कांग्रेस नेता एच. हनुमंथप्पा का निधन, चित्रदुर्ग में हुआ अंतिम संस्कार; CM शिवकुमार भी हुए शामिल
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व राज्यसभा सदस्य एच. हनुमंथप्पा का 13 जुलाई 2025 को रविवार शाम दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार चित्रदुर्ग के जोगिमट्टी रोड स्थित मुक्तिधाम में किया गया। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर अंतिम संस्कार में सम्मिलित हुए।
कौन थे एच. हनुमंथप्पा
एच. हनुमंथप्पा ने 1982 से 2000 तक लगातार तीन बार कर्नाटक का प्रतिनिधित्व राज्यसभा में किया। वे केंद्रीय रेशम बोर्ड और केंद्रीय रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष और कर्नाटक राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष जैसे प्रतिष्ठित पदों पर भी रहे। इसके अलावा वे एस. निजलिंगप्पा मेमोरियल ट्रस्ट के चेयरमैन भी थे। अनुसूचित समुदायों के अधिकारों के लिए उनकी आवाज़ को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला था।
नेताओं की श्रद्धांजलि
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा के पूर्व सदस्य एच. हनुमंतप्पा के निधन से मुझे गहरा दुख हुआ है। लोगों के हितों के लिए लड़ने वाले इस समर्पित नेता के जाने से न केवल राजनीतिक जगत, बल्कि पूरा समाज एक महत्वपूर्ण व्यक्ति से वंचित हो गया है।'
कर्नाटक सरकार में मंत्री एम.बी. पाटिल ने एक्स पर लिखा, 'सादगी, सज्जनता, जनसेवा और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनके योगदान को सदैव याद किया जाएगा। उनके जाने से राज्य ने एक अनुभवी जननेता खो दिया है।' पाटिल ने यह भी उल्लेख किया कि 1982 से 2000 तक संसद में उनके व्यावहारिक भाषणों और जन-समर्थक रुख ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई।
कर्नाटक के ऊर्जा मंत्री के.जे. जॉर्ज ने भी एक्स पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा, 'अपने आदर्शों पर चलने वाले एक समर्पित कांग्रेसी नेता के तौर पर उन्होंने दशकों तक सार्वजनिक जीवन में योगदान दिया। जनसेवा के प्रति उनके पक्के इरादे और समर्पण को हमेशा याद किया जाएगा।'
राजनीतिक और सामाजिक विरासत
गौरतलब है कि हनुमंथप्पा अनुसूचित समुदायों के एक प्रमुख प्रतिनिधि के रूप में जाने जाते थे। उनका लगातार तीन कार्यकाल तक राज्यसभा में बने रहना उनकी राजनीतिक स्वीकार्यता और जनाधार का प्रमाण है। दशकों तक विभिन्न संवैधानिक और सरकारी पदों पर रहते हुए उन्होंने कर्नाटक के हाशिये पर खड़े समुदायों की आवाज़ को राष्ट्रीय मंच पर पहुँचाया।
आगे क्या
उनके निधन के साथ कर्नाटक की कांग्रेस राजनीति ने एक अनुभवी और समर्पित नेता खो दिया है। राज्य के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में हुए अंतिम संस्कार ने उनके योगदान के प्रति सत्तारूढ़ दल की कृतज्ञता को प्रतिबिंबित किया। उनकी विरासत को आगे ले जाने की ज़िम्मेदारी अब उनके अनुयायियों और परिवार पर है।