जी-7 शिखर सम्मेलन में PM मोदी का आह्वान: भरोसे और समानता पर हो वैश्विक साझेदारी
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 जून 2026 को फ्रांस के एवियान में आयोजित 52वें जी-7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में स्पष्ट संदेश दिया कि वैश्विक साझेदारी अब 'मदद देने और लेने' के पुराने ढाँचे से बाहर निकलकर बराबरी और एकजुटता पर टिकनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा 'मानवता सबसे पहले' के दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ा है और समावेशी वैश्विक विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
मुख्य संदेश: भरोसा और बराबरी
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की गई जानकारी में बताया कि मोदी ने अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को मज़बूत करने के लिए विश्वास को सबसे ज़रूरी तत्व बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया को अब दाता-प्राप्तकर्ता संबंध से आगे बढ़कर समान और एकजुट साझेदारी की दिशा में जाना होगा।
मोदी ने भारत की अंतरराष्ट्रीय सोच की जड़ें 'वसुधैव कुटुम्बकम' — अर्थात 'पूरी दुनिया एक परिवार है' — के विचार में बताईं। उन्होंने कहा कि यही भावना भारत की हर वैश्विक पहल में झलकती है।
भारत की वैश्विक पहलें: 'मानवता पहले' की व्यावहारिक अभिव्यक्ति
मोदी ने रेखांकित किया कि भारत का 'मानवता पहले' का दृष्टिकोण केवल शब्दों तक सीमित नहीं है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा-रोधी बुनियादी ढाँचे के लिए गठबंधन (CDRI), ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस, मिशन 'लाइफ' और 'एक पेड़ माँ के नाम' जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सभी इसी सोच की व्यावहारिक अभिव्यक्ति हैं।
गौरतलब है कि भारत ने इनमें से कई पहलें वैश्विक मंचों पर प्रस्तुत की हैं और विकासशील देशों के बीच इन्हें व्यापक समर्थन मिला है।
मैक्रों और ट्रंप से मुलाकात
एवियान पहुँचने पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाया। आउटरीच सत्र में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य देशों के नेता भी उपस्थित रहे।
सत्र शुरू होने से पहले मोदी और ट्रंप ने हाथ मिलाया और संक्षिप्त बातचीत की। मोदी ने एवियान पहुँचने के बाद कहा कि वे विश्व नेताओं से मिलने और महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर विचार साझा करने को लेकर उत्साहित हैं।
भारत की जी-7 में ऐतिहासिक भागीदारी
15 से 17 जून तक चलने वाले इस शिखर सम्मेलन में भारत को साझेदार देश के रूप में आमंत्रित किया गया है। यह जी-7 में भारत की 13वीं भागीदारी है, जबकि प्रधानमंत्री मोदी की इस मंच पर यह लगातार 7वीं उपस्थिति है — जो भारत की बढ़ती वैश्विक कूटनीतिक साख को रेखांकित करती है।
मोदी ने एक्स पर लिखा कि भारत दुनिया को अधिक टिकाऊ और समृद्ध बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों के प्रति प्रतिबद्ध है। इस सम्मेलन में वे भारत और ग्लोबल साउथ से जुड़े अहम मुद्दों पर विश्व नेताओं के साथ विचार-विमर्श कर रहे हैं।
आगे की राह
जी-7 शिखर सम्मेलन 17 जून को समाप्त होगा। उम्मीद है कि सम्मेलन के अंत में जारी संयुक्त घोषणापत्र में ग्लोबल साउथ की चिंताओं और टिकाऊ विकास के एजेंडे को प्रमुखता मिलेगी, जिसमें भारत की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है।