24 सितंबर 2026
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सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 4 हाईकोर्ट में 12 स्थायी जजों की नियुक्ति की सिफारिश की

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सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 4 हाईकोर्ट में 12 स्थायी जजों की नियुक्ति की सिफारिश की

सारांश

सीजेआई सूर्य कांत की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने एक ही बैठक में चार हाईकोर्टों के लिए 12 स्थायी जजों की सिफारिश की — जो न्यायपालिका की रिक्तियाँ भरने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्य बातें

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 23 सितंबर 2026 को हुई बैठक में 4 हाईकोर्टों में 12 अतिरिक्त जजों को स्थायी जज नियुक्त करने की सिफारिश की।
गुवाहाटी के लिए जस्टिस कौशिक गोस्वामी और उत्तराखंड के लिए जस्टिस सुभाष उपाध्याय का नाम प्रस्तावित।
केरल हाईकोर्ट के लिए 5 जजों की सिफारिश — जस्टिस कृष्णा कुमार, जयकुमार, मुरली कृष्णा एस., जोबिन सेबेस्टियन और बालकृष्णन।
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के लिए 5 जजों की सिफारिश — जस्टिस कुंचेम, सेकर, गुणरंजन, शर्मा और डॉ.
नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 217(1) के तहत राष्ट्रपति द्वारा होगी; कॉलेजियम की अध्यक्षता सीजेआई सूर्य कांत कर रहे हैं।

सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 23 सितंबर 2026 को हुई अपनी बैठक में गुवाहाटी, उत्तराखंड, केरल और आंध्र प्रदेश के हाईकोर्ट में कुल 12 अतिरिक्त जजों को स्थायी जज के रूप में नियुक्त करने के प्रस्तावों को मंजूरी दी है। 24 सितंबर 2026 को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह सिफारिश न्यायिक नियुक्ति प्रक्रिया के तहत संवैधानिक प्रावधानों का पालन करते हुए की गई है।

न्यायाधीशवार नियुक्ति का विवरण

गुवाहाटी हाईकोर्ट के लिए कॉलेजियम ने जस्टिस कौशिक गोस्वामी को स्थायी जज नियुक्त करने की सिफारिश की है। उत्तराखंड हाईकोर्ट के लिए जस्टिस सुभाष उपाध्याय का नाम प्रस्तावित किया गया है।

केरल हाईकोर्ट के लिए पाँच अतिरिक्त जजों को स्थायी दर्जा दिए जाने की सिफारिश की गई है — जस्टिस पी. कृष्णा कुमार, जस्टिस के.वी. जयकुमार, जस्टिस मुरली कृष्णा एस., जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन और जस्टिस पी.वी. बालकृष्णन

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के लिए भी पाँच नाम प्रस्तावित हैं — जस्टिस महेश्वर राव कुंचेम, जस्टिस थूटा चंद्र धना सेकर, जस्टिस चल्ला गुणरंजन, जस्टिस अवधानम हरि हरनाध शर्मा और डॉ. जस्टिस यादवल्ली लक्ष्मणा राव

संवैधानिक ढाँचा और प्रक्रिया

हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 217 के खंड (1) के तहत राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जबकि अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति अनुच्छेद 224 के खंड (1) के अंतर्गत होती है। किसी अतिरिक्त जज को स्थायी दर्जा देने की सिफारिश करते समय हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को विस्तृत प्रदर्शन-आंकड़े प्रस्तुत करने होते हैं।

इन आंकड़ों में संबंधित जज द्वारा माह-दर-माह निपटाए गए मामलों, दिए गए फैसलों, लॉ जर्नल्स में प्रकाशित निर्णयों की संख्या, कुल कार्य-दिवस, वास्तविक उपस्थिति और अनुपस्थिति के दिनों का पूरा लेखा-जोखा शामिल होना अनिवार्य है। इन सभी आंकड़ों को हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा प्रमाणित किया जाना चाहिए।

