सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश को चुनौती: हिमाचल जज अरविंद मल्होत्रा ने दायर की रिट याचिका
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय में एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए धर्मशाला फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज अरविंद मल्होत्रा ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की उस सिफारिश को चुनौती दी है, जिसमें हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में जज नियुक्त करने के लिए तीन न्यायिक अधिकारियों के नाम केंद्र सरकार को भेजे गए हैं। मल्होत्रा का आरोप है कि उनकी वरिष्ठता की अनदेखी करते हुए कनिष्ठ अधिकारियों को प्राथमिकता दी गई।
याचिका की पृष्ठभूमि
3 जून 2025 को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने चिराग भानु सिंह, भूपेश शर्मा और योगेश जसवाल के नाम हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में जज के तौर पर नियुक्त करने के लिए केंद्र सरकार को अनुशंसित किए थे। इन तीनों की नियुक्ति की सिफारिश को लेकर मल्होत्रा ने आपत्ति जताई है कि ये अधिकारी सेवा में उनसे कनिष्ठ हैं, जबकि उनके अपने नाम पर कॉलेजियम ने कोई विचार नहीं किया।
सुनवाई का अनुरोध
बुधवार, 17 जून को याचिकाकर्ता के वकील ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इस मामले में शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया। मुख्य न्यायाधीश ने जल्द सुनवाई का आश्वासन दिया है।
कॉलेजियम प्रणाली क्या है
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम वरिष्ठ न्यायाधीशों का एक पैनल है, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश और सर्वोच्च न्यायालय के चार अन्य वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं। यह पैनल उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति, पदोन्नति एवं स्थानांतरण के लिए नामों की अनुशंसा करता है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार इन नामों की जाँच करती है और आपत्ति होने पर नाम वापस कॉलेजियम को भेज सकती है। किंतु यदि कॉलेजियम उन्हीं नामों को पुनः अनुशंसित करे, तो सरकार उस नियुक्ति को मानने के लिए संवैधानिक रूप से बाध्य होती है।
मामले का महत्व
यह याचिका ऐसे समय में आई है जब न्यायपालिका में नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता और वरिष्ठता के सिद्धांत को लेकर बहस चलती रही है। न्यायिक अधिकारियों द्वारा कॉलेजियम की सिफारिशों को सीधे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देना असामान्य है और इस मामले का परिणाम भविष्य की नियुक्ति प्रक्रियाओं पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।
आगे क्या होगा
मुख्य न्यायाधीश की पीठ द्वारा शीघ्र सुनवाई का आश्वासन मिलने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम की अपनी ही सिफारिश को किस प्रकार परखता है। यह मामला न्यायिक नियुक्तियों में वरिष्ठता बनाम योग्यता की बहस को एक नई दिशा दे सकता है।