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राजमाता विजयराज कुमारी मेवाड़ का 83 वर्ष की आयु में निधन, उदयपुर में शोक की लहर

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राजमाता विजयराज कुमारी मेवाड़ का 83 वर्ष की आयु में निधन, उदयपुर में शोक की लहर

सारांश

उदयपुर ने एक ऐसी शख्सियत को खोया जो राजमहल की सीमाओं से बाहर निकलकर शहर के सामाजिक और शैक्षणिक जीवन की धुरी बन गई थीं। राजमाता विजयराज कुमारी मेवाड़ का ८३ वर्ष की आयु में निधन एक युग के अंत का प्रतीक है — गरिमा, सेवा और परंपरा के संगम का।

मुख्य बातें

राजमाता विजयराज कुमारी मेवाड़ का सोमवार देर रात लंबी बीमारी के बाद 83 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
वे कच्छ के महाराज फतेह सिंह की पुत्री और स्वर्गीय अरविंद सिंह मेवाड़ की धर्मपत्नी थीं।
अंतिम संस्कार महासतियाजी, आहार में शाही गार्ड ऑफ ऑनर की उपस्थिति में पारंपरिक रीति-रिवाजों से संपन्न हुआ।
महाराणा मेवाड़ पब्लिक स्कूल (MMPS) के विकास में उनका योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा — 1980 के दशक में उन्होंने संस्था के कायाकल्प में अहम भूमिका निभाई।
शोक सभाएँ 16 से 23 सितंबर 2026 तक प्रतिदिन दोपहर 2 से 3 बजे , शंभू निवास पैलेस, उदयपुर में आयोजित होंगी।

राजमाता विजयराज कुमारी मेवाड़ का सोमवार देर रात लंबी बीमारी के बाद 83 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके जाने से उदयपुर और समूचे मेवाड़-मारवाड़ क्षेत्र में गहरे शोक की लहर दौड़ गई है। मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार की वरिष्ठ सदस्य के रूप में उन्होंने दशकों तक शिक्षा, सामाजिक सेवा और सांस्कृतिक संरक्षण में अप्रतिम योगदान दिया था।

मुख्य घटनाक्रम

राजमाता विजयराज कुमारी की अंतिम यात्रा उदयपुर के सिटी पैलेस परिसर स्थित शंभू निवास पैलेस से प्रातः रवाना हुई। बड़ी संख्या में नागरिक, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और गणमान्य व्यक्ति अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए एकत्रित हुए। इसके बाद शवयात्रा मेवाड़ परिवार के ऐतिहासिक शाही श्मशान घाट महासतियाजी, आहार की ओर बढ़ी, जहाँ पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार शाही गार्ड ऑफ ऑनर की उपस्थिति में अंतिम संस्कार संपन्न किया गया।

गौरतलब है कि उनकी अंतिम यात्रा में उमड़े जनसैलाब ने यह स्पष्ट कर दिया कि उदयपुरवासियों के साथ उनका रिश्ता राजपरिवार की औपचारिकता से कहीं गहरा था।

राजमाता का परिचय और परिवार

राजमाता विजयराज कुमारी का जन्म गुजरात के कच्छ के पूर्व राजपरिवार में हुआ था। वे कच्छ के महाराज फतेह सिंह की छोटी पुत्री और कच्छ के महाराव की पोती थीं। विवाह के बाद वे मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार की सदस्य बनीं और स्वर्गीय अरविंद सिंह मेवाड़ की धर्मपत्नी रहीं। वे प्रख्यात समाजसेवी एवं शिक्षाविद डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ की माता थीं, जो मेवाड़ परिवार की वर्तमान पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं।

उन्होंने ऊटी के फ्रांसिस्कन कॉन्वेंट स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की थी, जिसने उन्हें आधुनिक दृष्टिकोण के साथ-साथ मजबूत मूल्यों से भी परिचित कराया।

