योगी सरकार का पिछड़ा वर्ग आयोग गठन को हरी झंडी, पंकज चौधरी बोले — वंचितों की भागीदारी होगी मज़बूत
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 18 मई 2025 को एक समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को औपचारिक मंजूरी दे दी। पंचायत चुनावों से पहले आया यह फैसला ओबीसी आरक्षण को संवैधानिक और संस्थागत आधार देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने इसे सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक पहल करार दिया है।
आयोग का उद्देश्य और संरचना
पंकज चौधरी के अनुसार, यह आयोग ग्रामीण निकायों में पिछड़े वर्गों की सामाजिक और राजनीतिक हिस्सेदारी का विस्तृत अध्ययन करेगा। आरक्षण का निर्धारण सही आँकड़ों, पारदर्शी प्रक्रिया और संवैधानिक मानकों के अनुरूप किया जाएगा। आयोग की अध्यक्षता उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे, जिससे पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी।
चौधरी ने स्पष्ट किया कि आयोग में ऐसे विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा जिन्हें पिछड़े वर्गों से जुड़े विषयों की गहरी समझ हो। इससे पंचायत चुनावों में आरक्षण को लेकर भविष्य में उठने वाले विवादों और भ्रम की संभावनाएँ भी कम होंगी।
सरकार की प्रतिक्रिया और राजनीतिक संदर्भ
चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार लगातार ऐसे निर्णय ले रही है जिनसे गाँव, गरीब, पिछड़े और वंचित समाज की राजनीतिक भागीदारी मजबूत हो रही है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार के लिए सामाजिक न्याय केवल चुनावी नारा नहीं, बल्कि संवैधानिक और संस्थागत व्यवस्था के ज़रिए लागू की जाने वाली प्रतिबद्धता है।
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों की तैयारियाँ तेज़ हो रही हैं और ओबीसी आरक्षण का मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि पंचायतों में ओबीसी आरक्षण के लिए ट्रिपल टेस्ट का पालन अनिवार्य है।
केंद्र सरकार की योजनाओं का उल्लेख
चौधरी ने केंद्र सरकार द्वारा पिछड़े वर्गों के सशक्तीकरण के लिए उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिए जाने के साथ-साथ आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, हर घर जल, स्वनिधि योजना और विश्वकर्मा योजना जैसी योजनाओं का हवाला दिया, जिनके ज़रिए करोड़ों लोगों तक सीधा लाभ पहुँचाया गया है।
समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला
इस अवसर पर चौधरी ने समाजवादी पार्टी (सपा) पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा ने वर्षों तक पिछड़ों और दलितों के नाम पर केवल वोट बैंक की राजनीति की और सत्ता में रहते हुए सामाजिक न्याय के लिए कोई ठोस और पारदर्शी व्यवस्था विकसित नहीं की। उन्होंने कहा कि सपा की राजनीति परिवारवाद और तुष्टिकरण तक सीमित रही, जबकि भाजपा वास्तविक प्रतिनिधित्व और समान अवसर की राजनीति करती है।
आगे क्या होगा
आयोग के गठन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह ग्रामीण निकायों में ओबीसी प्रतिनिधित्व का अध्ययन शुरू करेगा और पंचायत चुनावों से पहले अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करने की उम्मीद है। भाजपा का कहना है कि यह कदम 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' के मंत्र को ज़मीन पर उतारने का ठोस उदाहरण है।