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सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश को चुनौती: हिमाचल जज अरविंद मल्होत्रा ने दायर की रिट याचिका

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सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश को चुनौती: हिमाचल जज अरविंद मल्होत्रा ने दायर की रिट याचिका

सारांश

धर्मशाला फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज अरविंद मल्होत्रा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कॉलेजियम की उस सिफारिश को चुनौती दी है जिसमें उनसे कनिष्ठ तीन अधिकारियों को हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में जज नियुक्त करने की अनुशंसा की गई। मुख्य न्यायाधीश ने शीघ्र सुनवाई का आश्वासन दिया।

मुख्य बातें

धर्मशाला फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज अरविंद मल्होत्रा ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश को रिट याचिका के जरिए चुनौती दी।
3 जून 2025 को कॉलेजियम ने चिराग भानु सिंह , भूपेश शर्मा और योगेश जसवाल के नाम हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के लिए अनुशंसित किए थे।
मल्होत्रा का आरोप है कि उनकी वरिष्ठता की अनदेखी कर कनिष्ठ अधिकारियों के नाम भेजे गए।
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने शीघ्र सुनवाई का आश्वासन दिया।
यदि कॉलेजियम पुनः वही नाम भेजे, तो केंद्र सरकार नियुक्ति करने के लिए संवैधानिक रूप से बाध्य होगी।

सर्वोच्च न्यायालय में एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए धर्मशाला फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज अरविंद मल्होत्रा ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की उस सिफारिश को चुनौती दी है, जिसमें हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में जज नियुक्त करने के लिए तीन न्यायिक अधिकारियों के नाम केंद्र सरकार को भेजे गए हैं। मल्होत्रा का आरोप है कि उनकी वरिष्ठता की अनदेखी करते हुए कनिष्ठ अधिकारियों को प्राथमिकता दी गई।

याचिका की पृष्ठभूमि

3 जून 2025 को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चिराग भानु सिंह, भूपेश शर्मा और योगेश जसवाल के नाम हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में जज के तौर पर नियुक्त करने के लिए केंद्र सरकार को अनुशंसित किए थे। इन तीनों की नियुक्ति की सिफारिश को लेकर मल्होत्रा ने आपत्ति जताई है कि ये अधिकारी सेवा में उनसे कनिष्ठ हैं, जबकि उनके अपने नाम पर कॉलेजियम ने कोई विचार नहीं किया।

सुनवाई का अनुरोध

बुधवार, 17 जून को याचिकाकर्ता के वकील ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इस मामले में शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया। मुख्य न्यायाधीश ने जल्द सुनवाई का आश्वासन दिया है।

कॉलेजियम प्रणाली क्या है

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम वरिष्ठ न्यायाधीशों का एक पैनल है, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश और सर्वोच्च न्यायालय के चार अन्य वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं। यह पैनल उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति, पदोन्नति एवं स्थानांतरण के लिए नामों की अनुशंसा करता है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार इन नामों की जाँच करती है और आपत्ति होने पर नाम वापस कॉलेजियम को भेज सकती है। किंतु यदि कॉलेजियम उन्हीं नामों को पुनः अनुशंसित करे, तो सरकार उस नियुक्ति को मानने के लिए संवैधानिक रूप से बाध्य होती है।

मामले का महत्व

यह याचिका ऐसे समय में आई है जब न्यायपालिका में नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता और वरिष्ठता के सिद्धांत को लेकर बहस चलती रही है। न्यायिक अधिकारियों द्वारा कॉलेजियम की सिफारिशों को सीधे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देना असामान्य है और इस मामले का परिणाम भविष्य की नियुक्ति प्रक्रियाओं पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।

आगे क्या होगा

मुख्य न्यायाधीश की पीठ द्वारा शीघ्र सुनवाई का आश्वासन मिलने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम की अपनी ही सिफारिश को किस प्रकार परखता है। यह मामला न्यायिक नियुक्तियों में वरिष्ठता बनाम योग्यता की बहस को एक नई दिशा दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

किंतु इस बार एक पीड़ित अधिकारी ने स्वयं उस व्यवस्था के दरवाज़े पर दस्तक दी है जो उसे नज़रअंदाज़ करने का आरोपी है। यह मामला इस मूल प्रश्न को उजागर करता है कि क्या कॉलेजियम के भीतर नियुक्ति-विचार की प्रक्रिया पर्याप्त रूप से दस्तावेज़ीकृत और न्यायिक समीक्षा के योग्य है। सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय — चाहे वह याचिका सुने या खारिज करे — भविष्य की न्यायिक नियुक्तियों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अरविंद मल्होत्रा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका क्यों दायर की?
धर्मशाला फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज अरविंद मल्होत्रा ने आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में जज नियुक्ति के लिए उनसे कनिष्ठ तीन अधिकारियों के नाम अनुशंसित किए, जबकि उनके नाम पर विचार नहीं किया गया। उन्होंने इस वरिष्ठता-उल्लंघन को रिट याचिका के जरिए चुनौती दी है।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने किन तीन नामों की सिफारिश की थी?
3 जून 2025 को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चिराग भानु सिंह, भूपेश शर्मा और योगेश जसवाल के नाम हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में जज नियुक्त करने के लिए केंद्र सरकार को भेजे थे। इन्हीं नामों को अरविंद मल्होत्रा ने याचिका में चुनौती दी है।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम प्रणाली कैसे काम करती है?
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में भारत के मुख्य न्यायाधीश और सर्वोच्च न्यायालय के चार अन्य वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं। यह पैनल उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्ति, पदोन्नति एवं तबादलों की अनुशंसा करता है; यदि कॉलेजियम किसी नाम को दोबारा भेजे, तो सरकार उसे मानने के लिए बाध्य होती है।
इस मामले में अब आगे क्या होगा?
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने शीघ्र सुनवाई का आश्वासन दिया है। सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय — कि वह याचिका पर सुनवाई करे या खारिज करे — न्यायिक नियुक्तियों में वरिष्ठता के सिद्धांत पर एक महत्वपूर्ण मिसाल स्थापित कर सकता है।
क्या न्यायिक अधिकारी कॉलेजियम की सिफारिश को अदालत में चुनौती दे सकते हैं?
यह प्रक्रियागत रूप से असामान्य कदम है, क्योंकि कॉलेजियम की सिफारिशें सामान्यतः न्यायिक समीक्षा से परे मानी जाती हैं। अरविंद मल्होत्रा की याचिका इसी सीमा को परखने का प्रयास है और इसका परिणाम भविष्य की नियुक्ति प्रक्रियाओं पर असर डाल सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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