शिक्षा और सामाजिक सेवा में योगदान

राजमाता विजयराज कुमारी के सार्वजनिक जीवन में शिक्षा सर्वोपरि रही। उदयपुर में बसने के बाद उन्होंने शिक्षा तक पहुँच बढ़ाने और महिला सशक्तीकरण की पहलों का सक्रिय समर्थन किया। महाराणा मेवाड़ पब्लिक स्कूल (MMPS) के साथ उनका जुड़ाव विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा — 1980 के दशक में उन्होंने इस संस्था को एक आधुनिक, अनुशासित और गुणवत्ता-केंद्रित शैक्षणिक मॉडल की दिशा में रूपांतरित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उनके करीबियों के अनुसार, शिक्षा उनके लिए केवल संस्था-निर्माण नहीं, बल्कि युवाओं के जीवन में अवसर सृजित करने का माध्यम थी। MMPS से पढ़कर निकली कई पीढ़ियाँ आज उच्च शिक्षा और पेशेवर क्षेत्रों में स्थापित हैं।

शोक सभाएँ और श्रद्धांजलि

भारत और विदेश से प्रशंसकों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक नेताओं ने राजमाता को श्रद्धांजलि अर्पित की है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, उनकी स्मृति में शोक सभाओं का आयोजन 16 सितंबर से 23 सितंबर 2026 तक प्रतिदिन दोपहर 2:00 बजे से 3:00 बजे के बीच शंभू निवास पैलेस, सिटी पैलेस परिसर, उदयपुर में किया जाएगा।

उनके निधन से उदयपुर ने केवल एक राजपरिवार की सदस्य नहीं, बल्कि उस शख्सियत को खोया है जो दशकों में शहर के सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने का अभिन्न हिस्सा बन चुकी थीं। आने वाले दिनों में मेवाड़ परिवार और शहरवासी मिलकर उनकी विरासत को सहेजने का संकल्प लेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि समाज-सेवा के सक्रिय भागीदार होते थे। महाराणा मेवाड़ पब्लिक स्कूल जैसी संस्थाओं में उनका व्यावहारिक योगदान यह सिद्ध करता है कि सामाजिक प्रभाव पद से नहीं, प्रतिबद्धता से आता है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर राजपरिवारों को पर्यटन-आइकन तक सीमित कर देती है — यहाँ वह चूक जाती है कि इन परिवारों ने स्वतंत्रता के बाद संस्था-निर्माण में जो शांत भूमिका निभाई, वह अनेक सरकारी योजनाओं से अधिक टिकाऊ साबित हुई।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजमाता विजयराज कुमारी मेवाड़ कौन थीं?
वे मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार की वरिष्ठ सदस्य थीं और स्वर्गीय अरविंद सिंह मेवाड़ की धर्मपत्नी थीं। गुजरात के कच्छ के राजपरिवार में जन्मी राजमाता शिक्षा और सामाजिक सेवा के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता के लिए उदयपुर में विशेष रूप से जानी जाती थीं।
राजमाता विजयराज कुमारी का निधन कब और कैसे हुआ?
15 सितंबर 2026 को सोमवार देर रात लंबी बीमारी के बाद 83 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार उदयपुर के ऐतिहासिक शाही श्मशान घाट महासतियाजी, आहार में शाही गार्ड ऑफ ऑनर की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
शिक्षा के क्षेत्र में राजमाता का क्या योगदान था?
राजमाता विजयराज कुमारी ने 1980 के दशक में महाराणा मेवाड़ पब्लिक स्कूल (MMPS) के विकास और आधुनिकीकरण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से संस्था गुणवत्ता-केंद्रित शिक्षा का केंद्र बनी, जिससे कई पीढ़ियों के छात्र उच्च शिक्षा और पेशेवर करियर की ओर बढ़े।
राजमाता की स्मृति में शोक सभाएँ कब और कहाँ होंगी?
शोक सभाएँ 16 सितंबर से 23 सितंबर 2026 तक प्रतिदिन दोपहर 2:00 बजे से 3:00 बजे के बीच शंभू निवास पैलेस, सिटी पैलेस परिसर, उदयपुर में आयोजित की जाएंगी। इनमें आम नागरिक, सामाजिक संगठन और गणमान्य व्यक्ति श्रद्धांजलि अर्पित कर सकेंगे।
राजमाता के परिवार में कौन हैं?
राजमाता विजयराज कुमारी कच्छ के महाराज फतेह सिंह की पुत्री और कच्छ के महाराव की पोती थीं। विवाह के बाद वे स्वर्गीय अरविंद सिंह मेवाड़ की धर्मपत्नी बनीं और प्रख्यात समाजसेवी व शिक्षाविद डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ की माता थीं।
राष्ट्र प्रेस
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