सुप्रीम कोर्ट में तीन नए जज: जस्टिस सुनीता अग्रवाल, उपाध्याय और अपरेश सिंह को केंद्र की मंजूरी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 5 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर गुजरात हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सुनीता अग्रवाल, दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और तेलंगाना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अपरेश कुमार सिंह को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। इन नियुक्तियों के साथ सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या में और वृद्धि होगी।
नियुक्ति की प्रक्रिया और कॉलेजियम की भूमिका
केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर जानकारी दी कि राष्ट्रपति ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत से विचार विमर्श के बाद तीनों मुख्य न्यायाधीशों को सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया है। यह नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की उस सिफारिश के कुछ दिनों बाद आई, जो 28 सितंबर 2026 की बैठक में की गई थी।
कॉलेजियम ने अपनी वेबसाइट पर जारी बयान में कहा था, "28 सितंबर 2026 को हुई बैठक में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने की सिफारिश की है।" गौरतलब है कि केंद्र ने इस बार सिफारिश मिलने के तुरंत बाद मंजूरी दे दी, जो न्यायिक नियुक्तियों में अपेक्षाकृत तेज़ गति को दर्शाता है।
तीनों न्यायाधीशों का परिचय
जस्टिस सुनीता अग्रवाल का जन्म 30 अप्रैल 1966 को हुआ था। उनका मूल हाईकोर्ट इलाहाबाद है। उन्हें 21 नवंबर 2011 को इलाहाबाद हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था और वे 23 जुलाई 2023 को गुजरात हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश बनीं।
जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय का जन्म 16 जून 1965 को हुआ था। उनका मूल हाईकोर्ट भी इलाहाबाद है। उन्हें 21 नवंबर 2011 को इलाहाबाद हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया और 6 अगस्त 2013 को वे स्थायी न्यायाधीश बने। वे 28 मार्च 2023 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के वरिष्ठ न्यायाधीश बने, इसके बाद उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया जहाँ उन्होंने 29 जुलाई 2023 को शपथ ली। बाद में उनका तबादला दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में हुआ और उन्होंने 21 जनवरी 2025 को पद की शपथ ली।
जस्टिस अपरेश कुमार सिंह का जन्म 7 जुलाई 1965 को हुआ था। उनका मूल हाईकोर्ट झारखंड है। उन्हें 24 जनवरी 2012 को झारखंड हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और 16 जनवरी 2014 को वे स्थायी न्यायाधीश बने। वे 20 दिसंबर 2022 से 19 फरवरी 2023 तक झारखंड हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहे। इसके बाद उन्होंने 17 अप्रैल 2023 को त्रिपुरा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली और बाद में उनका तबादला तेलंगाना हाईकोर्ट में हुआ, जहाँ उन्होंने 19 जुलाई 2025 को शपथ ली।
सुप्रीम कोर्ट की संरचना पर असर
इन तीन नियुक्तियों से सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की कुल संख्या में वृद्धि होगी। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार ने इस वर्ष की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या बढ़ाकर मुख्य न्यायाधीश के अतिरिक्त 37 कर दी थी। देश में लाखों लंबित मामलों को देखते हुए यह विस्तार न्यायिक क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
क्या होगा आगे
तीनों न्यायाधीशों के शपथ ग्रहण की तिथि अभी घोषित नहीं हुई है। नियुक्ति पत्र जारी होने के बाद शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन होगा। इन नियुक्तियों के साथ सर्वोच्च न्यायालय की पीठों की क्षमता बढ़ेगी, जिससे लंबित मामलों के निपटारे में तेज़ी आने की उम्मीद है।