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उरुग्वे के राजदूत ने की PM मोदी के 'वसुधैव कुटुंबकम्' विजन की तारीफ, बोले — दुनिया को बेहतर भविष्य की उम्मीद

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उरुग्वे के राजदूत ने की PM मोदी के 'वसुधैव कुटुंबकम्' विजन की तारीफ, बोले — दुनिया को बेहतर भविष्य की उम्मीद

सारांश

उरुग्वे के राजदूत अल्बर्टो एंटोनियो गुआनी अमारिला ने PM मोदी को स्थापित वैश्विक नेता बताया और 'वसुधैव कुटुंबकम्' विजन की सराहना की। भारत-दक्षिण अमेरिका व्यापार को 2030 तक $100 अरब तक पहुंचाने की उम्मीद, साथ ही उरुग्वे में भारतीय दूतावास खुलने से द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा मिलने के संकेत।

मुख्य बातें

उरुग्वे के राजदूत अल्बर्टो एंटोनियो गुआनी अमारिला ने 10 जून को बेंगलुरु में PM मोदी को एक स्थापित वैश्विक नेता बताया।
अमारिला ने मोदी के 'वसुधैव कुटुंबकम्' विजन और वैश्विक शांति के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की।
भारत-दक्षिण अमेरिका व्यापार वर्तमान में $50 अरब ; 2030 तक $100 अरब तक पहुंचने का अनुमान।
दोनों देशों ने राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे किए; भारत उरुग्वे में दूतावास खोलने जा रहा है ।
जयशंकर के दूतावास उद्घाटन समारोह में शामिल होने की संभावना।
उरुग्वे के राष्ट्रपति और PM मोदी की पिछले वर्ष ब्राजील में मुलाकात; भविष्य में परस्पर राज्य यात्राओं की उम्मीद।

भारत में उरुग्वे के राजदूत अल्बर्टो एंटोनियो गुआनी अमारिला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक स्थापित वैश्विक नेता बताते हुए कहा कि उनके 'वसुधैव कुटुंबकम्' के विजन ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि समूची मानवता एक परिवार है। बेंगलुरु में 10 जून को दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में अमारिला ने कहा कि मोदी ने वैश्विक चुनौतियों के समाधान और शांति की स्थापना के प्रति जो प्रतिबद्धता दिखाई है, वह उन्हें अन्य नेताओं से अलग करती है।

मोदी का वैश्विक नेतृत्व और 'वसुधैव कुटुंबकम्'

अमारिला ने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी ने पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखने का विचार आगे बढ़ाया है। उन्होंने लगातार वैश्विक चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित किया है और शांति के प्रति अपनी मजबूत प्रतिबद्धता दिखाई है। मेरा मानना है कि वह एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित हो चुके हैं और दुनिया भर के लोगों को उम्मीद है कि उनका योगदान सभी के लिए बेहतर भविष्य बनाने में सहायक होगा।"

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी ने विश्व मंच पर भारत की स्थिति को उल्लेखनीय रूप से सुदृढ़ किया है और विकासशील देशों के हितों की प्रभावी ढंग से वकालत की है।

भारत-दक्षिण अमेरिका सहयोग: ₹50 अरब डॉलर से ₹100 अरब डॉलर का लक्ष्य

अमारिला ने प्रधानमंत्री मोदी की ब्राजील और अर्जेंटीना यात्राओं को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इन दौरों ने दक्षिण अमेरिका और भारत के बीच सहयोग को नई ऊर्जा दी है।

उन्होंने कहा, "वर्तमान में भारत और दक्षिण अमेरिका के बीच लगभग 50 अरब डॉलर का व्यापार है, जिसे 2030 तक करीब 100 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। दोनों क्षेत्रों के बीच सहयोग की अपार संभावनाएं हैं और यह तो केवल शुरुआत है।"

गौरतलब है कि यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक दक्षिण (Global South) के साथ अपने आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है।

भारत-उरुग्वे द्विपक्षीय संबंध: 75 वर्ष और नया दूतावास

द्विपक्षीय संबंधों के मोर्चे पर अमारिला ने बताया कि दोनों देशों ने हाल ही में राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया है। इससे भी बड़ी खबर यह है कि भारत उरुग्वे में अपना दूतावास खोलने जा रहा है, जिसे दोनों देशों के रिश्तों में एक ऐतिहासिक पड़ाव माना जा रहा है।

