आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में पाँच नए स्थायी न्यायाधीश नियुक्त, चीफ जस्टिस लिसा गिल ने दिलाई शपथ
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में 5 अक्टूबर 2026 को एक औपचारिक समारोह के दौरान पाँच नए स्थायी न्यायाधीशों ने शपथ ग्रहण की। चीफ जस्टिस लिसा गिल ने अमरावती स्थित हाईकोर्ट परिसर में आयोजित इस समारोह में सभी पाँच न्यायाधीशों को पद की शपथ दिलाई।
शपथ लेने वाले न्यायाधीशों के नाम
जिन पाँच न्यायाधीशों ने शपथ ली, वे हैं — जस्टिस महेश्वर राव कुंचम, जस्टिस थूटा चंद्र धन शेखर (उर्फ टी.सी.डी. शेखर), जस्टिस चल्ला गुणरंजन, जस्टिस अवधानम हरि हरनाध शर्मा और जस्टिस यादवल्ली लक्ष्मण राव। शपथ ग्रहण से पहले इन पाँचों के स्थायी नियुक्ति-आदेश का अधिसूचना-पत्र सार्वजनिक रूप से पढ़कर सुनाया गया।
नियुक्ति की प्रक्रिया और आधिकारिक मंजूरी
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 23 सितंबर 2026 को हुई अपनी बैठक में इन पाँचों अतिरिक्त न्यायाधीशों को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश नियुक्त करने के प्रस्तावों को स्वीकृति दी थी। इसके उपरांत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 30 सितंबर 2026 को आधिकारिक नियुक्ति-आदेश जारी किया। गौरतलब है कि यह पूरी प्रक्रिया कॉलेजियम अनुशंसा से आदेश जारी होने तक केवल सात दिनों में पूरी हो गई।
न्यायाधीशों की पृष्ठभूमि और अनुभव
जस्टिस कुंचम महेश्वर राव ने एसवी यूनिवर्सिटी, तिरुपति से विधि की डिग्री प्राप्त की और 17 फरवरी 1998 को बार काउंसिल ऑफ इंडिया में नामांकन कराया। वर्ष 2000 में उन्होंने अपनी प्रैक्टिस आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट, हैदराबाद में स्थानांतरित की और फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन, HPCL, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस तथा न्यू इंडिया एश्योरेंस जैसे प्रमुख सार्वजनिक उपक्रमों के स्टैंडिंग काउंसल के रूप में कार्य किया।
जस्टिस थूटा चंद्र धन शेखर ने वीआर लॉ कॉलेज, नेल्लोर से विधि की डिग्री ली और 11 मार्च 1999 को बार काउंसिल ऑफ आंध्र प्रदेश में अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया। उन्होंने सितंबर 2019 से न्यायाधीश पद पर पदोन्नति तक आंध्र प्रदेश राज्य के लिए वाणिज्यिक कर विभाग के सरकारी वकील (गवर्नमेंट प्लीडर) के रूप में हाईकोर्ट में प्रतिनिधित्व किया।
जस्टिस चल्ला गुणरंजन ने हैदराबाद में विधि की पढ़ाई पूरी कर 2001 में अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया। 2011 से 2013 तक उन्होंने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के स्टैंडिंग काउंसल के रूप में कार्य किया और विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं एवं केंद्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रमों के लिए हाईकोर्ट व ट्रिब्यूनल में पैरवी की।
जस्टिस अवधानम हरि हरनाध शर्मा ने श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी से संबद्ध वीआर लॉ कॉलेज, नेल्लोर से बीएल की डिग्री प्राप्त की और 2 मार्च 1994 को आंध्र प्रदेश बार काउंसिल में नाम दर्ज कराया। उन्हें सीधी भर्ती के माध्यम से जिला न्यायाधीश चुना गया और 2007 में वे उच्च न्यायिक सेवा में शामिल हुए।
जस्टिस यादवल्ली लक्ष्मण राव ने वीआर लॉ कॉलेज, नेल्लोर से विधि की स्नातक डिग्री और इसके बाद आंध्र यूनिवर्सिटी, विशाखापत्तनम से विधि में डॉक्टरेट की उपाधि अर्जित की। 25 फरवरी 2014 से वे एलुरु, वेस्ट गोदावरी जिले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर कार्यरत थे।
अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में पहले की शपथ
जस्टिस कुंचम महेश्वर राव, जस्टिस थूटा चंद्र धन शेखर और जस्टिस चल्ला गुणरंजन ने 28 अक्टूबर 2024 को हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी। वहीं जस्टिस अवधानम हरि हरनाध शर्मा और जस्टिस यादवल्ली लक्ष्मण राव ने 24 जनवरी 2025 को अतिरिक्त न्यायाधीश के तौर पर कार्यभार संभाला था। अब स्थायी नियुक्ति के साथ इनकी न्यायिक पारी एक नए चरण में प्रवेश कर रही है।
न्यायपालिका पर असर और आगे की राह
इन पाँच न्यायाधीशों की स्थायी नियुक्ति से आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट की स्वीकृत पीठ-शक्ति में वृद्धि होगी, जिससे लंबित मामलों के निपटारे की गति तेज होने की उम्मीद है। यह ऐसे समय में आया है जब देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की रिक्तियों को भरने का दबाव लगातार बना हुआ है। नवनियुक्त न्यायाधीश अपनी विशेषज्ञता के क्षेत्रों में — कर, शैक्षणिक विधि और वाणिज्यिक मामलों में — पीठ को मजबूती देंगे।