15 सितंबर 2026
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ब्रिक्स सम्मेलन में भारत की अध्यक्षता 'बेहद सफल': उरुग्वे के विदेश मंत्री लुबेटकिन बोले — ग्लोबल साउथ में भारत प्रमुख नेता

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ब्रिक्स सम्मेलन में भारत की अध्यक्षता 'बेहद सफल': उरुग्वे के विदेश मंत्री लुबेटकिन बोले — ग्लोबल साउथ में भारत प्रमुख नेता

सारांश

उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन ने ब्रिक्स सम्मेलन को 'बेहद सफल' बताया और कहा — ग्लोबल साउथ में भारत आज प्रमुख नेताओं में से एक है। भारत ने पहली बार उरुग्वे में दूतावास खोला और दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने अगले एक वर्ष का रोडमैप तैयार किया।

मुख्य बातें

उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन ने 15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स सम्मेलन 'बेहद सफल' रहा और सर्वसम्मति से फाइनल डिक्लेरेशन हासिल हुआ।
लुबेटकिन ने कहा कि ग्लोबल साउथ में भारत आज प्रमुख नेताओं में से एक है और प्रधानमंत्री मोदी को वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद नेता के रूप में देखा जा रहा है।
भारत ने पहली बार अपने इतिहास में उरुग्वे में दूतावास खोला है।
जयशंकर और लुबेटकिन की बैठक में भारत-उरुग्वे के लिए एक वर्ष का रोडमैप तैयार किया गया।
उरुग्वे फिलहाल मर्कोसुर और सेलाक ( 33 देशों का समूह) दोनों की अध्यक्षता कर रहा है; राष्ट्रपति ओर्सी की भारत यात्रा पर विचार जारी है।
जल्द ही न्यूयॉर्क में भारत के विदेश मंत्री और सेलाक देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक होने वाली है।

उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन ने 15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में हुई विशेष बातचीत में कहा कि भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का परिणाम बेहद सफल रहा और एक गंभीर, ठोस तथा सर्वसम्मति पर आधारित अंतिम घोषणापत्र (फाइनल डिक्लेरेशन) हासिल किया गया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि आज के समय में, खासकर ग्लोबल साउथ में, भारत प्रमुख नेताओं में से एक है।

ब्रिक्स सम्मेलन की सफलता और भारत की भूमिका

लुबेटकिन ने कहा कि सम्मेलन की तैयारी के दौरान कई सवाल थे और बहुत कम लोगों को अंदाज़ा था कि अंतिम परिणाम क्या होंगे। लेकिन बैठक के अध्यक्ष के रूप में भारत सरकार ने दुनिया भर में चल रहे विभिन्न संघर्षों में शामिल अलग-अलग पक्षों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने और सहमति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि सिर्फ बातें करने के बजाय नतीजों को देखना चाहिए — और भारत ने इस सम्मेलन में सार्थक परिणाम हासिल किए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में लुबेटकिन ने कहा कि शनिवार और रविवार के दौरान मोदी दुनिया के कई महत्वपूर्ण नेताओं के साथ जिस तरह बातचीत कर रहे थे, उसमें सभी उनकी बात ध्यान से सुन रहे थे और उन्हें एक अहम व भरोसेमंद नेता के रूप में देख रहे थे। सम्मेलन के अंत में मोदी ने घोषणा की कि 'सभी मुद्दों पर सहमति' बन गई है।

भारत-उरुग्वे द्विपक्षीय संबंधों का रोडमैप

लुबेटकिन ने बताया कि उनकी इस यात्रा के तीन प्रमुख उद्देश्य थे — भारत-उरुग्वे द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करना, ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेना, और भारत-मर्कोसुर संबंधों को आगे बढ़ाना। उन्होंने कहा कि भारत के व्यापार मंत्री के साथ बैठक में भारत और मर्कोसुर के बीच वार्ता के अगले चरण को शुरू करने पर सहमति बनी है — जो अर्जेंटीना, ब्राज़ील और पराग्वे जैसे देशों के लिए भी रणनीतिक महत्व रखती है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ हुई लगभग आधे घंटे की बैठक में दोनों पक्षों ने अगले एक वर्ष के लिए भारत-उरुग्वे संबंधों का रोडमैप तैयार किया। इसमें आर्थिक सहयोग, राजनीतिक सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और बॉलीवुड सहित ऑडियो-विजुअल सहयोग के क्षेत्र शामिल हैं।

गौरतलब है कि 2025 में रियो डी जेनेरियो में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और उरुग्वे के राष्ट्रपति यामांडू ओर्सी की मुलाकात कई वर्षों बाद पहली बार हुई थी। लुबेटकिन ने बताया कि उस बैठक में मोदी अपने साथ एक कागज़ लेकर आए थे जिस पर अगले 10 से 15 वर्षों में भारत-उरुग्वे संबंधों को लेकर उनका दीर्घकालिक विज़न लिखा हुआ था।

