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मद्रास हाईकोर्ट में दो अतिरिक्त जजों की नियुक्ति, केंद्र ने दी मंजूरी

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मद्रास हाईकोर्ट में दो अतिरिक्त जजों की नियुक्ति, केंद्र ने दी मंजूरी

सारांश

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने धर्मलिंगम लिंगेश्वरन और बालाथंडायुथम कार्तिकेयन को मद्रास हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया। यह प्रस्ताव मूलतः 4 नवंबर 2025 को आया था और 18 मई 2026 को कॉलेजियम ने इसे मंजूरी दी थी।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने 13 अक्टूबर 2026 को मद्रास हाईकोर्ट में दो अतिरिक्त जजों की नियुक्ति को मंजूरी दी।
नियुक्त न्यायाधीश: धर्मलिंगम लिंगेश्वरन और बालाथंडायुथम कार्तिकेयन ।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 18 मई को हुई बैठक में इन नामों को स्वीकृति दी थी।
यह सिफारिश मूल रूप से 4 नवंबर 2025 को छह न्यायिक अधिकारियों के प्रस्ताव के तहत की गई थी।
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने एक्स पर पोस्ट कर नियुक्ति की जानकारी दी।

केंद्र सरकार ने 13 अक्टूबर 2026 को मद्रास हाईकोर्ट में धर्मलिंगम लिंगेश्वरन और बालाथंडायुथम कार्तिकेयन को अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त करने की मंजूरी दे दी। यह कदम सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद उठाया गया, जिसने 18 मई को हुई बैठक में इन दोनों न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति को औपचारिक स्वीकृति दी थी।

नियुक्ति का विवरण

कानून और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट के ज़रिए इस निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत के संविधान से प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए और भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद राष्ट्रपति ने दोनों न्यायिक अधिकारियों को मद्रास हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया है।

कॉलेजियम की सिफारिश की पृष्ठभूमि

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 19 मई को जारी एक बयान में स्पष्ट किया था कि उसने लिंगेश्वरन और बालाथंडायुथम सहित छह न्यायिक अधिकारियों को मद्रास हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त करने के 4 नवंबर 2025 के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। गौरतलब है कि कॉलेजियम में भारत के मुख्य न्यायाधीश और सर्वोच्च न्यायालय के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश शामिल होते हैं।

नियुक्ति प्रक्रिया: एक संवैधानिक ढाँचा

उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच एक निरंतर एवं सहयोगात्मक प्रक्रिया है। इसके लिए राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर विभिन्न संवैधानिक अधिकारियों से परामर्श और अनुमोदन अनिवार्य होता है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के उच्च न्यायालयों में रिक्त पदों की संख्या न्यायिक प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

आगे क्या

संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार, केवल उन्हीं व्यक्तियों को हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया जाता है जिनके नामों की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने की हो। इन दोनों नई नियुक्तियों से मद्रास हाईकोर्ट में लंबित मामलों के निपटारे में कुछ हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ सैकड़ों पद वर्षों से खाली पड़े हैं और मुकदमों का बोझ लगातार बढ़ रहा है। कॉलेजियम की 4 नवंबर 2025 की सिफारिश को मंजूरी मिलने में करीब एक साल का समय लगा — यह देरी उस दीर्घ संवैधानिक प्रक्रिया को उजागर करती है जो अक्सर नियुक्तियों को लंबित रखती है। आलोचकों का मानना है कि कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच समन्वय की इस धीमी गति से न्याय तक पहुँच प्रभावित होती है। दो नई नियुक्तियाँ स्वागत योग्य हैं, लेकिन मद्रास हाईकोर्ट समेत देशभर के उच्च न्यायालयों में लंबित लाखों मामलों को देखते हुए यह कदम पर्याप्त नहीं है।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मद्रास हाईकोर्ट में नए अतिरिक्त जज कौन नियुक्त हुए हैं?
केंद्र सरकार ने धर्मलिंगम लिंगेश्वरन और बालाथंडायुथम कार्तिकेयन को मद्रास हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया है। यह नियुक्ति 13 अक्टूबर 2026 को मंजूर की गई।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने यह सिफारिश कब की थी?
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 18 मई 2026 को हुई बैठक में इन दोनों नामों को मंजूरी दी थी। मूल प्रस्ताव 4 नवंबर 2025 का था, जिसमें छह न्यायिक अधिकारियों को मद्रास हाईकोर्ट का जज नियुक्त करने की सिफारिश की गई थी।
हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया क्या है?
उच्च न्यायालयों में जजों की नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश अनिवार्य होती है। इसके बाद राज्य और केंद्र स्तर पर संवैधानिक अधिकारियों से परामर्श और अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी की जाती है, तत्पश्चात राष्ट्रपति नियुक्ति आदेश जारी करते हैं।
इस नियुक्ति की घोषणा किसने और कहाँ की?
कानून और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने एक्स पर पोस्ट के ज़रिए इस नियुक्ति की जानकारी सार्वजनिक की। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ने मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद यह निर्णय लिया।
मद्रास हाईकोर्ट में नई नियुक्तियों का क्या महत्व है?
मद्रास हाईकोर्ट में वर्षों से लंबित मामलों की संख्या अधिक बनी हुई है। दो नए अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति से न्यायिक क्षमता में वृद्धि होगी और लंबित मामलों के निपटारे में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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