1 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जी-7 शिखर सम्मेलन में PM मोदी का संदेश: साझेदारी सम्मान पर हो, निर्भरता पर नहीं

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जी-7 शिखर सम्मेलन में PM मोदी का संदेश: साझेदारी सम्मान पर हो, निर्भरता पर नहीं

सारांश

एवियन में जी-7 के मंच से मोदी ने वैश्विक साझेदारी की परिभाषा बदलने की कोशिश की — सहायता नहीं, सम्मान; निर्भरता नहीं, बराबरी। 'वसुधैव कुटुंबकम' को कूटनीतिक हथियार बनाते हुए उन्होंने ग्लोबल साउथ की आवाज़ उठाई और भरोसे को दुनिया की सबसे बड़ी रणनीतिक संपत्ति बताया।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 16 जून 2026 को फ्रांस के एवियन में जी-7 आउटरीच सत्र को संबोधित किया।
मोदी ने कहा — 'आपसी भरोसा आज की सबसे बड़ी रणनीतिक संपत्ति है' ; दुनिया संसाधनों की नहीं, भरोसे की कमी से जूझ रही है।
साझेदारी सम्मान पर आधारित होनी चाहिए, निर्भरता पर नहीं — ग्लोबल साउथ को बराबरी की भागीदारी चाहिए।
भारत की पहलों — इंटरनेशनल सोलर अलायंस, ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस, मिशन लाइफ — को 'वसुधैव कुटुंबकम' की अभिव्यक्ति बताया।
अफ्रीका में प्रशिक्षण, जल, कृषि और ऊर्जा क्षेत्रों में भारत की क्षमता-निर्माण केंद्रित साझेदारी का उल्लेख।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 जून 2026 को फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में स्पष्ट शब्दों में कहा कि वैश्विक साझेदारियाँ सम्मान की नींव पर खड़ी होनी चाहिए, न कि निर्भरता पर। उन्होंने इस मंच से आपसी भरोसे को आज की दुनिया की सबसे बड़ी रणनीतिक संपत्ति बताया।

भरोसे की कमी — असली वैश्विक संकट

विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री ने कहा कि ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता अब एक-दूसरे से अविभाज्य रूप से जुड़े हुए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि व्यापार और तकनीक का उपयोग कई बार संकीर्ण स्वार्थों के लिए किया जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वास का क्षरण हो रहा है।

मोदी ने कहा, 'दुनिया संसाधनों की कमी से नहीं, बल्कि भरोसे की कमी से जूझ रही है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि वैश्विक साझेदारियों का भविष्य इसी पर निर्भर करेगा कि देश इस भरोसे को किस तरह पुनर्स्थापित करते हैं।

एक्स पर साझा किया संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'दुनिया पहले से कहीं ज़्यादा आपस में जुड़ी और एक-दूसरे पर निर्भर हो गई है। कोई भी साझेदारी तभी सफल हो सकती है जब उसकी नींव भरोसे पर टिकी हो।' यह संदेश सम्मेलन के दौरान व्यापक रूप से साझा किया गया।

भारत की वैश्विक पहलें और 'वसुधैव कुटुंबकम'

मोदी ने भारत की विदेश नीति के केंद्र में 'वसुधैव कुटुंबकम' — अर्थात पूरी दुनिया को एक परिवार मानने — के सिद्धांत को रखा। उन्होंने इंटरनेशनल सोलर अलायंस, डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर गठबंधन, ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस, मिशन 'लाइफ' और 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान को भारत की इसी समावेशी सोच का प्रतिबिंब बताया।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि श्रीलंका में चक्रवात, अफगानिस्तान में भूकंप, मोजाम्बिक में बाढ़ और जमैका में तूफान के समय भारत ने सबसे पहले सहायता पहुँचाई। यह 'मानवता पहले' के सिद्धांत का व्यावहारिक प्रमाण है।

ग्लोबल साउथ को बराबरी की दरकार

प्रधानमंत्री ने ग्लोबल साउथ के संदर्भ में कहा कि इन देशों को केवल सहायता नहीं, बल्कि समान भागीदारी चाहिए। उनके शब्दों में, 'हमें दान देने वाले और लेने वाले की सोच से आगे बढ़ना होगा और समान भागीदार के रूप में काम करना होगा।'

