मध्य प्रदेश में 1,15,678 शिक्षकों के पद खाली, 1,895 स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं: उमंग सिंघार
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 2 जुलाई 2026 को राज्य की स्कूली शिक्षा व्यवस्था की गंभीर स्थिति पर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, प्रदेश में 2.89 लाख स्वीकृत शिक्षक पदों में से 1,15,678 पद रिक्त पड़े हैं, और 1,895 स्कूल ऐसे हैं जहाँ एक भी शिक्षक तैनात नहीं है।
मुख्य आरोप और आँकड़े
सिंघार ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक पोस्ट में कई चौंकाने वाले आँकड़े पेश किए। उनके अनुसार, 5,000 स्कूल जर्जर भवनों में संचालित हो रहे हैं, 3,400 स्कूलों में शौचालय की सुविधा तक नहीं है, और 59,000 स्कूलों में कंप्यूटर उपलब्ध नहीं हैं। ये आँकड़े राज्य में बुनियादी शैक्षिक ढाँचे की दुर्दशा को उजागर करते हैं।
सरकारी स्कूलों से विद्यार्थियों का पलायन
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि इन स्थितियों के कारण पिछले 10 वर्षों में सरकारी स्कूलों से 22.03 लाख विद्यार्थी कम हो गए हैं। उन्होंने कहा, 'यह सिर्फ़ शिक्षा व्यवस्था की विफलता नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के भविष्य के साथ किया गया सबसे बड़ा अन्याय है।' यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें नीतियाँ बना रही हैं।
उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप
गौरतलब है कि शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकार दोनों से जवाब माँगा है। न्यायालय का यह हस्तक्षेप इस बात का संकेत है कि स्थिति संवैधानिक और कानूनी दृष्टि से भी गंभीर मानी जा रही है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
सिंघार ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर सीधा हमला करते हुए कहा कि 'बच्चों का भविष्य विज्ञापनों से नहीं, शिक्षकों की भर्ती, बेहतर स्कूलों और जवाबदेह सरकार से बनता है।' उनका आरोप है कि भाजपा सरकार ने इन तीनों मोर्चों पर विफलता दिखाई है। भाजपा की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे क्या होगा
उच्च न्यायालय में मामले की सुनवाई जारी रहने के साथ, राज्य सरकार पर शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में तेज़ी लाने और स्कूलों की बुनियादी सुविधाएँ दुरुस्त करने का दबाव बढ़ने की संभावना है। विपक्ष के इन आँकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।