छत्तीसगढ़ विधानसभा मानसून सत्र: तीजन बाई को श्रद्धांजलि, राम मंदिर प्रसाद चोरी पर BJP-कांग्रेस में तकरार
सारांश
मुख्य बातें
छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार, 13 जुलाई को रायपुर में पंडवानी की महान गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई को भावपूर्ण श्रद्धांजलि के साथ आरंभ हुआ। सदन ने उनकी स्मृति में दो मिनट का मौन रखा और सम्मान स्वरूप कार्यवाही पाँच मिनट के लिए स्थगित की। श्रद्धांजलि सत्र के बाद सदन में राम मंदिर से प्रसाद की कथित चोरी के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच तीखा वाद-विवाद भड़क उठा।
तीजन बाई को भावभीनी विदाई
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शोक प्रस्ताव पर बोलते हुए कहा कि तीजन बाई ने पंडवानी की कापालिक शैली को नई पहचान दी और अपनी असाधारण प्रतिभा से छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को वैश्विक मंच तक पहुँचाया। उन्होंने कहा कि चुनौतीपूर्ण सामाजिक परिस्थितियों के बावजूद उनके संघर्ष और समर्पण ने उन्हें महान ऊँचाइयों पर स्थापित किया और उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। साय ने यह भी कहा कि उनके निधन से राज्य को अपूरणीय क्षति हुई है।
सर्वदलीय शोक, मंत्री और विधायकों ने रखी बात
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने तीजन बाई को छत्तीसगढ़ को अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाने वाली कलाकार बताया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उन्हें सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों से ऊपर उठकर राज्य को गौरव दिलाने वाली शख्सियत के रूप में याद किया और कहा कि उनका जीवन संघर्ष और समर्पण का प्रतीक है। संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप ने लोक कला के प्रति उनके अटूट समर्पण को नमन करते हुए कहा कि लोक संस्कृति ने एक अमूल्य धरोहर खो दी है।
इसके अलावा गजेंद्र यादव, किरण सिंह देव, अनुज शर्मा, कुंवर सिंह निषाद और भैयालाल कोरसेवावाड़ा सहित अनेक मंत्रियों और विधायकों ने पंडवानी के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार में उनकी अग्रणी भूमिका को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
राम मंदिर प्रसाद चोरी पर सदन में हंगामा
श्रद्धांजलि सत्र समाप्त होते ही सदन की कार्यवाही का माहौल बदल गया। राम मंदिर से प्रसाद की कथित चोरी के मुद्दे पर कांग्रेस सदस्यों ने स्थगन प्रस्ताव पेश किया। सदन ने यह प्रस्ताव खारिज कर दिया, जिसके बाद कांग्रेस सदस्यों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और सत्तारूढ़ BJP तथा विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। गौरतलब है कि मानसून सत्र के पहले ही दिन इस विवाद ने सदन की कार्यवाही को प्रभावित किया।
तीजन बाई: एक सांस्कृतिक युग का अंत
तीजन बाई छत्तीसगढ़ की पंडवानी परंपरा की सबसे प्रतिष्ठित प्रतिनिधि थीं। उन्हें पद्म विभूषण सहित देश के कई सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्राप्त हुए थे। उनकी कापालिक शैली की गायकी ने छत्तीसगढ़ की लोक कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। उनके निधन के साथ भारतीय लोक कला जगत ने एक ऐसी विभूति खोई है जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी।
आगे क्या
मानसून सत्र के दौरान राम मंदिर प्रसाद चोरी विवाद सहित अन्य राजनीतिक मुद्दों पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच और तीखी बहस की संभावना है। सत्र में राज्य के बजटीय और विधायी एजेंडे पर भी चर्चा होनी है।