उत्तराखंड चुनाव 2027: मायावती ने बसपा पदाधिकारियों को दिए बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने के निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने मंगलवार, 26 मई को लखनऊ स्थित केंद्रीय कार्यालय में उत्तराखंड स्टेट यूनिट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की और आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सख्त निर्देश जारी किए। उन्होंने बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने और जमीन पर मजबूत उपस्थिति रखने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने पर विशेष जोर दिया।
बैठक में क्या हुए निर्देश
मायावती ने पदाधिकारियों से कहा कि उम्मीदवारों के चयन में उत्तर प्रदेश की तरह ही पूरी सतर्कता बरती जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल वही लोग टिकट के पात्र होंगे जो जमीनी स्तर पर सक्रिय हों और जिनकी जनता के बीच स्वीकार्यता हो। साथ ही उन्होंने विरोधी दलों के 'राजनीतिक हथकंडों' का मजबूती से मुकाबला करने के लिए बूथ स्तर तक संगठन को चुस्त-दुरुस्त रखने का आदेश दिया।
बसपा सुप्रीमो ने बैठक में मिले फीडबैक को 'काफी हद तक संतोषजनक' बताया, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि चुनावी तैयारियों को और तेज करने की जरूरत है।
किन वर्गों पर है बसपा की नज़र
मायावती ने दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों, मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के साथ-साथ आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को पार्टी से जोड़ने की रणनीति पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकारों की उपेक्षा और असुरक्षा का सामना कर रहे तबकों तक बसपा को मजबूती से पहुँचना होगा।
उन्होंने कहा कि पार्टी छोटी-छोटी बैठकों और जनसंपर्क अभियानों के ज़रिए 'बहुजन समाज' में राजनीतिक भागीदारी और सत्ता में हिस्सेदारी की भावना को और सुदृढ़ करेगी।
उत्तराखंड के इतिहास का संदर्भ
मायावती ने उत्तराखंड के गठन के शुरुआती दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि अलग राज्य बनने से पहले इस क्षेत्र में राजनीतिक और विकास संबंधी उपेक्षा की शिकायतें आम थीं। उन्होंने दावा किया कि बसपा सरकार के कार्यकाल में उत्तराखंड के लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए कई प्रशासनिक और जनहितकारी कदम उठाए गए थे। गौरतलब है कि उत्तराखंड में बसपा को पिछले विधानसभा चुनावों में सीमित सफलता मिली थी और पार्टी इस बार अपनी उपस्थिति बढ़ाने की कोशिश में है।
कार्यकर्ताओं से अपील
बसपा प्रमुख ने कार्यकर्ताओं से तन, मन और धन से संगठन को मजबूत करने की अपील की और कहा कि यही पार्टी की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बसपा बड़े पूंजीपतियों और धनबल की राजनीति पर नहीं, बल्कि जनहित और जनकल्याण की राजनीति पर भरोसा करती है।
आने वाले हफ्तों में बसपा के उत्तराखंड में और अधिक जनसंपर्क कार्यक्रम और क्षेत्रीय बैठकें आयोजित होने की संभावना है, जो पार्टी की चुनावी रणनीति की दिशा स्पष्ट करेंगी।