उरुग्वे में भारतीय दूतावास और आगामी यात्राएँ

लुबेटकिन ने इस संदर्भ में एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की कि भारत ने पहली बार अपने इतिहास में उरुग्वे में दूतावास खोला है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले महीनों में भारत का विदेश मंत्रालय उरुग्वे आएगा और दूतावास का औपचारिक उद्घाटन करेगा। इसके अलावा, अक्टूबर 2027 तक एक महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल करने का लक्ष्य है और फिलहाल राष्ट्रपति ओर्सी की भारत यात्रा पर विचार किया जा रहा है।

उरुग्वे फिलहाल मर्कोसुर और सेलाक (CELAC) — जो लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र के 33 देशों का समूह है — दोनों की अध्यक्षता कर रहा है। इससे भारत और पूरे लैटिन अमेरिकी क्षेत्र के बीच संबंधों को मज़बूत करने का एक और महत्वपूर्ण अवसर बनता है। इसी संदर्भ में जल्द ही न्यूयॉर्क में भारत के विदेश मंत्री और सेलाक देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक होने वाली है।

वैश्विक संघर्षों पर उरुग्वे का रुख

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान विवाद पर लुबेटकिन ने कहा कि उरुग्वे एक शांतिप्रिय देश है और इन संघर्षों में शामिल नहीं है। उन्होंने यूक्रेन-रूस युद्ध और मध्य पूर्व की स्थिति का ज़िक्र करते हुए कहा कि इन संघर्षों में हज़ारों लोग, खासकर महिलाएँ और बच्चे, जानें गंवा रहे हैं — जो बेहद दुखद और चिंताजनक है। उनका मानना है कि इन समस्याओं का समाधान सैन्य कार्रवाई से नहीं, बल्कि गंभीर राजनीतिक वार्ता से ही संभव है।

यह ऐसे समय में आया है जब ब्रिक्स का विस्तार हो रहा है और ग्लोबल साउथ की आवाज़ अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर तेज़ी से मज़बूत हो रही है। भारत-उरुग्वे संबंधों में यह नई गर्मजोशी आने वाले वर्षों में दोनों देशों के लिए नए द्वार खोल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

शांतिप्रिय लेकिन रणनीतिक रूप से सक्रिय देश का भारत को 'ग्लोबल साउथ का प्रमुख नेता' कहना महज़ कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं है — यह उस व्यापक बदलाव की पुष्टि है जिसमें लैटिन अमेरिका भारत को अब एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में देख रहा है। गौरतलब है कि भारत ने पहली बार उरुग्वे में दूतावास खोला और मर्कोसुर वार्ता का नया चरण शुरू किया — ये दोनों कदम संकेत देते हैं कि भारत की विदेश नीति अब बड़ी शक्तियों पर निर्भरता से आगे बढ़कर दक्षिण-दक्षिण साझेदारी को व्यावहारिक धरातल पर उतार रही है। हालांकि, रोडमैप और विज़न दस्तावेज़ों की राजनीति में असली कसौटी यह होगी कि जयशंकर-लुबेटकिन की बैठक में तैयार एजेंडा वास्तव में व्यापार और निवेश के ठोस नतीजों में बदल पाता है या नहीं।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिक्स सम्मेलन में भारत की अध्यक्षता पर उरुग्वे के विदेश मंत्री ने क्या कहा?
उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन ने कहा कि भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 'बेहद सफल' रहा और एक गंभीर, ठोस तथा सर्वसम्मति पर आधारित फाइनल डिक्लेरेशन हासिल हुआ। उन्होंने कहा कि भारत ने विभिन्न पक्षों के बीच सहमति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ग्लोबल साउथ में भारत की भूमिका को लेकर उरुग्वे का क्या रुख है?
लुबेटकिन ने स्पष्ट रूप से कहा कि आज के समय में, खासकर ग्लोबल साउथ में, भारत प्रमुख नेताओं में से एक है। उनके अनुसार प्रधानमंत्री मोदी को वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद और अहम नेता के रूप में देखा जा रहा है।
भारत और उरुग्वे के बीच संबंध आगे कैसे बढ़ेंगे?
विदेश मंत्री जयशंकर और लुबेटकिन की बैठक में अगले एक वर्ष के लिए भारत-उरुग्वे संबंधों का रोडमैप तैयार किया गया है। इसमें आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक सहयोग शामिल है; साथ ही उरुग्वे के राष्ट्रपति ओर्सी की भारत यात्रा पर भी विचार किया जा रहा है।
भारत और मर्कोसुर के बीच वार्ता की क्या स्थिति है?
लुबेटकिन ने बताया कि भारत के व्यापार मंत्री के साथ बैठक में भारत-मर्कोसुर वार्ता के अगले चरण को शुरू करने पर सहमति बनी है। यह अर्जेंटीना, ब्राज़ील, पराग्वे और उरुग्वे सभी मर्कोसुर देशों के लिए रणनीतिक महत्व रखती है।
उरुग्वे में भारतीय दूतावास का क्या महत्व है?
भारत ने पहली बार अपने इतिहास में उरुग्वे में दूतावास खोला है, जो दोनों देशों के बीच गहराते संबंधों का प्रतीक है। लुबेटकिन ने उम्मीद जताई कि आने वाले महीनों में भारत का विदेश मंत्रालय उरुग्वे आएगा और दूतावास का औपचारिक उद्घाटन करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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