जी-7 समिट में PM मोदी का आह्वान: साझेदारी, कनेक्टिविटी और समावेशी विकास से बनेगा नया विश्व
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जून 2026 को फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए साझेदारी, कनेक्टिविटी और समावेशी विकास को वैश्विक प्रगति की बुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि जब दुनिया बहुआयामी चुनौतियों और अनिश्चितताओं से जूझ रही है, तब इस मंच से निकलने वाला संदेश पूरी मानवता के भविष्य के लिए निर्णायक है। भारत की विकास यात्रा को उन्होंने लोकतांत्रिक भागीदारी और सामूहिक प्रगति का जीवंत उदाहरण बताया।
भारत की विकास गाथा और वैश्विक संदेश
मोदी ने कहा कि भारत की डेवलपमेंट स्टोरी केवल आर्थिक आँकड़ों की कहानी नहीं है — यह 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास' के सिद्धांत पर चलने वाली यात्रा है, जो पिछले बारह वर्षों से भारत की नीतियों का मार्गदर्शन कर रही है। उन्होंने रेखांकित किया कि जब भारत आगे बढ़ता है, तो दुनिया की एक-छठी आबादी आगे बढ़ती है — इसलिए भारत की तरक्की का वैश्विक महत्व है।
उन्होंने भारत की जी-20 अध्यक्षता का उल्लेख करते हुए कहा कि 'एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य' का संदेश महज एक नारा नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता की उस सोच की अभिव्यक्ति है जो पूरी दुनिया को एक परिवार मानती है।
आईएमईसी और नई कनेक्टिविटी पहल
मोदी ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) को एक ऐतिहासिक रणनीतिक कदम बताया, जो एशिया, मध्य पूर्व और यूरोप को व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और निवेश के सूत्र में पिरोता है। इस विजन से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और प्रशांत द्वीप क्षेत्र के देशों के साथ कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर काम करने का प्रस्ताव रखा।
इसके साथ ही उन्होंने एक नई पहल — 'इंटरनेशनल मोबिलाइजेशन पार्टनरशिप फॉर एक्सेलरेटिंग कनेक्टिविटी एंड ट्रेड' (IMPACT) — के गठन का सुझाव दिया। इस प्रस्तावित पहल का लक्ष्य ऐसे कॉरिडोर बनाना होगा जो व्यापार, तकनीक, ऊर्जा और नए अवसरों को परस्पर जोड़ सकें।
ग्लोबल साउथ और वित्तीय संस्थाओं पर जोर
मोदी ने पश्चिम एशिया संकट के कारण ईंधन, उर्वरक और खाद्य आपूर्ति पर पड़े दबाव का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका सर्वाधिक असर ग्लोबल साउथ के विकासशील देशों पर बना रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को वास्तविक बनाना है, तो सबसे कमज़ोर देशों को इन संकटों का बोझ अकेले नहीं उठाना चाहिए।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं से आग्रह किया कि वे ऐसे सहायता तंत्र विकसित करें जो विकासशील देशों को आर्थिक झटकों से उबरने और अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने में सक्षम बनाएँ।
ग्लोबल स्किल्स पार्टनरशिप का प्रस्ताव
मोदी ने कहा कि जहाँ विकसित देश बढ़ती उम्र की आबादी की चुनौती से जूझ रहे हैं, वहीं भारत और ग्लोबल साउथ के पास युवा प्रतिभा, उद्यमिता और कौशल की अपार क्षमता है। इस प्राकृतिक तालमेल का लाभ उठाने के लिए उन्होंने एक ग्लोबल स्किल्स पार्टनरशिप की परिकल्पना प्रस्तुत की, जिसके अंतर्गत कुशल मानव संसाधन की पहचान कर भरोसेमंद तरीके से उनकी अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता को बढ़ावा दिया जाए।
विकास की परिभाषा और भारत की प्रतिबद्धता
विदेश मंत्रालय के अनुसार, मोदी ने शिखर सम्मेलन में कहा, 'आज विकास का मतलब सिर्फ जीडीपी या व्यापार के आँकड़ों तक सीमित नहीं है। असली सवाल यह है कि इस विकास का फायदा किसे मिल रहा है? इसमें कौन शामिल है? और यह किस दिशा में आगे बढ़ रहा है?' उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने हाल के वर्षों में इस बैठक में शामिल अधिकतर देशों के साथ व्यापार समझौते किए हैं — जो साझेदारी में उसके विश्वास का प्रमाण है।
मोदी ने कहा कि भारत संरक्षणवाद और रोक-टोक की राह नहीं, बल्कि खुली साझेदारी और साझा समृद्धि की राह पर चलता है। आने वाले वर्षों में भारत सभी जी-7 देशों के साथ मिलकर एक अधिक स्थिर, भरोसेमंद और समृद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।