चेन्नम्मा के निधन पर भावुक हुए एचडी कुमारस्वामी, बोले — 'माता-पिता का साथ नई पीढ़ी के लिए मिसाल'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने अपनी माँ चेन्नम्मा के निधन पर गहरी पीड़ा जताते हुए कहा कि उनके माता-पिता का जीवनभर का साथ आज की युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल है। 85 वर्षीया चेन्नम्मा का 19 जुलाई, शनिवार को बेंगलुरु के मणिपाल अस्पताल में सांस संबंधी जटिलताओं के कारण निधन हो गया। वह पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा की धर्मपत्नी थीं।
मुख्य घटनाक्रम
चेन्नम्मा के निधन की खबर फैलते ही बेंगलुरु के पद्मनाभनगर स्थित देवेगौड़ा परिवार के आवास पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं का तांता लग गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया सहित अनेक केंद्रीय मंत्रियों और राज्य सरकार के नेताओं ने शोक व्यक्त किया। गौरतलब है कि सिद्दारमैया और शिवकुमार राजनीतिक रूप से देवेगौड़ा परिवार के प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं, फिर भी दोनों शनिवार रात श्रद्धांजलि देने पहुँचे — जो चेन्नम्मा की आत्मीयता और सर्वस्वीकार्यता का प्रमाण है।
कुमारस्वामी का भावुक संदेश
पद्मनाभनगर स्थित आवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए कुमारस्वामी ने कहा, 'मेरे माता-पिता का साथ नई पीढ़ी के लिए एक मिसाल है।' उन्होंने बताया कि माँ का उनके प्रति विशेष स्नेह था, परंतु उन्होंने सभी बच्चों के साथ समान व्यवहार किया। कुमारस्वामी ने कहा, 'मैंने उनसे गरीबों के प्रति संवेदनशीलता और उनके मूल्यों को अपनाने की कोशिश की है।'
उन्होंने स्वीकार किया कि व्यस्त राजनीतिक जीवन के बावजूद वह माँ के साथ अधिक से अधिक समय बिताने का प्रयास करते थे। उनके शब्दों में, 'माँ ने जीवन और राजनीति के हर कठिन मोड़ पर मुझे सही रास्ता दिखाया। उनकी सलाह और उनके शब्द मेरे लिए हमेशा अमूल्य रहेंगे।'
चेन्नम्मा की विरासत — सार्वजनिक जीवन से दूर, पर सबके दिलों में करीब
कुमारस्वामी ने बताया कि देवेगौड़ा के पूर्व प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर रहने के बावजूद चेन्नम्मा हमेशा सार्वजनिक जीवन की चमक-दमक से दूर रहीं और उन्होंने कभी प्रचार नहीं चाहा। उनकी आत्मीयता और मेहमाननवाज़ी इतनी प्रसिद्ध थी कि वर्षों तक हर दल के नेता उनके घर में सम्मान के साथ आते-जाते रहे। यही कारण है कि उनके निधन पर राजनीतिक मतभेद भुलाकर सभी उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुँचे।
देवेगौड़ा का दर्द — 'तुम मुझे भी साथ क्यों नहीं ले गईं'
चेन्नम्मा की तबीयत गंभीर होने पर देवेगौड़ा भावुक हो गए थे और कहा था कि अब सब कुछ भगवान के हाथ में है। उनके निधन के बाद वह पार्थिव शरीर के पास फूट-फूटकर रो पड़े। उनके मुँह से निकले शब्द — 'तुम मुझे भी अपने साथ क्यों नहीं ले गईं?' — ने वहाँ उपस्थित सभी लोगों की आँखें नम कर दीं। देवेगौड़ा और चेन्नम्मा के इस गहरे दांपत्य की चर्चा पूरे कर्नाटक में होती रही है।
अंतिम संस्कार की व्यवस्था
रविवार को चेन्नम्मा के पार्थिव शरीर को लोगों के अंतिम दर्शन के लिए पद्मनाभनगर स्थित आवास पर रखा गया। इसके बाद पार्थिव शरीर को नेलमंगला और होलेनरसिपुरा होते हुए हासन ले जाया जाएगा, जहाँ भी लोगों को अंतिम श्रद्धांजलि देने का अवसर मिलेगा। सोमवार सुबह 11 बजे रंगनाथस्वामी मंदिर के पास अंतिम संस्कार संपन्न होगा। चेन्नम्मा की स्मृति में उमड़ा यह जनसमुद्र उनके जीवनभर के सादगीपूर्ण और स्नेहमय व्यक्तित्व की सबसे बड़ी श्रद्धांजलि है।