उन्होंने अफ्रीका में भारत की पहलों का उल्लेख करते हुए बताया कि भारत वहाँ प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, जल संसाधन, कृषि और ऊर्जा क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। गौरतलब है कि यह दृष्टिकोण पारंपरिक 'डोनर-रिसीवर' मॉडल से अलग है और भारत की विकास साझेदारी की पहचान बन चुका है।

समावेशी विकास: भारत का अनुभव

वित्तीय समावेशन, स्वास्थ्य सुरक्षा, डिजिटल पहचान और महिला नेतृत्व वाले विकास में भारत की उपलब्धियों का हवाला देते हुए मोदी ने कहा कि 'सर्व जन हिताय, सर्व जन सुखाय' का मंत्र देश की प्रगति का आधार रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि साझेदारी की असली कसौटी यह है कि हम दूसरों को खुद अपने लिए क्या बनाने में सक्षम बनाते हैं — न कि केवल हम उनके लिए क्या बनाते हैं। यह दृष्टिकोण भारत की आने वाली वैश्विक कूटनीति की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

न ग्लोबल साउथ का मात्र प्रतिनिधि, बल्कि एक स्वतंत्र नैतिक आवाज़ के रूप में स्थापित करना चाहता है। 'सम्मान बनाम निर्भरता' का फ्रेम सीधे उन पश्चिमी सहायता मॉडलों पर प्रहार करता है जिन्हें अफ्रीका और एशिया में लंबे समय से शर्तों से लदा माना जाता है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि भारत की अपनी विकास साझेदारियों में पारदर्शिता और जवाबदेही के तंत्र अभी भी अपर्याप्त हैं। असली परीक्षा यह है कि 'बराबरी की साझेदारी' का यह नारा ठोस संस्थागत ढाँचे में कब और कैसे बदलता है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जी-7 सम्मेलन में PM मोदी ने क्या कहा?
PM मोदी ने 16 जून 2026 को फ्रांस के एवियन में जी-7 आउटरीच सत्र में कहा कि आपसी भरोसा आज की सबसे बड़ी रणनीतिक संपत्ति है और वैश्विक साझेदारियाँ सम्मान पर आधारित होनी चाहिए, निर्भरता पर नहीं। उन्होंने ग्लोबल साउथ के लिए बराबरी की भागीदारी की वकालत की।
मोदी ने 'वसुधैव कुटुंबकम' का जिक्र क्यों किया?
मोदी ने 'वसुधैव कुटुंबकम' — पूरी दुनिया को एक परिवार मानने के सिद्धांत — को भारत की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय पहलों की नींव बताया। इसी सोच के तहत भारत ने प्राकृतिक आपदाओं में श्रीलंका, अफगानिस्तान, मोजाम्बिक और जमैका जैसे देशों को सबसे पहले सहायता पहुँचाई।
ग्लोबल साउथ के बारे में मोदी का क्या कहना था?
मोदी ने कहा कि ग्लोबल साउथ को केवल सहायता नहीं, बल्कि समान भागीदारी चाहिए। उन्होंने 'दान देने वाले और लेने वाले' की पारंपरिक सोच से आगे बढ़कर समान भागीदार के रूप में काम करने का आह्वान किया।
अफ्रीका में भारत की कौन-सी पहलें सक्रिय हैं?
मोदी के अनुसार, भारत अफ्रीका में प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, जल संसाधन, कृषि और ऊर्जा क्षेत्रों में काम कर रहा है। यह साझेदारी अफ्रीकी देशों की आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर केंद्रित है।
भारत की किन अंतरराष्ट्रीय पहलों का जी-7 में उल्लेख हुआ?
PM मोदी ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस, डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर गठबंधन, ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस, मिशन 'लाइफ' और 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान का उल्लेख किया। इन्हें भारत की समावेशी और टिकाऊ विकास सोच का प्रतिबिंब बताया गया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले