अखिलेश यादव का वादा: सत्ता में आए तो 90 दिन में पूरी होगी 69 हज़ार शिक्षक भर्ती, जातीय जनगणना भी

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अखिलेश यादव का वादा: सत्ता में आए तो 90 दिन में पूरी होगी 69 हज़ार शिक्षक भर्ती, जातीय जनगणना भी

सारांश

अखिलेश यादव ने लखनऊ में 'पीडीए ऑडिट' जारी कर 69 हज़ार शिक्षक भर्ती में OBC और SC आरक्षण की कथित अनदेखी का हिसाब माँगा। सपा सरकार बनने पर 90 दिन में भर्ती पूरी करने और जातीय जनगणना का वादा — यह सामाजिक न्याय की राजनीति को उत्तर प्रदेश चुनावों से पहले धार देने की स्पष्ट कोशिश है।

मुख्य बातें

अखिलेश यादव ने 20 मई 2025 को लखनऊ में 'पीडीए ऑडिट' दस्तावेज़ जारी किया।
सपा सरकार बनने पर 90 दिनों के भीतर 69 हज़ार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पूरी करने का वादा।
आरोप: OBC को निर्धारित 27% आरक्षण नहीं मिला; SC आरक्षण में कटौती और ST के पद रिक्त छोड़े गए।
सत्ता में आते ही जातीय जनगणना कराने की घोषणा।
लेटरल एंट्री और 2014 के बाद आरक्षण कमज़ोर करने की कोशिशों पर BJP को घेरा।
केंद्र और प्रदेश सरकार पर आर्थिक कुप्रबंधन का आरोप; 'ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी' के नारे को खोखला बताया।

समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 20 मई 2025 को लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया कि सपा की सरकार बनते ही 90 दिनों के भीतर 69 हज़ार सहायक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पूरी कर अभ्यर्थियों को न्याय दिलाया जाएगा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि सत्ता में आते ही जातीय जनगणना कराई जाएगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब शिक्षक भर्ती में आरक्षण की अनदेखी को लेकर अभ्यर्थी लंबे समय से न्याय की माँग कर रहे हैं।

पीडीए ऑडिट दस्तावेज़ जारी

प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने 'पीडीए ऑडिट' नामक दस्तावेज़ जारी किया, जिसमें उन्होंने दावा किया कि 2019 की 69 हज़ार सहायक शिक्षक भर्ती में पिछड़े, दलित और वंचित वर्गों के संवैधानिक अधिकारों की व्यापक अनदेखी की गई। उनके अनुसार, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को निर्धारित 27 प्रतिशत आरक्षण के बजाय बहुत कम प्रतिनिधित्व दिया गया। इसके साथ ही अनुसूचित जाति (SC) के आरक्षण में भी कटौती का आरोप लगाया गया और अनुसूचित जनजाति (ST) के कई पद रिक्त छोड़ दिए गए।

आरक्षण पर सरकार को घेरा

अखिलेश यादव ने कहा, 'जो सरकार पक्षपाती होती है, वह न्याय नहीं दे सकती। आरक्षण सामाजिक न्याय और समान अवसर का माध्यम है।' उन्होंने तर्क दिया कि यदि युवाओं और अभ्यर्थियों को अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए अदालतों का सहारा लेना पड़े, तो यह सरकार की पक्षपातपूर्ण कार्यप्रणाली को उजागर करता है। सपा प्रमुख ने 'लेटरल एंट्री' जैसी व्यवस्थाओं पर भी निशाना साधा और कहा कि इनके ज़रिए पिछड़े और वंचित वर्गों के अधिकारों को प्रभावित किया जा रहा है।

बाबा साहेब और संविधान का संदर्भ

अखिलेश यादव ने कहा कि समाज में लंबे समय से असमानता रही है और डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संविधान के माध्यम से सामाजिक न्याय का रास्ता तैयार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरक्षण किसी पर कृपा नहीं, बल्कि एक संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने 'बुलडोजर' के रूपक का इस्तेमाल करते हुए कहा कि अगर बुलडोजर चलाना ही है, तो उसका उपयोग समाज में फैली गैर-बराबरी को खत्म करने के लिए होना चाहिए।

