PM मोदी को इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान 'बिन्तांग अदिपुर्ना', दोनों देशों में UPI, रक्षा और तकनीक पर अहम समझौते
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 7 जुलाई 2026 को जकार्ता में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'बिन्तांग अदिपुर्ना ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया' से नवाज़ा। इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रक्षा, तकनीक, स्वास्थ्य, अंतरिक्ष और डिजिटल भुगतान सहित कई क्षेत्रों में समझौता ज्ञापनों (एमओयू) और द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए। मोदी ने कहा कि भारत-इंडोनेशिया साझेदारी का सकारात्मक प्रभाव 21वीं सदी की दुनिया और पूरी मानवता पर पड़ेगा।
सर्वोच्च सम्मान और द्विपक्षीय संबोधन
मोदी ने अपने संबोधन में कहा, 'मैं इस गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए राष्ट्रपति प्रबोवो का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। आज सुबह मुझे बहुत स्नेह और आदर के साथ इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान दिया गया — यह सम्मान कोटि-कोटि भारतवासियों का, इंडोनेशिया के लोगों की भावनाओं और दोनों देशों के ऐतिहासिक व आत्मीय संबंधों का प्रतीक है।' उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि पिछले वर्ष राष्ट्रपति प्रबोवो भारत के गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि रहे थे।
मोदी ने कहा कि 2018 में स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी अब एक नई उड़ान ले रही है और दोनों देशों के बीच विकास, सुरक्षा, तकनीक, संस्कृति तथा शिक्षा — हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति हो रही है।
रक्षा, समुद्री सुरक्षा और ब्लू इकॉनॉमी
दोनों देशों के बीच रक्षा एक्सचेंज, आपदा प्रबंधन और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। मोदी ने बताया कि भारत और इंडोनेशिया के कोस्टगार्ड हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा के लिए मिलकर काम करेंगे। दो निकटवर्ती समुद्री देश होने के नाते, दोनों ने ब्लू इकॉनॉमी, पोर्ट डेवलपमेंट और मैरीटाइम ट्रेड में आपसी सहयोग गहरा करने का निर्णय लिया।
तकनीक, डिजिटल और शिक्षा सहयोग
मोदी ने कहा कि AI, टेलीकॉम और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में युवाओं के बीच तकनीकी सहयोग के लिए एक अहम समझौता किया गया। दोनों देशों ने स्टार्टअप सहयोग को गहरा करने पर भी सहमति जताई। एक उल्लेखनीय घोषणा में मोदी ने बताया कि भारत के प्रतिष्ठित संस्थान IIM बेंगलुरु का कैंपस इंडोनेशिया में खोला जाएगा, जिससे पूरे आसियान क्षेत्र के युवाओं को लाभ होगा। भारत की UPI भुगतान प्रणाली के इंडोनेशिया के पेमेंट सिस्टम के साथ एकीकरण से व्यापार और यात्रा दोनों में सुगमता आएगी।
अंतरिक्ष क्षेत्र में दशकों पुराने सहयोग को आगे बढ़ाते हुए संयुक्त अनुसंधान, तकनीक साझेदारी और क्षमता निर्माण पर फैसले लिए गए। क्रिटिकल मिनरल्स और स्टील की सप्लाई चेन को मज़बूत करने के लिए भी समझौता हुआ, जिसमें स्टेनलेस स्टील और रेयर अर्थ मैग्नेट में नई साझेदारी शामिल है।
स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और जन-कल्याण
भारत ने इंडोनेशिया के साथ अपनी सार्वजनिक वितरण प्रणाली और मील स्कीम के अनुभव साझा किए हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए समझौतों के तहत भारत की किफायती दवाइयाँ इंडोनेशिया के नागरिकों तक अधिक सुगमता से पहुँच सकेंगी। इसके अलावा, भारत इंडोनेशिया के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता निर्माण में भी सहयोग करेगा। भारत में विकसित गेहूँ के बीजों की आपूर्ति से इंडोनेशिया की खाद्य सुरक्षा को और मज़बूती मिलेगी।
सांस्कृतिक कूटनीति और वैश्विक मुद्दे
मोदी ने बताया कि अगले दिन राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ मिलकर प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण प्रोजेक्ट का शुभारंभ किया जाएगा — यह 1,000 वर्ष से भी पुराना मंदिर दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। दोनों देश गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की ऐतिहासिक इंडोनेशिया यात्रा का शताब्दी वर्ष मनाएंगे और इसे 'टैगोर-देवांतरा संस्कृति व शिक्षा कूटनीति वर्ष' के रूप में आयोजित किया जाएगा। दोनों देशों के चुनाव आयोगों के बीच एमओयू से लोकतांत्रिक सहयोग को भी बल मिलेगा।
वैश्विक मुद्दों पर मोदी ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर दोनों देशों के दृष्टिकोण में तालमेल है और भारत ने हमेशा आसियान सेंट्रलिटी को विशेष महत्व दिया है। फिलिस्तीन के मुद्दे पर दोनों देश टू-स्टेट सॉल्यूशन और दीर्घकालिक शांति का समर्थन करते हैं। मोदी ने अपने संबोधन का समापन इन शब्दों से किया — 'हमारे इतिहास में साझा संस्कृति है, हमारे वर्तमान में साझा विश्वास है और हमारे भविष्य में साझा समृद्धि है।' यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों में एक नए सुनहरे अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।