दिल्ली हाईकोर्ट में 7 नए जज शामिल, मुख्य न्यायाधीश उपाध्याय ने दिलाई शपथ; जजों की संख्या 50 हुई
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाईकोर्ट में सोमवार, 21 सितंबर 2026 को सात नए न्यायाधीशों का शपथ ग्रहण संपन्न हुआ, जिसके बाद उच्च न्यायालय में कार्यरत जजों की कुल संख्या बढ़कर 50 हो गई। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने हाईकोर्ट परिसर में आयोजित इस शपथ ग्रहण समारोह में सातों न्यायिक अधिकारियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। यह नियुक्ति सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम की सिफारिश के बाद केंद्र सरकार द्वारा 19 सितंबर 2026 को की गई घोषणा के क्रम में हुई।
किन्हें मिली नियुक्ति
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने जस्टिस निवेदिता अनिल शर्मा, जस्टिस निशा सहाय सक्सेना, जस्टिस संजय शर्मा, जस्टिस भरत पाराशर, डॉ. जस्टिस अदिति चौधरी, जस्टिस दिनेश भट्ट और जस्टिस अरुण भारद्वाज को शपथ दिलाई। इनमें से जस्टिस निवेदिता अनिल शर्मा और जस्टिस निशा सहाय सक्सेना को स्थायी जज के रूप में नियुक्त किया गया है।
शेष पाँच — जस्टिस संजय शर्मा, जस्टिस भरत पाराशर, डॉ. अदिति चौधरी, जस्टिस दिनेश भट्ट और जस्टिस अरुण भारद्वाज — को अतिरिक्त जज के तौर पर नियुक्ति मिली है। गौरतलब है कि जस्टिस भरत पाराशर इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय के सेक्रेटरी जनरल के पद पर कार्यरत थे, जबकि जस्टिस अरुण भारद्वाज प्रमोशन से पूर्व दिल्ली हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के रूप में सेवा दे रहे थे।
पृष्ठभूमि और कॉलेजियम प्रक्रिया
सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम ने 10 सितंबर 2026 को हुई अपनी बैठक में दिल्ली हाईकोर्ट में पदोन्नति के लिए आठ न्यायिक अधिकारियों के नामों की सिफारिश की थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने 19 सितंबर को इनमें से सात की नियुक्ति की आधिकारिक घोषणा की। सभी सात न्यायाधीश इससे पहले दिल्ली की जिला न्यायपालिका में न्यायिक अधिकारियों के रूप में कार्यरत थे।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की रिक्तियाँ लंबे समय से न्यायिक विशेषज्ञों और बार एसोसिएशनों की चिंता का विषय रही हैं।
शपथ समारोह में कौन-कौन शामिल हुए
दिल्ली हाईकोर्ट परिसर में आयोजित इस समारोह में हाईकोर्ट के सभी मौजूदा न्यायाधीश, वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी, रजिस्ट्री के सदस्य, अधिवक्तागण और नवनियुक्त जजों के परिजन उपस्थित रहे। समारोह का माहौल औपचारिक लेकिन उत्साहपूर्ण रहा।
न्यायालय की स्वीकृत क्षमता और रिक्तियाँ
दिल्ली हाईकोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या 60 है। इन सात नई नियुक्तियों के बाद कार्यरत जजों की तादाद 50 पहुँच गई है, जिसका अर्थ है कि अभी भी 10 पद रिक्त हैं। न्यायिक बैकलॉग को देखते हुए इन शेष पदों को भरना प्राथमिकता माना जाता है।
आने वाले समय में उम्मीद की जा रही है कि सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम शेष रिक्तियों के लिए भी सिफारिशें करेगा, जिससे न्यायालय अपनी पूर्ण क्षमता पर काम कर सके।