चेन्नम्मा देवेगौड़ा का अंतिम संस्कार आज हासन में, सीएम शिवकुमार व केंद्रीय मंत्री होंगे शामिल
सारांश
मुख्य बातें
पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा की पत्नी चेन्नम्मा देवेगौड़ा को सोमवार, 20 जुलाई को कर्नाटक के हासन जिले में हरदानहल्ली के निकट बेट्टाडा रंगनाथस्वामी मंदिर की तलहटी में पूरे पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी। 18 जुलाई को बेंगलुरु के एक निजी अस्पताल में कार्डियक अरेस्ट के कारण उनका निधन हो गया था।
अंतिम संस्कार में कौन-कौन होंगे शामिल
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रह्लाद जोशी सहित राज्य भर के अनेक वरिष्ठ नेता इस अंतिम यात्रा में सम्मिलित होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश के कई प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
अंतिम यात्रा का मार्ग और व्यवस्था
चेन्नम्मा देवेगौड़ा का पार्थिव शरीर होलेनरासीपुरा शहर में एच. डी. रेवन्ना के आवास पर लाया गया है, जहाँ उन्हें श्रद्धांजलि देने हजारों लोग एकत्रित हुए हैं। अंतिम संस्कार का जुलूस होलेनरासीपुरा से लक्ष्मीनरसिम्हा मंदिर क्षेत्र तक जाएगा — वही स्थान जहाँ देवेगौड़ा कभी ₹10 मासिक किराए के मकान में रहते थे। जुलूस के वापस लौटने के बाद पार्थिव शरीर पर मंदिर का पवित्र जल छिड़का जाएगा।
वोक्कालिगा समुदाय की परंपराओं के अनुसार अंतिम संस्कार की रस्में दोपहर 2 बजे आरंभ होंगी और शाम 4 बजे तक पूर्ण होंगी। रेवन्ना ने बताया कि लगभग 50,000 लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई है।
परिवार की भावुक विदाई
पूर्व मंत्री और जनता दल (सेक्युलर) विधायक एच. डी. रेवन्ना ने पत्रकारों से बात करते हुए भावुक होकर कहा, 'वह पक्का करती थीं कि हमारे घर आने वाले हर व्यक्ति को खाना मिले। वह घर आने वाली महिलाओं को साड़ियाँ भी तोहफे में देती थीं। हमने एक देवी को खो दिया है।' उन्होंने यह भी बताया कि चेन्नम्मा ने कभी किसी के बारे में बुरा नहीं कहा और अपने जीवन के अंतिम वर्ष अपनी बहन के घर पर बिताए।
रेवन्ना ने परिवार की एक दुखद स्मृति साझा करते हुए बताया कि मूल रूप से उन पर और उनकी पत्नी भवानी पर एसिड अटैक की योजना थी, किंतु उसकी चपेट में चेन्नम्मा आ गईं और वे 26 वर्षों तक उसके दुष्प्रभाव झेलती रहीं।
निधन की परिस्थितियाँ
चेन्नम्मा देवेगौड़ा को 16 जुलाई की रात सांस लेने में कठिनाई, सीने में जकड़न और उम्र से जुड़ी अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के चलते बेंगलुरु के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 18 जुलाई को कार्डियक अरेस्ट के कारण उनका निधन हो गया। यह ऐसे समय में आया है जब देवेगौड़ा परिवार पहले से ही सार्वजनिक जीवन के कई उतार-चढ़ावों से गुज़र रहा है।
आगे क्या
अंतिम संस्कार के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में शोक सभाओं का दौर जारी रहने की संभावना है। चेन्नम्मा देवेगौड़ा का जाना न केवल देवेगौड़ा परिवार के लिए, बल्कि वोक्कालिगा समुदाय और कर्नाटक की राजनीति के लिए एक युग के अंत जैसा है।