अमारिला ने कहा, "हम बेहद आशावान हैं क्योंकि भारत उरुग्वे में अपना दूतावास खोलने जा रहा है। विशेष रूप से विदेश मंत्री एस. जयशंकर के उद्घाटन समारोह में शामिल होने की संभावना है।"

नेताओं के बीच व्यक्तिगत संबंध और आगामी यात्राओं की उम्मीद

राजदूत ने यह भी बताया कि उरुग्वे के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मोदी की पिछले वर्ष ब्राजील में मुलाकात हो चुकी है। भविष्य में उरुग्वे के राष्ट्रपति की भारत यात्रा और प्रधानमंत्री मोदी की उरुग्वे यात्रा की संभावना को लेकर भी सकारात्मक उम्मीदें जताई गई हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत लैटिन अमेरिका में अपनी कूटनीतिक उपस्थिति को व्यापक बना रहा है और उरुग्वे जैसे देशों के साथ संस्थागत संवाद को गहरा कर रहा है। आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय आदान-प्रदान की संभावनाएं इस साझेदारी को नई दिशा दे सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यह सवाल उठाती है कि क्या यह वक्तव्य उरुग्वे की आधिकारिक स्थिति है या व्यक्तिगत राय। उरुग्वे में भारतीय दूतावास खुलना निस्संदेह एक ठोस कूटनीतिक कदम है, लेकिन $50 अरब से $100 अरब व्यापार का लक्ष्य बिना किसी रोडमैप के महज़ आशावाद लगता है। भारत-लैटिन अमेरिका संबंधों में ऐतिहासिक रूप से घोषणाएं क्रियान्वयन से आगे रही हैं — असली कसौटी यह होगी कि क्या इस बार संस्थागत ढाँचा उन महत्वाकांक्षाओं को ज़मीन पर उतार पाता है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उरुग्वे के राजदूत ने PM मोदी के बारे में क्या कहा?
उरुग्वे के राजदूत अल्बर्टो एंटोनियो गुआनी अमारिला ने PM मोदी को एक स्थापित वैश्विक नेता बताया और कहा कि उनके 'वसुधैव कुटुंबकम्' विजन ने वैश्विक चुनौतियों के समाधान और शांति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि मोदी के नेतृत्व से दुनिया को बेहतर भविष्य की उम्मीद है।
भारत उरुग्वे में दूतावास कब खोलेगा?
भारत जल्द ही उरुग्वे में अपना दूतावास खोलने जा रहा है, जो दोनों देशों के 75 वर्षीय राजनयिक संबंधों में एक नया अध्याय होगा। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के उद्घाटन समारोह में शामिल होने की संभावना बताई जा रही है, हालांकि तारीख की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
भारत और दक्षिण अमेरिका के बीच व्यापार की स्थिति क्या है?
वर्तमान में भारत और दक्षिण अमेरिका के बीच लगभग $50 अरब डॉलर का व्यापार है। राजदूत अमारिला के अनुसार, 2030 तक इसे करीब $100 अरब डॉलर तक पहुंचाने की उम्मीद है।
'वसुधैव कुटुंबकम्' का PM मोदी की विदेश नीति में क्या महत्व है?
'वसुधैव कुटुंबकम्' एक प्राचीन संस्कृत अवधारणा है जिसका अर्थ है 'संपूर्ण विश्व एक परिवार है'। PM मोदी ने इसे अपनी विदेश नीति के केंद्र में रखा है और G20 की भारतीय अध्यक्षता सहित कई वैश्विक मंचों पर इसे भारत के दृष्टिकोण के रूप में प्रस्तुत किया है।
उरुग्वे के राष्ट्रपति और PM मोदी की मुलाकात कब हुई थी?
उरुग्वे के राजदूत के अनुसार, उरुग्वे के राष्ट्रपति और PM मोदी की पिछले वर्ष ब्राजील में मुलाकात हुई थी। भविष्य में उरुग्वे के राष्ट्रपति की भारत यात्रा और PM मोदी की उरुग्वे यात्रा की संभावना को लेकर भी सकारात्मक उम्मीदें जताई गई हैं।
राष्ट्र प्रेस
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