3 जुलाई 2026
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आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में तीन अतिरिक्त जजों की नियुक्ति, राष्ट्रपति ने दी मंजूरी

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आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में तीन अतिरिक्त जजों की नियुक्ति, राष्ट्रपति ने दी मंजूरी

सारांश

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की 4 मई की सिफारिश पर 3 जुलाई को मुहर लगाते हुए सुनीता गंधम, अलापति गिरिधर और पुरुषोत्तम कुमार चिंतालापुडी को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का अतिरिक्त जज नियुक्त किया। राष्ट्रपति ने संवैधानिक प्रक्रिया के तहत नियुक्ति वारंट जारी किया।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति ने 3 जुलाई 2026 को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में तीन अतिरिक्त जजों की नियुक्ति को मंजूरी दी।
नियुक्त न्यायिक अधिकारी हैं — सुनीता गंधम , अलापति गिरिधर और पुरुषोत्तम कुमार चिंतालापुडी ।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 4 मई 2026 की बैठक में इन नामों को अनुमोदित किया था।
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने एक्स पर पोस्ट के ज़रिये नियुक्ति की आधिकारिक घोषणा की।
नियुक्ति की अधिसूचना भारत के राजपत्र (गजट) में प्रकाशित की जाएगी।

केंद्र सरकार ने 3 जुलाई 2026 को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में तीन न्यायिक अधिकारियों को अतिरिक्त जज के रूप में नियुक्त करने की मंजूरी दे दी। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद आया, जिसे 4 मई 2026 की बैठक में अनुमोदित किया गया था। राष्ट्रपति ने भारत के संविधान से प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए और भारत के मुख्य न्यायाधीश से विचार-विमर्श के बाद यह नियुक्ति वारंट जारी किया।

नियुक्त किए गए न्यायिक अधिकारी

राष्ट्रपति द्वारा आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के अतिरिक्त जज के रूप में नियुक्त तीन न्यायिक अधिकारियों के नाम हैं — सुनीता गंधम, अलापति गिरिधर और पुरुषोत्तम कुमार चिंतालापुडी (जिन्हें सीएच. पुरुषोत्तम कुमार के नाम से भी जाना जाता है)। कानून और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने एक्स पर पोस्ट के माध्यम से इस निर्णय की आधिकारिक घोषणा की।

कॉलेजियम की सिफारिश और प्रक्रिया

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 4 मई 2026 को हुई अपनी बैठक में इन तीनों न्यायिक अधिकारियों के नामों को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में नियुक्ति के लिए अनुमोदित किया था। कॉलेजियम के बयान में तीनों नामों की पुष्टि की गई थी। गौरतलब है कि हाईकोर्ट जजों की नियुक्ति में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की भूमिका संवैधानिक दृष्टि से निर्णायक मानी जाती है।

नियुक्ति की संवैधानिक प्रक्रिया

हाईकोर्ट जजों की नियुक्ति से संबंधित प्रक्रिया ज्ञापन (MOP) के अनुसार, नियुक्ति प्रस्ताव संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा आरंभ किया जाता है। यदि मुख्यमंत्री किसी नाम की अनुशंसा करना चाहते हैं, तो वह प्रस्ताव विचार के लिए मुख्य न्यायाधीश को भेजा जाता है।

इसके बाद राज्यपाल, मुख्यमंत्री के परामर्श के आधार पर, प्रस्ताव प्राप्त होने के छह सप्ताह के भीतर अपनी सिफारिश और संबंधित दस्तावेज केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री को भेजते हैं। केंद्र सरकार विस्तृत समीक्षा के बाद प्रस्ताव भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को अग्रेषित करती है, जो सुप्रीम कोर्ट के दो वरिष्ठतम न्यायाधीशों से विचार-विमर्श के बाद चार सप्ताह के भीतर अंतिम संस्तुति भेजते हैं।

अधिसूचना और अगले कदम

राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति वारंट पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद न्याय विभाग के सचिव मुख्य न्यायाधीश को सूचित करते हैं और इसकी एक प्रति मुख्यमंत्री को भी भेजी जाती है। इस नियुक्ति की आधिकारिक अधिसूचना भारत के राजपत्र (गजट) में प्रकाशित की जाएगी। इन तीन नियुक्तियों से आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट की न्यायिक क्षमता में वृद्धि होगी और लंबित मामलों के निपटारे में सहायता मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो देशभर के हाईकोर्टों में लंबित मामलों के बोझ की प्रमुख वजह रही है। कॉलेजियम की सिफारिश और केंद्र की मंजूरी के बीच लगभग दो महीने का अंतर यह भी दर्शाता है कि कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच नियुक्ति प्रक्रिया में समन्वय अभी भी समय लेती है। असली कसौटी यह होगी कि ये नियुक्तियाँ आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में वर्षों से लंबित मामलों के निपटारे की गति पर कितना ठोस असर डालती हैं।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में किन तीन जजों की नियुक्ति हुई है?
राष्ट्रपति ने सुनीता गंधम, अलापति गिरिधर और पुरुषोत्तम कुमार चिंतालापुडी को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का अतिरिक्त जज नियुक्त किया है। यह नियुक्ति 3 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद प्रभावी हुई।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इन नामों की सिफारिश कब की थी?
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 4 मई 2026 को हुई अपनी बैठक में इन तीनों न्यायिक अधिकारियों के नामों को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में नियुक्ति के लिए अनुमोदित किया था। केंद्र सरकार ने लगभग दो महीने बाद 3 जुलाई को इस पर मंजूरी दी।
हाईकोर्ट में जज की नियुक्ति की प्रक्रिया क्या होती है?
नियुक्ति प्रस्ताव संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा शुरू किया जाता है। राज्यपाल मुख्यमंत्री के परामर्श से छह सप्ताह में केंद्रीय कानून मंत्री को सिफारिश भेजते हैं, जिसके बाद CJI और कॉलेजियम की अंतिम संस्तुति पर राष्ट्रपति नियुक्ति वारंट जारी करते हैं।
इस नियुक्ति की घोषणा किसने और कहाँ की?
कानून और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने एक्स पर पोस्ट के माध्यम से इस नियुक्ति की आधिकारिक घोषणा की। उन्होंने तीनों न्यायिक अधिकारियों के नाम सार्वजनिक किए।
नियुक्ति की आधिकारिक अधिसूचना कहाँ प्रकाशित होगी?
राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति वारंट पर हस्ताक्षर के बाद इस नियुक्ति की आधिकारिक अधिसूचना भारत के राजपत्र (गजट) में प्रकाशित की जाएगी। न्याय विभाग के सचिव मुख्य न्यायाधीश और मुख्यमंत्री को भी इसकी सूचना देते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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