राम मंदिर चंदा विवाद: ट्रस्ट ने गड़बड़ी से किया इनकार, विपक्ष ने उठाई भंग करने की मांग
सारांश
मुख्य बातें
राम मंदिर ट्रस्ट के चंदा विवाद ने 27 जून 2026 को राष्ट्रीय राजनीति में तीखी बहस छेड़ दी है — एक ओर ट्रस्ट के पदाधिकारी किसी भी वित्तीय अनियमितता से साफ इनकार कर रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्षी दल और कुछ संगठन ट्रस्ट को तत्काल भंग करने तथा एसआईटी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग पर अड़े हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेताओं ने दोषियों पर कठोर कार्रवाई का आश्वासन देते हुए विपक्ष पर राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाया है।
ट्रस्ट का पक्ष: पारदर्शिता का दावा
अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य दिनेन्द्र दास ने कहा कि ट्रस्ट लगातार आय-व्यय का हिसाब-किताब सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत करता रहा है और हर तीन महीने में लेखा-जोखा की समीक्षा की जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कहीं कोई कमी या अनियमितता मिलेगी, तो उसे सार्वजनिक रूप से बताया जाएगा, लेकिन फिलहाल ऐसी कोई स्थिति नहीं है।
दास ने कहा कि रामलला की नियमित पूजा-अर्चना, धूप-दीप, नैवेद्य और आरती विधिवत जारी है और अधिकांश श्रद्धालु इससे संतुष्ट हैं। उन्होंने ट्रस्ट पदाधिकारियों के इस्तीफे की खबरों को '100 प्रतिशत झूठ' करार दिया और आरोप लगाया कि केवल वही लोग असंतुष्ट हैं जो राम के नाम पर राजनीतिक या आर्थिक लाभ लेना चाहते हैं।
भाजपा का रुख: एक रुपये की भी गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं
अहमदाबाद में भाजपा नेता रोहन गुप्ता ने कहा कि भगवान राम के नाम पर दिए गए दान का दुरुपयोग करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने बताया कि जैसे ही कथित चोरी की जानकारी मिली, जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया और उसने तीन दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंप दी, जिसके आधार पर कार्रवाई शुरू की गई।
गुप्ता ने कहा कि यदि किसी ने एक रुपया भी गलत तरीके से लिया है तो वह राशि वापस ली जाएगी और कानूनी कार्रवाई होगी। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग कभी राम मंदिर आंदोलन का हिस्सा नहीं रहे और जिन्होंने मंदिर के अस्तित्व पर सवाल उठाए थे, वही अब दान के मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं।
विपक्ष की मांग: ट्रस्ट भंग करो, रिपोर्ट सार्वजनिक करो
जम्मू में शिवसेना (यूबीटी) कार्यकर्ताओं ने राम मंदिर ट्रस्ट के खिलाफ प्रदर्शन किया। जम्मू-कश्मीर शिवसेना (यूबीटी) के प्रदेश अध्यक्ष मनीष साहनी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कई प्रमुख हिंदू धार्मिक स्थलों पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं, जिससे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था प्रभावित हुई है।
साहनी ने राम मंदिर भूमि खरीद विवाद, वैष्णो देवी और तिरुपति बालाजी से जुड़े विवादों का उल्लेख करते हुए धार्मिक संस्थानों में अधिक पारदर्शिता की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि सभी हिंदू मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया जाए और चारों शंकराचार्यों के नेतृत्व में एक हिंदू संरक्षण बोर्ड का गठन किया जाए।
साहनी ने मांग की कि एसआईटी की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और कहा कि केवल इस्तीफों से काम नहीं चलेगा — व्यापक सुधार की आवश्यकता है।
चंपत राय के बचाव में उतरे जितेंद्र नारायण सिंह
लखनऊ में जितेंद्र नारायण सिंह (वसीम रिजवी) ने राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का बचाव करते हुए कहा कि उनका इस्तीफा जल्दबाजी में लिया गया फैसला प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि वह चंपत राय को वर्ष 2009 से जानते हैं और राम मंदिर आंदोलन में उनके योगदान को नकारा नहीं जा सकता।
सिंह ने विपक्षी नेताओं से सवाल किया कि वे पहले यह बताएं कि राम मंदिर निर्माण और आंदोलन में उनका क्या योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि बड़े संगठनों में कभी-कभी कुछ लोग भरोसे का गलत फायदा उठा लेते हैं, लेकिन इससे पूरे संगठन या आंदोलन की विश्वसनीयता पर सवाल नहीं उठाए जा सकते।
आगे क्या होगा
यह विवाद ऐसे समय में गहराया है जब राम मंदिर के उद्घाटन के बाद से ट्रस्ट की वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल पहली बार इतने मुखर रूप से उठाए जा रहे हैं। एसआईटी रिपोर्ट के सार्वजनिक होने या न होने का फैसला आने वाले दिनों में इस विवाद की दिशा तय करेगा। राजनीतिक और धार्मिक दोनों पक्षों की नज़रें अब सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।