जकार्ता में PM मोदी का सेरेमोनियल स्वागत, राष्ट्रपति सुबियांतो संग द्विपक्षीय वार्ता आज
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 जुलाई को अपनी तीन देशों की यात्रा के पहले पड़ाव पर जकार्ता पहुँचे, जहाँ इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने स्वयं एयरपोर्ट पर पहुँचकर उनका स्वागत किया। इस्ताना मर्डेका (राष्ट्रपति महल) में भव्य सेरेमोनियल रिसेप्शन के बाद आज दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक होगी, जिसमें रक्षा, समुद्री सुरक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स, खाद्य सुरक्षा और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होने की उम्मीद है।
सेरेमोनियल स्वागत का माहौल
स्वागत समारोह के दौरान इंडोनेशिया और भारत के राष्ट्रीय ध्वज थामे स्कूली बच्चे कार्यक्रम स्थल पर खड़े दिखे। प्रधानमंत्री मोदी उनके पास जाकर हाथ हिलाते हुए उनका अभिवादन स्वीकार किया। इस्ताना मर्डेका पहुँचने पर राष्ट्रपति सुबियांतो ने उन्हें गले लगाकर स्वागत किया और भारतीय प्रतिनिधिमंडल से भी हाथ मिलाया।
प्रधानमंत्री ने इंडोनेशिया के उच्च अधिकारियों और मंत्रियों से मुलाकात की तथा इस्ताना मर्डेका की गेस्ट बुक पर हस्ताक्षर किए, जिस दौरान राष्ट्रपति सुबियांतो भी उनके साथ उपस्थित रहे।
PM मोदी का एक्स पर संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने जकार्ता में मिले विशेष स्वागत का एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया। उन्होंने लिखा, 'कल शाम जकार्ता में हुए खास स्वागत की खास बातें। आज राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांटो के साथ बातचीत का इंतजार है।' एक अन्य पोस्ट में उन्होंने राष्ट्रपति के एयरपोर्ट तक स्वयं आने के भाव को 'बेहद गर्मजोशी और भावनाओं से भरा' बताया।
द्विपक्षीय बैठक के एजेंडे की मुख्य बातें
आज होने वाली वार्ता में मई 2018 में स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने पर जोर रहेगा। रक्षा और समुद्री सुरक्षा के अलावा क्रिटिकल मिनरल्स, खाद्य सुरक्षा और डिजिटल इकोनॉमी में सहयोग विस्तार प्रमुख एजेंडे में हैं। दोनों देशों के बीच कई एमओयू और द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर भी होने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'साल 2018 में भारत और इंडोनेशिया के संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाया गया था, जिसका लाभ दोनों देशों के लोगों को मिला है। इस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति प्रबोवो और मैं विभिन्न क्षेत्रों में इस साझेदारी को और मजबूत बनाने के लिए विस्तार से चर्चा करेंगे।'
ऐतिहासिक संदर्भ
यह प्रधानमंत्री मोदी की इंडोनेशिया की चौथी यात्रा है। गौरतलब है कि 2018 में व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा मिलने के बाद यह उनकी पहली द्विपक्षीय यात्रा है — यानी इस संबंध को औपचारिक रूप मिलने के सात वर्षों बाद दोनों देश इसे नए सिरे से परिभाषित करने की कोशिश कर रहे हैं। भारत-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती भू-राजनीतिक हलचल के बीच इंडोनेशिया के साथ रक्षा और समुद्री सहयोग की अहमियत और बढ़ जाती है।
यह यात्रा ऐसे समय में आई है जब भारत अपनी 'एक्ट ईस्ट' नीति को व्यावहारिक धरातल देने की कोशिश में है और इंडोनेशिया क्षेत्र की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में उभर रहा है।