न्यायिक नियुक्तियों का व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के हाईकोर्टों में न्यायाधीशों की रिक्तियाँ न्यायिक विलंब की एक प्रमुख वजह के रूप में चर्चा में हैं। गौरतलब है कि कॉलेजियम प्रणाली — जिसमें सीजेआई और चार वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं — न्यायिक नियुक्तियों की अनुशंसा करती है और इसके बाद सरकार की मंजूरी से राष्ट्रपति औपचारिक नियुक्ति आदेश जारी करते हैं।

इन 12 सिफारिशों के माध्यम से कॉलेजियम ने स्पष्ट किया है कि संबंधित जजों का कार्य-प्रदर्शन स्थायी नियुक्ति के मानकों पर खरा पाया गया है। आलोचकों का कहना है कि नियुक्ति और सिफारिश के बीच की समय-सीमा को और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।

आगे की प्रक्रिया

कॉलेजियम की सिफारिश के बाद केंद्र सरकार इन नामों की समीक्षा करेगी और तत्पश्चात राष्ट्रपति द्वारा औपचारिक नियुक्ति आदेश जारी किए जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इन नियुक्तियों से संबंधित हाईकोर्टों में लंबित मामलों के निपटारे की गति में सुधार आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस बड़े सवाल का जवाब नहीं देती कि देश के उच्च न्यायालयों में सैकड़ों रिक्तियाँ वर्षों से क्यों भरी नहीं जा सकीं। सिफारिश और वास्तविक नियुक्ति के बीच सरकारी विलंब न्यायिक बैकलॉग को और गहरा करता है — और इस पर कॉलेजियम व कार्यपालिका दोनों को जवाब देना होगा। पारदर्शी प्रदर्शन-डेटा की अनिवार्यता सराहनीय है, परंतु जब तक नियुक्तियों की समयसीमा तय नहीं होती, यह प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनी रहेगी।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने किन हाईकोर्टों के लिए स्थायी जजों की सिफारिश की है?
कॉलेजियम ने 23 सितंबर 2026 को गुवाहाटी, उत्तराखंड, केरल और आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के लिए कुल 12 अतिरिक्त जजों को स्थायी दर्जा देने की सिफारिश की है। इनमें केरल और आंध्र प्रदेश के लिए पाँच-पाँच, गुवाहाटी और उत्तराखंड के लिए एक-एक जज शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम क्या होता है और यह कैसे काम करता है?
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में भारत के मुख्य न्यायाधीश और चार वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं, जो हाईकोर्ट और सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्तियों की सिफारिश करते हैं। इनकी सिफारिश के बाद केंद्र सरकार की समीक्षा होती है और राष्ट्रपति औपचारिक नियुक्ति आदेश जारी करते हैं।
हाईकोर्ट में स्थायी जज नियुक्ति के लिए क्या प्रक्रिया है?
संविधान के अनुच्छेद 217(1) के तहत हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं। अतिरिक्त जज को स्थायी दर्जा देने की सिफारिश करते समय हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को माह-दर-माह निपटाए गए मामलों, फैसलों, उपस्थिति और प्रकाशित निर्णयों का सत्यापित डेटा प्रस्तुत करना होता है।
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के लिए किन जजों के नाम प्रस्तावित हैं?
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के लिए जस्टिस महेश्वर राव कुंचेम, जस्टिस थूटा चंद्र धना सेकर, जस्टिस चल्ला गुणरंजन, जस्टिस अवधानम हरि हरनाध शर्मा और डॉ. जस्टिस यादवल्ली लक्ष्मणा राव के नाम प्रस्तावित किए गए हैं।
केरल हाईकोर्ट के लिए कॉलेजियम ने किन जजों की सिफारिश की?
केरल हाईकोर्ट के लिए जस्टिस पी. कृष्णा कुमार, जस्टिस के.वी. जयकुमार, जस्टिस मुरली कृष्णा एस., जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन और जस्टिस पी.वी. बालकृष्णन को स्थायी जज के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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