सपा मुख्यालय के बाहर पोस्टर: भाजपा सरकार पर पीडीए आरक्षण में 69,000 भर्ती घोटाले का आरोप

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सपा मुख्यालय के बाहर पोस्टर: भाजपा सरकार पर पीडीए आरक्षण में 69,000 भर्ती घोटाले का आरोप

सारांश

लखनऊ में सपा मुख्यालय के बाहर लगे पोस्टर ने भाजपा सरकार पर पीडीए आरक्षण में व्यापक अनियमितता का आरोप लगाया है। 69,000 शिक्षक भर्ती में ओबीसी को 27% की जगह 3.8% आरक्षण और ग्राम पंचायत भर्ती में 396 की जगह 139 पद — ये आँकड़े राजनीतिक विवाद की नई चिंगारी बन गए हैं।

मुख्य बातें

समाजवादी पार्टी ने 20 मई को लखनऊ मुख्यालय के बाहर पोस्टर लगाकर भाजपा सरकार पर पीडीए आरक्षण उल्लंघन का आरोप लगाया।
69,000 सहायक शिक्षक भर्ती में ओबीसी को देय 27% आरक्षण के विरुद्ध कथित तौर पर मात्र 3.8% दिया गया।
यूपीएसएससी प्राविधिक सहायक भर्ती के 3,448 पदों में एससी को 723 की जगह 509 और ओबीसी को 930 की जगह 629 पद मिले।
ग्राम पंचायत अधिकारी भर्ती में ओबीसी को 396 पद के स्थान पर केवल 139 पद आवंटित किए गए।
बांदा कृषि विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर भर्ती में मुख्यमंत्री की स्वजातीय उम्मीदवारों का चयन 80% तक होने का दावा।
विश्वविद्यालयों के कुलपति पदों पर 90% गैर-पीडीए नियुक्तियों का भी आरोप।

लखनऊ में समाजवादी पार्टी (सपा) के मुख्यालय के बाहर 20 मई को एक बड़ा पोस्टर प्रदर्शित किया गया, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) की उत्तर प्रदेश सरकार पर पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक (पीडीए) समुदाय के संवैधानिक आरक्षण अधिकारों के व्यापक उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। पोस्टर में दावा किया गया है कि प्रदेश की विभिन्न सरकारी भर्तियों में ओबीसी, एससी और एसटी उम्मीदवारों को नियमानुसार आरक्षण नहीं दिया जा रहा।

मुख्य आरोप और ठोस उदाहरण

समाजवादी छात्र सभा के राष्ट्रीय महासचिव मनोज पासवान ने पोस्टर सार्वजनिक करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार पीडीए समाज के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। उनके अनुसार, सरकारी नौकरियों में आरक्षण का हक छीना जा रहा है और कई भर्तियों में संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी की जा रही है।

पोस्टर में सबसे प्रमुख आरोप 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती को लेकर है। सपा का दावा है कि इस भर्ती में ओबीसी को देय 27 प्रतिशत आरक्षण के विरुद्ध मात्र 3.8 प्रतिशत ही आरक्षण दिया गया — जो कथित तौर पर संवैधानिक प्रावधान से कहीं कम है।

अन्य भर्तियों में आरक्षण के आँकड़े

यूपीएसएससी प्राविधिक सहायक (विज्ञान एवं कृषि) भर्ती के 3,448 पदों में एससी समुदाय को 21 प्रतिशत के हिसाब से 723 पद मिलने चाहिए थे, किंतु कथित तौर पर केवल 509 पद (14 प्रतिशत) ही आवंटित किए गए। इसी प्रकार ओबीसी को 930 पद के स्थान पर 629 पद दिए गए।

ग्राम पंचायत अधिकारी भर्ती के 1,468 पदों में ओबीसी को 27 प्रतिशत के अनुसार 396 पद मिलने चाहिए थे, जबकि आरोप है कि उन्हें मात्र 139 पद ही दिए गए। बांदा कृषि विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर भर्ती में मुख्यमंत्री की स्वजातीय उम्मीदवारों का चयन 80 प्रतिशत तक होने का दावा किया गया है।