भाजपा और केंद्र सरकार पर हमला

सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) 2014 के बाद से आरक्षण व्यवस्था को कमज़ोर करने की कोशिशें तेज़ कर रही है, जिसके सहारे वंचित वर्ग आगे बढ़ रहे हैं। महिला आरक्षण और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि आबादी के अनुपात में सभी वर्गों को उनके अधिकार मिलने चाहिए। चुनावी रणनीति पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि वे अपनी राजनीतिक रणनीति का खुलासा नहीं करेंगे।

अर्थव्यवस्था पर भी सवाल

अखिलेश यादव ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर आर्थिक मोर्चे पर भी हमला बोला। उनका कहना था कि आर्थिक स्थिति लगातार कमज़ोर हो रही है और सरकार आम लोगों को न कमाने दे रही है, न खर्च करने। उन्होंने कहा कि महज़ 'ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी' का नारा देने से ज़मीनी आर्थिक हालात नहीं सुधरेंगे। आने वाले विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में यह प्रेस कॉन्फ्रेंस सपा की सामाजिक न्याय केंद्रित रणनीति की एक स्पष्ट झलक मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह पहली बार नहीं है जब 69 हज़ार भर्ती को चुनावी मंच पर भुनाया जा रहा है — यह मामला वर्षों से अदालतों और सड़कों दोनों पर लड़ा जा रहा है। असली सवाल यह है कि जो भर्ती प्रक्रिया न्यायिक पेचीदगियों में उलझी है, उसे महज़ सत्ता बदलने से 90 दिन में कैसे सुलझाया जाएगा — इसका कोई ठोस रोडमैप अभी तक सामने नहीं आया। 'पीडीए ऑडिट' दस्तावेज़ आरक्षण उल्लंघन के दावे करता है, पर स्वतंत्र सत्यापन के बिना ये आँकड़े केवल राजनीतिक आख्यान बने रहते हैं। जातीय जनगणना का वादा विपक्ष की साझा भाषा बन चुकी है — असली परीक्षा इसे क्रियान्वित करने की इच्छाशक्ति और तंत्र की होगी।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिलेश यादव ने 69 हज़ार शिक्षक भर्ती को लेकर क्या वादा किया?
अखिलेश यादव ने कहा कि सपा की सरकार बनने पर 90 दिनों के भीतर 69 हज़ार सहायक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पूरी कर अभ्यर्थियों को न्याय दिलाया जाएगा। उनका आरोप है कि मौजूदा सरकार ने इस भर्ती में OBC, SC और ST वर्गों के आरक्षण की अनदेखी की।
पीडीए ऑडिट दस्तावेज़ क्या है?
पीडीए ऑडिट सपा द्वारा जारी एक दस्तावेज़ है जिसमें दावा किया गया है कि 2019 की 69 हज़ार शिक्षक भर्ती में पिछड़े (OBC), दलित (SC) और वंचित (ST) वर्गों को उनका संवैधानिक आरक्षण नहीं मिला। इसमें OBC को 27% के बजाय कम प्रतिनिधित्व और ST के पद रिक्त रहने का उल्लेख है।
अखिलेश यादव ने जातीय जनगणना पर क्या कहा?
सपा अध्यक्ष ने ऐलान किया कि सत्ता में आते ही जातीय जनगणना कराई जाएगी। उनका तर्क है कि आबादी के अनुपात में सभी वर्गों को उनके अधिकार तभी मिल सकते हैं जब सटीक जातिगत आँकड़े उपलब्ध हों।
सपा ने BJP पर आरक्षण को लेकर क्या आरोप लगाए?
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी 2014 के बाद से आरक्षण व्यवस्था को कमज़ोर करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने 'लेटरल एंट्री' जैसी व्यवस्थाओं को भी वंचित वर्गों के अधिकारों पर प्रहार बताया।
अखिलेश यादव ने अर्थव्यवस्था पर क्या टिप्पणी की?
सपा प्रमुख ने कहा कि देश की आर्थिक स्थिति लगातार कमज़ोर हो रही है और सरकार आम लोगों को न कमाने दे रही है, न खर्च करने। उन्होंने 'ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी' के नारे को ज़मीनी हकीकत से परे बताया।
राष्ट्र प्रेस
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