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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: अयोध्या संतों ने कहा — 'रामलला दर्शन अबाधित, सुप्रीम कोर्ट का फैसला देशहित में होगा'

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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: अयोध्या संतों ने कहा — 'रामलला दर्शन अबाधित, सुप्रीम कोर्ट का फैसला देशहित में होगा'

सारांश

चढ़ावे के कथित गबन के बावजूद अयोध्या के संतों ने रामलला दर्शन को अबाधित बताया और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई व नई एसआईटी का स्वागत किया। सोमवार की सुनवाई से पहले संतों का एकमत संदेश — जांच हो, सुधार हो, लेकिन आस्था पर आँच न आए।

मुख्य बातें

राम मंदिर ट्रस्ट सदस्य दिनेंद्र दास ने कहा कि रामलला के दर्शन अबाधित हैं और भक्तों की भीड़ बढ़ रही है।
चढ़ावे के कथित गबन से जुड़ी चार याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई निर्धारित है।
दिनेंद्र दास ने नई एसआईटी के गठन का समर्थन किया और जांच में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
राम मंदिर का 99 प्रतिशत निर्माण कार्य पूर्ण बताया गया; सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद सुधार की उम्मीद।
महामंडलेश्वर विष्णु दास ने विपक्ष पर दान प्रकरण में राजनीति करने का आरोप लगाया।

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन से जुड़े आरोपों के बीच 27 जुलाई को संतों ने स्पष्ट किया कि रामलला के दर्शन पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ा है और श्रद्धालुओं की भीड़ निरंतर उमड़ रही है। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को इस मामले से जुड़ी चार याचिकाओं पर सुनवाई निर्धारित है, जिससे पहले अयोध्या के साधु-संतों ने अपनी प्रतिक्रियाएँ दीं।

दर्शन व्यवस्था पर संतों का बयान

राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य दिनेंद्र दास ने कहा कि भक्तों को दर्शन में कोई कठिनाई नहीं हो रही। उनके अनुसार, 'भक्तों को आसानी से दर्शन हो रहे हैं, सही से पूजा-पाठ होता है और दर्शन करने वालों की कमी नहीं है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।

एसआईटी जांच और सुप्रीम कोर्ट सुनवाई पर रुख

दिनेंद्र दास ने दान प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का स्वागत करते हुए नई एसआईटी के गठन का समर्थन किया। उन्होंने कहा, 'राम मंदिर का लगभग 99 प्रतिशत कार्य संपन्न हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद अच्छा सुधार देखने को मिलेगा।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रस्ट जांच में पूर्ण सहयोग देगा ताकि भविष्य में इस तरह की शंकाओं की गुंजाइश न रहे।

दास ने कहा कि अयोध्या के लोग इस मामले की पूरी जानकारी रखते हैं और 'कुछ शंकाएँ हैं तो एसआईटी जांच करेगी।' उनके अनुसार व्यवस्थाओं में सुधार की प्रक्रिया पहले से जारी है।

जगतगुरु और महामंडलेश्वर की प्रतिक्रिया

जगतगुरु परमहंस आचार्य ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट में आज की सुनवाई के दौरान जो कुछ होगा, वह देश और देश की संस्कृति के लिए बेहतर रहेगा। न्याय का सबसे बड़ा मंदिर सुप्रीम कोर्ट ही है।'

महामंडलेश्वर विष्णु दास ने नई एसआईटी के गठन का स्वागत करते हुए कहा कि उनका मानना है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला संतों के हित में होगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राम मंदिर के दान प्रकरण पर विपक्ष राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है।

मामले की पृष्ठभूमि

राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन से जुड़ी चार याचिकाएँ सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब मंदिर का निर्माण लगभग पूर्ण हो चुका है और देशभर से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए अयोध्या पहुँच रहे हैं। गौरतलब है कि राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद से यह पहला बड़ा प्रशासनिक विवाद है जो ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है।

आगे क्या होगा

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के नतीजे तय करेंगे कि जांच का दायरा और एसआईटी की संरचना किस रूप में आगे बढ़ेगी। संतों और ट्रस्ट सदस्यों के सहयोग के आश्वासन के बाद अब सभी की निगाहें न्यायालय के अगले निर्देशों पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उन वैध प्रश्नों को नहीं ढक सकता जो सार्वजनिक दान की पारदर्शिता को लेकर उठ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी इस मामले को विश्वसनीय परिणाम दे सकती है — बशर्ते जांच प्रक्रिया में राजनीतिक या धार्मिक दबाव न हो।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चढ़ावा विवाद क्या है?
राम मंदिर में चढ़ावे की राशि के कथित गबन से जुड़े आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चार याचिकाएँ दायर की गई हैं। यह मामला राम मंदिर ट्रस्ट की वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठाता है।
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई कब होगी?
सुप्रीम कोर्ट में चढ़ावे के कथित गबन से जुड़ी चार याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई निर्धारित है। इस सुनवाई से पहले ही अयोध्या के संतों ने अपनी प्रतिक्रियाएँ दे दी हैं।
क्या राम मंदिर में दर्शन व्यवस्था प्रभावित हुई है?
राम मंदिर ट्रस्ट सदस्य दिनेंद्र दास के अनुसार रामलला के दर्शन पूरी तरह अबाधित हैं और भक्तों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। पूजा-पाठ की व्यवस्था भी सामान्य रूप से चल रही है।
नई एसआईटी के गठन पर संतों का क्या रुख है?
अयोध्या के संतों और ट्रस्ट सदस्यों ने नई एसआईटी के गठन का स्वागत किया है। दिनेंद्र दास ने जांच में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया, जबकि महामंडलेश्वर विष्णु दास ने कहा कि इससे मामले में पारदर्शिता आएगी।
राम मंदिर निर्माण की वर्तमान स्थिति क्या है?
दिनेंद्र दास के अनुसार राम मंदिर का लगभग 99 प्रतिशत निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद प्रशासनिक व्यवस्थाओं में और सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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