5 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पंडवानी की आवाज़ तीजन बाई नहीं रहीं: 70 वर्ष की आयु में रायपुर एम्स में निधन, दुर्ग में उमड़ा जनसैलाब

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पंडवानी की आवाज़ तीजन बाई नहीं रहीं: 70 वर्ष की आयु में रायपुर एम्स में निधन, दुर्ग में उमड़ा जनसैलाब

सारांश

पंडवानी को विश्व मंच पर पहचान दिलाने वाली तीजन बाई नहीं रहीं। 70 वर्ष की आयु में रायपुर एम्स में उनका निधन हुआ। पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण — तीनों सम्मान पाने वाली इस विरल कलाकार ने 26 देशों में छत्तीसगढ़ की लोक विरासत का परचम लहराया। दुर्ग में हज़ारों लोग उन्हें अंतिम विदाई देने उमड़े।

मुख्य बातें

पद्म विभूषण से सम्मानित पंडवानी गायिका तीजन बाई का 5 जुलाई 2026 को रायपुर एम्स में 70 वर्ष की आयु में निधन हुआ।
पार्थिव शरीर दुर्ग स्थित आवास पर लाया गया; हज़ारों लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़े।
तीजन बाई को भारत सरकार ने पद्म श्री , पद्म भूषण और पद्म विभूषण — तीनों सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाजा था।
उन्होंने 26 देशों में पंडवानी कला का प्रदर्शन कर भारतीय लोक संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
भिलाई-चरोदा महापौर निर्मल कोसरे सहित जनप्रतिनिधियों और कला जगत ने गहरा शोक व्यक्त किया।

पद्म विभूषण से सम्मानित छत्तीसगढ़ की विश्वविख्यात पंडवानी गायिका तीजन बाई का 5 जुलाई 2026 को रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया। वे 70 वर्ष की थीं और लंबे समय से बीमार चल रही थीं। उनके निधन की सूचना फैलते ही पूरे छत्तीसगढ़ में शोक की लहर दौड़ गई।

दुर्ग में अंतिम दर्शन, सड़कों पर उमड़े लोग

तीजन बाई का पार्थिव शरीर दुर्ग स्थित उनके आवास पर अंतिम दर्शन के लिए लाया गया। हज़ारों की संख्या में कलाकार, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए सड़कों पर उमड़ पड़े। लोग उनकी तस्वीरों और स्मृतियों के साथ भावुक होकर श्रद्धांजलि अर्पित करते दिखे।

जनप्रतिनिधियों और कला जगत की श्रद्धांजलि

भिलाई-चरोदा के महापौर निर्मल कोसरे ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा, 'यह हमारे देश और छत्तीसगढ़ दोनों के लिए अत्यंत गौरव की बात है कि तीजन बाई को भारत सरकार द्वारा पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण — तीनों सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाजा गया। उनके जैसे विरले कलाकार सदियों में जन्म लेते हैं।' उन्होंने आगे कहा, 'एक छोटे से गाँव में पली-बढ़ीं तीजन बाई ने अपनी लोक कला के माध्यम से न केवल अपना, बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया। उन्होंने दुनिया के 26 देशों में पंडवानी कला की प्रस्तुति देकर भारतीय लोक संस्कृति का परचम लहराया।'

महापौर कोसरे ने यह भी कहा कि 'तीजन बाई की बुलंद आवाज़, उनकी अद्वितीय कला और उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा एक महान प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।'

कौन थीं तीजन बाई

तीजन बाई का जन्म छत्तीसगढ़ के भिलाई क्षेत्र में हुआ था। बचपन से ही उनका गहरा जुड़ाव पंडवानी लोक कला से रहा और उन्होंने बहुत कम उम्र में मंच पर प्रस्तुति देना आरंभ कर दिया था। महाभारत की कथाओं को जीवंत रूप देने का उनका अनोखा अंदाज़, दमदार आवाज़ और मंच पर सजीव अभिनय उन्हें समकालीन कलाकारों से सर्वथा अलग बनाता था।

गौरतलब है कि भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण — तीनों प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों से अलंकृत किया था, जो किसी भी लोक कलाकार के लिए अत्यंत दुर्लभ उपलब्धि है। 26 देशों में अपनी कला का प्रदर्शन कर उन्होंने पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।

छत्तीसगढ़ की लोक विरासत को अपूरणीय क्षति

तीजन बाई के निधन से छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा को एक अपूरणीय क्षति हुई है। पंडवानी — जो छत्तीसगढ़ की मौखिक महाभारत-गायन परंपरा है — को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने का श्रेय काफी हद तक उन्हीं को जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में लोक कलाओं के संरक्षण को लेकर चर्चा तेज़ हो रही है।

आगे क्या

तीजन बाई के निधन के बाद उनकी विरासत को आगे बढ़ाने और पंडवानी कला के संरक्षण की माँग उठने की संभावना है। उनके शिष्य और सांस्कृतिक संस्थाएँ इस परंपरा को जीवित रखने की दिशा में प्रयास जारी रखेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसके लिए कोई सुदृढ़ राष्ट्रीय संरक्षण ढाँचा आज भी नहीं है। तीन पद्म सम्मान पाना उनकी महानता का प्रमाण है, पर यह भी सोचने की ज़रूरत है कि उनके बाद पंडवानी के अगले वाहक को वह मंच और संसाधन मिलेंगे या नहीं जो इस कला को जीवित रखने के लिए ज़रूरी हैं।
RashtraPress
5 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तीजन बाई कौन थीं और उनका निधन कब हुआ?
तीजन बाई छत्तीसगढ़ की विश्वविख्यात पंडवानी लोक गायिका थीं, जिनका 5 जुलाई 2026 को रायपुर एम्स में 70 वर्ष की आयु में निधन हुआ। उन्हें भारत सरकार ने पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण — तीनों सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से अलंकृत किया था।
पंडवानी क्या है और तीजन बाई का इसमें क्या योगदान था?
पंडवानी छत्तीसगढ़ की पारंपरिक मौखिक गायन शैली है, जिसमें महाभारत की कथाएँ एकल कलाकार द्वारा सजीव रूप में प्रस्तुत की जाती हैं। तीजन बाई ने इस कला को 26 देशों में प्रस्तुत कर अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई और इसे मुख्यधारा के सांस्कृतिक मंच पर स्थापित किया।
तीजन बाई को कौन-कौन से सम्मान मिले थे?
तीजन बाई को भारत सरकार द्वारा पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण — तीनों प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान प्राप्त हुए थे। किसी लोक कलाकार का तीनों पद्म सम्मान पाना अत्यंत दुर्लभ उपलब्धि मानी जाती है।
तीजन बाई के निधन से छत्तीसगढ़ की लोक कला पर क्या असर पड़ेगा?
तीजन बाई पंडवानी की सबसे प्रमुख और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचानी जाने वाली कलाकार थीं। उनके निधन से इस लोक परंपरा को एक अपूरणीय क्षति हुई है। उनके शिष्य और सांस्कृतिक संस्थाएँ इस विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगी।
दुर्ग में अंतिम दर्शन के दौरान क्या हुआ?
तीजन बाई का पार्थिव शरीर दुर्ग स्थित उनके आवास पर लाया गया, जहाँ हज़ारों की संख्या में कलाकार, जनप्रतिनिधि और आम नागरिक उन्हें अंतिम विदाई देने उमड़े। भिलाई-चरोदा महापौर निर्मल कोसरे सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 घंटे पहले
  2. 4 घंटे पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 12 महीने पहले