ब्रिक्स समिट: उरुग्वे के विदेश मंत्री लुबेटकिन ने PM मोदी को बताया 'भरोसेमंद वैश्विक नेता'
सारांश
मुख्य बातें
उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन ने 15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफलता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि शिखर सम्मेलन में सभी मुद्दों पर सहमति बनाना, भारत की और मोदी की वैश्विक स्थिति को दर्शाता है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन को लुबेटकिन ने द्विपक्षीय और बहुपक्षीय — दोनों मोर्चों पर सकारात्मक बताया।
मोदी के नेतृत्व पर लुबेटकिन की टिप्पणी
लुबेटकिन ने कहा, 'यह वास्तव में बहुत प्रभावशाली है। बहुत कम नेता ऐसे होते हैं जिन्होंने इतने लंबे समय तक लगातार इतनी मजबूती, स्थिरता और निरंतरता दिखाई हो।' उनके अनुसार, यह भारतीय समाज और देश के भविष्य के लिए एक बड़ी ताकत है।
उन्होंने आगे कहा कि शिखर सम्मेलन के अंतिम सत्र में जब PM मोदी ने 'सभी मुद्दों पर सहमति' की घोषणा की, तो यह वैश्विक स्तर पर उनकी भूमिका और महत्व को स्पष्ट करती है। लुबेटकिन ने यह भी कहा कि शनिवार और रविवार के दौरान दुनिया के कई प्रमुख नेता मोदी की बात ध्यान से सुन रहे थे और उन्हें एक 'अहम और भरोसेमंद नेता' के रूप में देख रहे थे।
भारत-उरुग्वे संबंध: नई शुरुआत
लुबेटकिन ने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम का भी उल्लेख किया — भारत ने अपने इतिहास में पहली बार उरुग्वे में दूतावास खोला है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले महीनों में भारत का विदेश मंत्रालय उरुग्वे जाएगा, दूतावास का औपचारिक उद्घाटन करेगा और दोनों देशों के बीच हुए समझौतों को ज़मीन पर उतारने की दिशा में काम करेगा।
गौरतलब है कि यह यात्रा केवल ब्रिक्स में भागीदारी तक सीमित नहीं थी — इसका उद्देश्य भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना और भारत-मर्कोसुर संबंधों को और विकसित करना भी था।
उच्च स्तरीय बैठकें
अपने चार दिवसीय दौरे में उरुग्वे के विदेश मंत्री ने नई दिल्ली में वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल तथा विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की। लुबेटकिन ने इन बैठकों के परिणामों को 'काफी सकारात्मक' बताया।
उन्होंने कहा कि जब उनकी यात्रा समाप्त होने वाली थी, तो वे 'बहुत खुश और पूरी तरह संतुष्ट' थे। यह ऐसे समय में आया है जब भारत की वैश्विक कूटनीतिक सक्रियता अपने उच्चतम स्तर पर है।
भारत की बदलती वैश्विक भूमिका
लुबेटकिन ने कहा कि आज भारत 10 से 20 साल पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत स्थिति में है — यह एक ऐसी स्थिति है जिसकी शायद तब कल्पना भी नहीं की गई थी। उनकी टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ बनने की कोशिश में लगातार कूटनीतिक प्रयास कर रहा है।
आने वाले महीनों में भारत-उरुग्वे दूतावास उद्घाटन और दोनों देशों के बीच समझौतों के क्रियान्वयन पर नज़र रहेगी।