राम मंदिर ट्रस्ट में बजरंग लाल बागड़ा की नियुक्ति पर कीर्ति आजाद का तंज, घोटाले के आरोपों का उठाया मुद्दा
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद कीर्ति आजाद ने 7 जुलाई को राम मंदिर ट्रस्ट में हुए हालिया बदलावों पर तीखे सवाल उठाए — विशेष रूप से बजरंग लाल बागड़ा की नए ट्रस्टी के रूप में नियुक्ति पर, जिन पर कथित तौर पर अपने प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान अनियमितताओं के आरोप लगे थे। आजाद ने ट्रस्ट में पारदर्शिता और जवाबदेही की माँग करते हुए कहा कि ऐसे व्यक्ति को इस पद पर बिठाना कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
बागड़ा की नियुक्ति पर क्यों उठे सवाल
राम मंदिर ट्रस्ट की हालिया बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए गए और उनकी जगह बजरंग लाल बागड़ा को नया सदस्य नियुक्त किया गया। कीर्ति आजाद ने दावा किया कि बागड़ा वर्तमान में विश्व हिंदू परिषद (VHP) के इंटरनेशनल जनरल सेक्रेटरी हैं, जिससे ट्रस्ट में उनकी भूमिका की स्वतंत्रता पर प्रश्नचिह्न लगता है।
आजाद ने बागड़ा के प्रशासनिक अतीत का हवाला देते हुए कहा कि वे भारतीय वन सेवा के अधिकारी रहे हैं और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी नेशनल एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (NALCO) के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर पद पर भी रह चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बागड़ा पर कथित अनियमितताओं के आरोपों के चलते उनकी सेवाएँ तय समय से पहले समाप्त की गई थीं और कथित चूना खरीद घोटाले सहित अन्य मामलों में जाँच का भी उल्लेख किया।
RSS और VHP की फंडिंग पर उठाए सवाल
कीर्ति आजाद ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद की वित्तीय पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि इन संगठनों के पास देशभर में बड़ी-बड़ी इमारतें हैं, लाखों सदस्यों का दावा किया जाता है और बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित होते हैं — परंतु इनकी फंडिंग और वित्तीय गतिविधियों की सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। आजाद के अनुसार, इतने बड़े संगठनों के लिए सार्वजनिक लेखा-जोखा अनिवार्य होना चाहिए।
TMC के बागी सांसदों पर प्रतिक्रिया
TMC के बागी सांसदों द्वारा चुनाव आयोग से अतिरिक्त समय माँगे जाने की खबरों पर भी कीर्ति आजाद ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जब किसी मामले में दस्तावेज और तथ्य एकत्र हो जाते हैं, तो बाद में सुधार की गुंजाइश बेहद कम रह जाती है। उनके अनुसार, ये सांसद पार्टी छोड़ने की राह पर हैं और उनके पास अपने पक्ष में पर्याप्त तर्क नहीं हैं।
बारुईपुर मामले पर सांप्रदायिक राजनीति का विरोध
बारुईपुर में नाबालिग लड़की से कथित दुष्कर्म और हत्या के मामले पर कुछ नेताओं के बयानों की आलोचना करते हुए आजाद ने कहा कि अपराध की पीड़िता किसी भी धर्म की हो, वह सबसे पहले एक बच्ची है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेता हर मामले में सांप्रदायिक दृष्टिकोण तलाशते हैं और ऐसे संवेदनशील मामलों को राजनीतिक या सांप्रदायिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।
आगे क्या
राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से अब तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बागड़ा की नियुक्ति और ट्रस्ट की संरचना को लेकर विपक्षी दलों की माँग है कि सरकार स्पष्टीकरण दे और ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन को सार्वजनिक किया जाए।