13 जुलाई 2026
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तिरुमाला पहली आरती में कर्नाटक के विधायक-मंत्री भी होंगे शामिल, सीएम शिवकुमार का बड़ा फैसला

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तिरुमाला पहली आरती में कर्नाटक के विधायक-मंत्री भी होंगे शामिल, सीएम शिवकुमार का बड़ा फैसला

सारांश

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने तिरुमाला की पहली आरती का विशेषाधिकार — जो अब तक केवल मुख्यमंत्री के पास था — विधायकों, मंत्रियों, न्यायाधीशों और वरिष्ठ अधिकारियों तक बढ़ाने का ऐलान किया। साथ ही बेंगलुरु में षणमुख सुब्रह्मण्य मंदिर की आधारशिला भी रखी।

मुख्य बातें

शिवकुमार ने 13 जुलाई 2026 को घोषणा की कि कर्नाटक के मंत्री, विधायक, वरिष्ठ अधिकारी और न्यायाधीश अब तिरुमाला की पहली आरती में शामिल हो सकेंगे।
अब तक यह विशेषाधिकार केवल कर्नाटक के मुख्यमंत्री तक सीमित था; प्रतिदिन एक विशेष सरकारी अधिकारी आरती में उपस्थित रहता था।
नए प्रोटोकॉल आदेश के लिए अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं।
कृष्णा द्वारा स्थापित कर्नाटक ट्रस्ट और सात एकड़ भूखंड पर भव्य ढाँचे की योजना का भी उल्लेख किया गया।
बनाशंकरी, बेंगलुरु में श्री षणमुख सुब्रह्मण्य मंदिर की आधारशिला रखी गई।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 13 जुलाई 2026 को घोषणा की कि राज्य सरकार एक नया प्रोटोकॉल आदेश जारी करेगी, जिससे कर्नाटक के जनप्रतिनिधियों, मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों को तिरुमाला तिरुपति मंदिर की प्रतिदिन होने वाली पहली आरती में शामिल होने का अवसर मिलेगा। यह घोषणा उन्होंने बेंगलुरु के बनाशंकरी क्षेत्र में श्री षणमुख सुब्रह्मण्य मंदिर की आधारशिला रखने के बाद की।

मुख्य घोषणा: क्या बदलेगा

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि अब तक तिरुपति की पहली आरती में शामिल होने का विशेषाधिकार केवल कर्नाटक के मुख्यमंत्री के पास था। प्रतिदिन राज्य सरकार का एक विशेष अधिकारी इस आरती में उपस्थित रहता था। नए प्रोटोकॉल आदेश के बाद यह सुविधा मंत्रियों, विधायकों, वरिष्ठ अधिकारियों, न्यायाधीशों और सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले किसी भी गणमान्य व्यक्ति तक विस्तारित होगी।

उन्होंने कहा, 'तिरुपति में रोज होने वाली पहली आरती कर्नाटक से जुड़ी है। प्रोटोकॉल के अनुसार, राज्य सरकार एक आदेश जारी करेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कर्नाटक के जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों को पहली आरती में शामिल होने की अनुमति मिले।'

जनप्रतिनिधियों को क्यों दी जा रही यह सुविधा

मुख्यमंत्री ने बताया कि कई विधायक और जनप्रतिनिधि तिरुपति जाने के बावजूद बिना दर्शन किए लौट आए। उनके अनुसार, जो लोग राज्य की सेवा करते हैं, उन्हें ईश्वर से प्रार्थना करने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने इस घोषणा को अपने कार्यकाल की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

गौरतलब है कि तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) द्वारा संचालित यह मंदिर देश के सबसे बड़े धार्मिक केंद्रों में से एक है और कर्नाटक सरकार की इसमें ऐतिहासिक भागीदारी रही है।

कर्नाटक ट्रस्ट और ऐतिहासिक संदर्भ

शिवकुमार ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री एस.एम. कृष्णा ने तिरुपति में एक कर्नाटक ट्रस्ट की स्थापना की थी और उन्हें उसका अध्यक्ष नियुक्त किया था। एक भव्य ढाँचे के निर्माण की योजना थी, लेकिन सरकार का कार्यकाल समाप्त होने से पहले यह कार्य पूरा नहीं हो सका। उन्होंने बताया कि तिरुपति में महाराजाओं के जमाने से प्राप्त सात एकड़ का एक भूखंड उपलब्ध है।

