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पंडवानी की आवाज़ तीजन बाई नहीं रहीं: राष्ट्रपति मुर्मु, अमित शाह और योगी समेत देशभर के नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

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पंडवानी की आवाज़ तीजन बाई नहीं रहीं: राष्ट्रपति मुर्मु, अमित शाह और योगी समेत देशभर के नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

सारांश

पंडवानी की महान साधिका तीजन बाई के जाने से देश ने एक ऐसी आवाज़ खो दी जिसने महाभारत की कथाओं को लोक-मंच पर अमर किया। राष्ट्रपति से लेकर मुख्यमंत्रियों तक — सभी ने इसे भारतीय सांस्कृतिक विरासत की अपूरणीय क्षति बताया। छत्तीसगढ़ सरकार ने राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की घोषणा की।

मुख्य बातें

पद्म विभूषण, पद्मभूषण और पद्मश्री से सम्मानित तीजन बाई का 5 जुलाई को निधन हो गया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें भारतीय सांस्कृतिक विरासत का अमूल्य योगदानकर्ता बताया।
गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा — यह निधन कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
CM विष्णुदेव साय रायपुर एम्स पहुँचे और घोषणा की कि अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ होगा।
कांग्रेस नेता भूपेश बघेल और CM योगी आदित्यनाथ समेत सभी दलों के नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
तीजन बाई ने पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई — 1988 में पद्मश्री, 2003 में पद्मभूषण और 2019 में पद्म विभूषण मिला।

पद्म विभूषण से सम्मानित विश्वविख्यात पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन पर 5 जुलाई को पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत देश के अनेक प्रमुख नेताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी ने उनके जाने को भारतीय लोककला और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के लिए एक अपूरणीय क्षति करार दिया।

राष्ट्रपति और गृह मंत्री की संवेदनाएँ

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने शोक संदेश में कहा, 'प्रख्यात पंडवानी कलाकार तीजन बाई के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। उन्होंने अपनी सशक्त आवाज, प्रभावशाली उपस्थिति और अनोखी प्रस्तुति से महाभारत की कथाओं को मंच पर जीवंत किया।' राष्ट्रपति ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध पंडवानी परंपरा को देश-विदेश में पहचान दिलाने में तीजन बाई का योगदान सदा स्मरणीय रहेगा और उन्होंने दिवंगत कलाकार के प्रियजनों तथा प्रशंसकों के प्रति गहन संवेदनाएँ व्यक्त कीं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'पद्म विभूषण से सम्मानित प्रख्यात पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। अपनी अद्वितीय प्रतिभा और समर्पण से उन्होंने पंडवानी लोककला को विशिष्ट पहचान दिलाई।' शाह ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा को शांति और शोकाकुल परिजनों को शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

छत्तीसगढ़ सरकार का राजकीय सम्मान

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय स्वयं रायपुर एम्स पहुँचे और तीजन बाई के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'तीजन बाई का निधन छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने पंडवानी को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाई।' मुख्यमंत्री साय ने घोषणा की कि राज्य सरकार की ओर से उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा — यह सम्मान उनकी असाधारण सांस्कृतिक विरासत की स्वीकृति है।

अन्य नेताओं की श्रद्धांजलि

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिखा कि तीजन बाई ने अपनी विलक्षण प्रतिभा, सशक्त अभिव्यक्ति और संगीत साधना के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा 'पंडवानी' को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया। उन्होंने भारतीय लोककला व सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया।

छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने मार्मिक शब्दों में कहा, 'आज पंडवानी का एक सुर सदा के लिए शांत हो गया है।' उन्होंने तीजन बाई को पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्म विभूषण — तीनों सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से अलंकृत छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता की सशक्त प्रतीक बताया।

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा, 'छत्तीसगढ़ की अनमोल रत्न, महान पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन देश में कला और संस्कृति की बड़ी क्षति है। उन्होंने अपने गायन से पंडवानी विधा को सजीव रखा और छत्तीसगढ़ का नाम विश्व पटल पर गौरवान्वित किया।'

तीजन बाई की विरासत

तीजन बाई छत्तीसगढ़ की पंडवानी लोक-गायन परंपरा की सबसे चमकदार नाम थीं — एक ऐसी विधा जिसमें महाभारत के प्रसंगों को एकल कलाकार द्वारा गायन, अभिनय और वाद्य के संयोजन से प्रस्तुत किया जाता है। उन्होंने इस परंपरा को न केवल भारत, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी पहचान दिलाई। पद्मश्री (1988), पद्मभूषण (2003) और पद्म विभूषण (2019) से सम्मानित तीजन बाई ने दशकों की साधना से पंडवानी को एक वैश्विक पहचान दी। गौरतलब है कि उनके जाने से वह पीढ़ी का एक अध्याय बंद होता है जिसने लोककला को जनमानस से सीधे जोड़ा।

उनके निधन के बाद अब यह प्रश्न सांस्कृतिक जगत के सामने है कि पंडवानी की इस समृद्ध परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक कैसे संरक्षित और संवर्धित किया जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस जीवित परंपरा के क्षरण की चेतावनी है जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक रूप से चली आई। राजकीय सम्मान और नेताओं की श्रद्धांजलि स्वागत योग्य हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि पंडवानी जैसी विधाओं को संस्थागत संरक्षण कितना मिल रहा है। सरकारी अकादमियाँ और सांस्कृतिक मंत्रालय अक्सर लोककला को तब याद करते हैं जब कोई दिग्गज चला जाता है — न कि तब जब उन्हें जीवित रहते हुए प्रशिक्षण और मंच की ज़रूरत होती है। तीजन बाई की विरासत को सच्ची श्रद्धांजलि वह होगी जब पंडवानी के नए कलाकारों को राष्ट्रीय मंच, वित्त और दस्तावेज़ीकरण का समर्थन मिले।
RashtraPress
5 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तीजन बाई कौन थीं और उनकी क्या विशेषता थी?
तीजन बाई छत्तीसगढ़ की विश्वविख्यात पंडवानी लोक-गायिका थीं, जिन्होंने महाभारत के प्रसंगों को एकल गायन, अभिनय और वाद्य के संयोजन से अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँचाया। वे पद्मश्री (1988), पद्मभूषण (2003) और पद्म विभूषण (2019) — तीनों सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से अलंकृत थीं।
तीजन बाई का निधन कब हुआ?
तीजन बाई का निधन 5 जुलाई को हुआ। उनके पार्थिव शरीर को रायपुर एम्स में रखा गया, जहाँ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पहुँचकर पुष्पचक्र अर्पित किया।
तीजन बाई का अंतिम संस्कार कैसे होगा?
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने घोषणा की है कि राज्य सरकार की ओर से तीजन बाई का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।
किन-किन नेताओं ने तीजन बाई को श्रद्धांजलि दी?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल समेत सभी दलों के नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
पंडवानी क्या है और तीजन बाई ने इसे कैसे आगे बढ़ाया?
पंडवानी छत्तीसगढ़ की लोक-गायन परंपरा है जिसमें एकल कलाकार महाभारत के प्रसंगों को गायन, अभिनय और वाद्य के माध्यम से प्रस्तुत करता है। तीजन बाई ने दशकों की साधना से इस विधा को न केवल भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान दिलाई और अनगिनत नए कलाकारों को प्रेरणा दी।
राष्ट्र प्रेस
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