देगुला मठ प्रमुख को अंतिम विदाई: सीएम शिवकुमार बोले — मठों की देखभाल घर जैसी होनी चाहिए
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने मंगलवार, 23 जून 2026 को कनकपुरा स्थित देगुला मठ में दिवंगत मठाधीश श्री मुम्मड़ी निर्वाण स्वामीजी को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि जिस तरह लोग अपने घरों की देखभाल करते हैं, उसी तरह मठों और आध्यात्मिक संस्थानों का भी संरक्षण और संवर्धन किया जाना चाहिए। स्वामीजी का सोमवार को निधन हो गया था, और उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
मुख्यमंत्री की भावुक विदाई
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने देगुला मठ परिसर में पहुँचकर स्वामीजी के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनकी पादुकाओं को नमन किया। राजकीय सम्मान के तहत पुलिसकर्मियों ने तीन राउंड की सलामी दी। इसके बाद शिवकुमार ने मठ के कनिष्ठ स्वामी को राष्ट्रीय ध्वज सौंपा — इस भावुक क्षण में उनकी आँखों से आँसू छलक पड़े। उपस्थित श्रद्धालु भी इस दृश्य को देखकर भावविभोर हो उठे।
अपनी भावुकता के बारे में पूछे जाने पर शिवकुमार ने कहा, 'यह एक भक्त और ईश्वर के बीच का संबंध है।' बाद में वे स्वामीजी की गद्दी पर गए, जहाँ उन्होंने विभूति अर्पित की और पूजा-अर्चना की।
शिवकुमार और देगुला मठ का पीढ़ियों पुराना नाता
मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उनके परिवार का इस मठ से सैकड़ों वर्षों पुराना आध्यात्मिक संबंध रहा है। उन्होंने कहा, 'मेरी माँ अक्सर कहती हैं कि मेरा मूल नाम केम्पेगौड़ा रखा गया था, लेकिन शिवगिरि परंपरा के आशीर्वाद से बाद में मेरा नाम शिवकुमार रखा गया।'
उन्होंने बताया कि उनके दादा के समय से ही मठ के वरिष्ठ संत उनके घर आते रहे हैं और महत्वपूर्ण अवसरों पर मार्गदर्शन व आशीर्वाद देते रहे हैं। शिवकुमार ने स्वामीजी की सादगी को याद करते हुए बताया कि एक चुनाव से पहले, जब स्वामीजी अस्वस्थ थे और बिस्तर पर थे, तब भी उन्होंने आशीर्वाद स्वरूप कुछ नकद राशि देते हुए कहा था कि यह चुनावी खर्च में उनका छोटा-सा योगदान है।
देगुला मठ की सामाजिक सेवा विरासत
मुख्यमंत्री ने स्वामीजी को आध्यात्मिक प्रकाशस्तंभ बताते हुए कहा कि सरकारों द्वारा भोजन, शिक्षा और आश्रय की व्यवस्था शुरू करने से बहुत पहले देगुला मठ और सिद्धगंगा मठ जैसी संस्थाएं समाज सेवा कर रही थीं। उन्होंने कहा, 'श्री निर्वाण स्वामीजी ने 86 वर्षों का जीवन लोगों के मार्गदर्शन और सेवा में समर्पित किया। करीब 700 वर्षों से यह मठ जाति और धर्म से ऊपर उठकर सेवा का प्रतीक बना हुआ है।'
शिवकुमार ने यह भी रेखांकित किया कि इस मठ से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों से पढ़े हुए अनेक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, उद्यमी और पेशेवर आज दुनिया के विभिन्न हिस्सों में कार्यरत हैं। पुराना मैसूर क्षेत्र में देगुला मठ का विशेष महत्व है और यह कर्नाटक की प्रमुख धार्मिक संस्थाओं में से एक है।
आगे की राह: विरासत को संजोने का संकल्प
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि श्रद्धालुओं और पूर्व विद्यार्थियों को एक मंच पर लाकर मठ की सामाजिक सेवा गतिविधियों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'बसवन्ना के आदर्श और दिवंगत स्वामीजी की सेवा परंपरा आगे भी जारी रहेगी। कनिष्ठ स्वामी के मार्गदर्शन में हम शिक्षा, अन्नदान और सामाजिक सेवा की इस विरासत को आगे बढ़ाएंगे।'
स्वामीजी के अंतिम संस्कार में कर्नाटक और पड़ोसी राज्य तमिलनाडु से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। राजकीय सम्मान देने के अवसर को सौभाग्य बताते हुए शिवकुमार ने कहा कि सरकार, श्रद्धालु और कनिष्ठ स्वामी मिलकर इस संस्थान की परंपराओं, मूल्यों और विरासत को संरक्षित रखेंगे।