अन्य मुद्दे जो पोस्टर में उठाए गए

पोस्टर में यूपीपीएससी द्वारा ओबीसी, एससी/एसटी की ओवरलैपिंग समाप्त करने, लेटरल एंट्री भर्ती, कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल, खंड शिक्षा अधिकारी परीक्षा 2019, विश्वविद्यालयों में एनएफएस आरक्षण, और विश्वविद्यालयों के कुलपति (वीसी) पदों पर 90 प्रतिशत गैर-पीडीए नियुक्तियों जैसे मुद्दे भी उठाए गए हैं।

युवाओं से अपील

मनोज पासवान ने पोस्टर जारी करते हुए पीडीए समाज के युवाओं से अपील की कि वे इन कथित भर्ती अनियमितताओं के विरुद्ध एकजुट होकर आवाज उठाएं। गौरतलब है कि यह पोस्टर ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो रही है और आरक्षण का मुद्दा केंद्रीय चुनावी एजेंडे पर है।

भाजपा सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा और सड़क — दोनों स्तरों पर और तीखा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यदि सत्यापित हों, तो संवैधानिक आरक्षण प्रावधानों के गंभीर उल्लंघन की ओर संकेत करते हैं। समस्या यह है कि ये आँकड़े एकतरफा पोस्टर से आए हैं, सरकारी गजट या न्यायिक रिकॉर्ड से नहीं — इसलिए स्वतंत्र सत्यापन ज़रूरी है। 69,000 शिक्षक भर्ती विवाद पहले से न्यायालय में है, जो इस मुद्दे को महज राजनीतिक आरोप से परे ले जाता है। भाजपा की चुप्पी भी उल्लेखनीय है — जब आँकड़े इतने विशिष्ट हों, तो खंडन या स्पष्टीकरण की जिम्मेदारी सरकार पर बनती है।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सपा के पोस्टर में भाजपा सरकार पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
सपा के पोस्टर में आरोप है कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार विभिन्न सरकारी भर्तियों में ओबीसी, एससी और एसटी उम्मीदवारों को संवैधानिक रूप से देय आरक्षण नहीं दे रही। 69,000 शिक्षक भर्ती से लेकर यूपीएसएससी और ग्राम पंचायत भर्ती तक कई उदाहरण दिए गए हैं।
69,000 सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण विवाद क्या है?
सपा का आरोप है कि इस भर्ती में ओबीसी समुदाय को नियमानुसार 27 प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए था, लेकिन कथित तौर पर उन्हें मात्र 3.8 प्रतिशत ही दिया गया। यह मामला पहले से न्यायिक जाँच के दायरे में बताया जाता है।
यह पोस्टर किसने जारी किया और इसका मकसद क्या है?
समाजवादी छात्र सभा के राष्ट्रीय महासचिव मनोज पासवान ने 20 मई को लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय के बाहर यह पोस्टर जारी किया। उन्होंने पीडीए समाज के युवाओं से इन कथित भर्ती अनियमितताओं के विरुद्ध आवाज उठाने की अपील की।
ग्राम पंचायत अधिकारी भर्ती में आरक्षण को लेकर क्या दावा किया गया है?
पोस्टर के अनुसार, 1,468 पदों वाली इस भर्ती में ओबीसी को 27 प्रतिशत के हिसाब से 396 पद मिलने चाहिए थे, लेकिन कथित तौर पर केवल 139 पद ही आवंटित किए गए। यह आँकड़ा देय आरक्षण का एक-तिहाई से भी कम है।
भाजपा सरकार ने इन आरोपों पर क्या कहा है?
अभी तक भाजपा सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ये आरोप सपा के पोस्टर के माध्यम से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
राष्ट्र प्रेस
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