षणमुख सुब्रह्मण्य मंदिर की आधारशिला

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बनाशंकरी में श्री षणमुख सुब्रह्मण्य मंदिर की आधारशिला रखी। उन्होंने कहा कि द्वारकानाथ लंबे समय से इस मंदिर के निर्माण की बात करते रहे थे और अब वह उचित अवसर आ गया है। शिवकुमार ने द्वारकानाथ को अपने लिए एक सम्मानित गुरु के समान बताया, जो पिछले पच्चीस वर्षों से उनका मार्गदर्शन कर रहे हैं।

धर्म और सेवा पर मुख्यमंत्री का संदेश

कार्यक्रम में शिवकुमार ने गंगाधर अज्जैया के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि मानवता का धर्म दिव्य होना चाहिए और विश्व में शांति केवल धर्म से आती है। उन्होंने कहा, 'पूजा का तरीका चाहे कोई भी हो, भक्ति एक ही है। ईश्वर एक है, लेकिन उसके कई नाम हैं।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में धार्मिक सौहार्द और सरकारी भागीदारी को लेकर बहस जारी है। नए प्रोटोकॉल आदेश के लागू होने के बाद राज्य के हजारों जनप्रतिनिधि और अधिकारी इस ऐतिहासिक आरती का लाभ उठा सकेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका राजनीतिक संदेश स्पष्ट है — शिवकुमार अपने जनप्रतिनिधियों को एक ऐसी सुविधा दे रहे हैं जो उनकी निष्ठा और जुड़ाव को मज़बूत करे। सवाल यह है कि क्या TTD के साथ इस प्रोटोकॉल विस्तार पर औपचारिक सहमति बनी है, या यह केवल राज्य सरकार का एकतरफा आदेश होगा। कर्नाटक ट्रस्ट की अधूरी कहानी और सात एकड़ भूखंड का उल्लेख यह संकेत देता है कि तिरुपति में कर्नाटक की बड़ी उपस्थिति की महत्वाकांक्षा अभी भी जीवित है — और शिवकुमार इसे अपने कार्यकाल की विरासत बनाना चाहते हैं।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तिरुमाला पहली आरती में कर्नाटक के जनप्रतिनिधियों को शामिल करने का फैसला क्या है?
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने घोषणा की है कि एक नया प्रोटोकॉल आदेश जारी किया जाएगा, जिससे राज्य के मंत्री, विधायक, वरिष्ठ अधिकारी और न्यायाधीश तिरुमाला तिरुपति मंदिर की प्रतिदिन होने वाली पहली आरती में शामिल हो सकेंगे। अब तक यह विशेषाधिकार केवल मुख्यमंत्री के पास था।
पहले तिरुमाला पहली आरती में कौन शामिल हो सकता था?
पहले यह विशेषाधिकार केवल कर्नाटक के मुख्यमंत्री को प्राप्त था। प्रतिदिन राज्य सरकार का एक विशेष अधिकारी इस आरती में कर्नाटक की ओर से उपस्थित रहता था।
यह घोषणा कब और कहाँ की गई?
यह घोषणा 13 जुलाई 2026 को बेंगलुरु के बनाशंकरी क्षेत्र में श्री षणमुख सुब्रह्मण्य मंदिर की आधारशिला रखने के बाद मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने की।
तिरुपति में कर्नाटक ट्रस्ट क्या है?
पूर्व मुख्यमंत्री एस.एम. कृष्णा ने तिरुपति में एक कर्नाटक ट्रस्ट की स्थापना की थी और शिवकुमार को उसका अध्यक्ष नियुक्त किया था। सात एकड़ के भूखंड पर भव्य ढाँचा बनाने की योजना थी, लेकिन सरकार का कार्यकाल समाप्त होने के कारण यह पूरी नहीं हो सकी।
बनाशंकरी में किस मंदिर की आधारशिला रखी गई?
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने बेंगलुरु के बनाशंकरी क्षेत्र में श्री षणमुख सुब्रह्मण्य मंदिर की आधारशिला रखी। यह मंदिर द्वारकानाथ की दीर्घकालिक इच्छा के अनुरूप बनाया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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