69,000 शिक्षक भर्ती: आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने मायावती आवास के बाहर किया प्रदर्शन, पुलिस ने हिरासत में लिया
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश की 69,000 शिक्षक भर्ती में नियुक्ति की माँग को लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने शनिवार, 25 जुलाई को लखनऊ में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती के आवास के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने 'बहन जी बाहर निकलो' के नारे लगाते हुए मायावती से इस मामले में हस्तक्षेप करने और उनकी माँगों का समर्थन करने की अपील की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आवास के बाहर धरना देने से रोककर हिरासत में लिया और बसों के ज़रिए इको गार्डन भेज दिया।
हलफनामे के आँकड़ों से असंतोष
अभ्यर्थियों के असंतोष की जड़ 21 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय में हुई सुनवाई से जुड़ी है। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से अदालत में दाखिल हलफनामे में कुल 8,270 रिक्त पदों का उल्लेख किया गया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि इन आँकड़ों से वे संतुष्ट नहीं हैं और इनमें गंभीर विसंगतियाँ हैं।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे धनंजय गुप्ता ने आरोप लगाया कि हलफनामे में 3,324 पद अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के ऐसे बताए गए हैं, जिन पर पहले ही नियुक्ति हो जानी चाहिए थी। इसके अलावा विभाग ने 4,946 पद ऐसे दर्शाए हैं, जिन पर चयनित अभ्यर्थियों के नियुक्ति के लिए न आने की बात कही गई है।
वर्गवार रिक्तियों का ब्यौरा
अभ्यर्थियों के मुताबिक, विभाग के हलफनामे में वर्गवार रिक्त पदों का विवरण इस प्रकार है — सामान्य वर्ग: 1,144, ओबीसी: 2,524, अनुसूचित जाति (एससी): 1,244 और अनुसूचित जनजाति (एसटी): 34। अभ्यर्थियों का तर्क है कि जिन पदों पर चयनित उम्मीदवार कार्यभार ग्रहण करने नहीं आए, उन्हें रिक्त मानते हुए मेरिट सूची में नीचे के अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर दिया जाना चाहिए।
पुरानी रिक्तियों पर भी सवाल
अभ्यर्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि इससे पहले सरकार ने करीब 6,800 रिक्त पदों का उल्लेख किया था, लेकिन अब तक उन पर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। गौरतलब है कि यह भर्ती प्रक्रिया वर्षों से कानूनी विवादों और प्रशासनिक अड़चनों के बीच उलझी हुई है, जिससे हज़ारों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका है।
महिला अभ्यर्थी भी उतरीं सड़क पर
प्रदर्शन के दौरान कई महिला अभ्यर्थी भी मायावती के आवास के बाहर पहुँचीं और धरने पर बैठ गईं। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर सभी प्रदर्शनकारियों को हटाया और बसों के माध्यम से इको गार्डन रवाना किया। यह ऐसे समय में आया है जब मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है और अभ्यर्थी राजनीतिक दबाव बनाकर अपनी नियुक्ति सुनिश्चित कराने की कोशिश में हैं। आने वाले दिनों में सर्वोच्च न्यायालय में होने वाली अगली सुनवाई इस मामले की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।