15 सितंबर 2026
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ब्रिक्स समिट: उरुग्वे के विदेश मंत्री लुबेटकिन ने PM मोदी को बताया 'भरोसेमंद वैश्विक नेता'

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ब्रिक्स समिट: उरुग्वे के विदेश मंत्री लुबेटकिन ने PM मोदी को बताया 'भरोसेमंद वैश्विक नेता'

सारांश

उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन ने ब्रिक्स समिट के दौरान PM मोदी को 'भरोसेमंद वैश्विक नेता' करार दिया। साथ ही उन्होंने भारत के उरुग्वे में पहले दूतावास खुलने और भारत-मर्कोसुर संबंधों को मज़बूत करने की उम्मीद भी जताई — एक संकेत कि भारत की वैश्विक कूटनीतिक पहुँच नई ऊँचाइयों को छू रही है।

मुख्य बातें

उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन ने 15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में PM मोदी के नेतृत्व को 'प्रभावशाली और भरोसेमंद' बताया।
लुबेटकिन ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सभी मुद्दों पर सहमति को मोदी की वैश्विक भूमिका का प्रमाण बताया।
भारत ने अपने इतिहास में पहली बार उरुग्वे में दूतावास खोला; औपचारिक उद्घाटन आने वाले महीनों में प्रस्तावित।
लुबेटकिन ने नई दिल्ली में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और विदेश मंत्री एस.
जयशंकर से मुलाकात की।
भारत-मर्कोसुर संबंधों को और विकसित करने की दिशा में दोनों पक्षों की प्रतिबद्धता जताई गई।

उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन ने 15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफलता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि शिखर सम्मेलन में सभी मुद्दों पर सहमति बनाना, भारत की और मोदी की वैश्विक स्थिति को दर्शाता है। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन को लुबेटकिन ने द्विपक्षीय और बहुपक्षीय — दोनों मोर्चों पर सकारात्मक बताया।

मोदी के नेतृत्व पर लुबेटकिन की टिप्पणी

लुबेटकिन ने कहा, 'यह वास्तव में बहुत प्रभावशाली है। बहुत कम नेता ऐसे होते हैं जिन्होंने इतने लंबे समय तक लगातार इतनी मजबूती, स्थिरता और निरंतरता दिखाई हो।' उनके अनुसार, यह भारतीय समाज और देश के भविष्य के लिए एक बड़ी ताकत है।

उन्होंने आगे कहा कि शिखर सम्मेलन के अंतिम सत्र में जब PM मोदी ने 'सभी मुद्दों पर सहमति' की घोषणा की, तो यह वैश्विक स्तर पर उनकी भूमिका और महत्व को स्पष्ट करती है। लुबेटकिन ने यह भी कहा कि शनिवार और रविवार के दौरान दुनिया के कई प्रमुख नेता मोदी की बात ध्यान से सुन रहे थे और उन्हें एक 'अहम और भरोसेमंद नेता' के रूप में देख रहे थे।

भारत-उरुग्वे संबंध: नई शुरुआत

लुबेटकिन ने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम का भी उल्लेख किया — भारत ने अपने इतिहास में पहली बार उरुग्वे में दूतावास खोला है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले महीनों में भारत का विदेश मंत्रालय उरुग्वे जाएगा, दूतावास का औपचारिक उद्घाटन करेगा और दोनों देशों के बीच हुए समझौतों को ज़मीन पर उतारने की दिशा में काम करेगा।

गौरतलब है कि यह यात्रा केवल ब्रिक्स में भागीदारी तक सीमित नहीं थी — इसका उद्देश्य भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना और भारत-मर्कोसुर संबंधों को और विकसित करना भी था।

उच्च स्तरीय बैठकें

अपने चार दिवसीय दौरे में उरुग्वे के विदेश मंत्री ने नई दिल्ली में वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल तथा विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की। लुबेटकिन ने इन बैठकों के परिणामों को 'काफी सकारात्मक' बताया।

उन्होंने कहा कि जब उनकी यात्रा समाप्त होने वाली थी, तो वे 'बहुत खुश और पूरी तरह संतुष्ट' थे। यह ऐसे समय में आया है जब भारत की वैश्विक कूटनीतिक सक्रियता अपने उच्चतम स्तर पर है।

भारत की बदलती वैश्विक भूमिका

लुबेटकिन ने कहा कि आज भारत 10 से 20 साल पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत स्थिति में है — यह एक ऐसी स्थिति है जिसकी शायद तब कल्पना भी नहीं की गई थी। उनकी टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ बनने की कोशिश में लगातार कूटनीतिक प्रयास कर रहा है।

आने वाले महीनों में भारत-उरुग्वे दूतावास उद्घाटन और दोनों देशों के बीच समझौतों के क्रियान्वयन पर नज़र रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो लैटिन अमेरिका में भारत की बढ़ती कूटनीतिक उपस्थिति को दर्शाता है। हालाँकि, ब्रिक्स 'सहमति' के वास्तविक निहितार्थ और भारत-मर्कोसुर समझौतों के ज़मीनी क्रियान्वयन पर अभी नज़र रखी जानी चाहिए। जब तक समझौते लागू नहीं होते, ये सकारात्मक बयान केवल राजनयिक शिष्टाचार ही रहेंगे।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन ने PM मोदी के बारे में क्या कहा?
लुबेटकिन ने PM मोदी को 'भरोसेमंद और अहम वैश्विक नेता' बताया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स समिट में सभी मुद्दों पर सहमति बनाना मोदी की वैश्विक भूमिका को दर्शाता है और उनका लंबे समय तक स्थिर नेतृत्व भारत के लिए एक बड़ी ताकत है।
भारत ने उरुग्वे में दूतावास कब खोला?
भारत ने अपने इतिहास में पहली बार उरुग्वे में दूतावास खोला है। लुबेटकिन ने उम्मीद जताई कि आने वाले महीनों में भारत का विदेश मंत्रालय उरुग्वे जाएगा और दूतावास का औपचारिक उद्घाटन करेगा।
लुबेटकिन ने नई दिल्ली में किन भारतीय नेताओं से मुलाकात की?
अपने चार दिवसीय दौरे में उरुग्वे के विदेश मंत्री लुबेटकिन ने वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल तथा विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की। उन्होंने इन बैठकों के परिणामों को 'काफी सकारात्मक' बताया।
ब्रिक्स समिट 2026 में भारत की क्या भूमिका रही?
ब्रिक्स समिट 2026 की अध्यक्षता भारत ने की और PM मोदी ने शिखर सम्मेलन में सभी मुद्दों पर सहमति बनाने की घोषणा की। उरुग्वे के विदेश मंत्री के अनुसार, यह भारत की बढ़ती वैश्विक कूटनीतिक ताकत का प्रमाण है।
भारत-मर्कोसुर संबंधों पर क्या प्रगति हुई?
लुबेटकिन की यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य भारत और मर्कोसुर के बीच संबंधों को विकसित करना था। दोनों पक्षों ने आपसी समझौतों को ज़मीन पर उतारने की प्रतिबद्धता जताई, हालाँकि ठोस समयसीमा और विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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