉनिटरिंग की जाए और वरिष्ठ अधिकारी इसकी नियमित समीक्षा करें। उन्होंने किसी भी प्रकार की ढिलाई से स्पष्ट इनकार किया।
शिक्षकों के ड्रेस कोड पर निर्देश
सदन में सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड का मुद्दा भी उठा। सरकार की ओर से जानकारी दी गई कि राज्य के सरकारी स्कूलों में औपचारिक ड्रेस कोड पहले से लागू है। इसे प्रभावी ढंग से लागू कराने के लिए 20 जुलाई को सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
भवनहीन स्कूलों पर एक सप्ताह में सूची तैयार करने का वादा
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने भवनहीन विद्यालयों से संबंधित प्रश्न के उत्तर में कहा कि राज्य सरकार की मंशा है कि कोई भी विद्यालय बिना भवन के संचालित न हो। उन्होंने बताया कि जिन विद्यालयों के पास भवन, पर्याप्त कमरे या भूमि उपलब्ध नहीं है, उनकी सूची एक सप्ताह के भीतर तैयार की जाएगी और आधारभूत संरचना विकसित करने के लिए आगे की कार्रवाई की जाएगी।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में शिक्षा सुधार की माँग लगातार तेज हो रही है और आगामी विधानसभा चुनावों से पहले सरकार पर जवाबदेही का दबाव बढ़ रहा है। बीपीएससी को भेजी गई अधिसूचना और मुख्यमंत्री के एक माह के निर्देश के क्रियान्वयन पर अब सबकी नजर रहेगी।