3 अगस्त 2026
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जी-7 शिखर सम्मेलन में PM मोदी का आह्वान: भरोसे और समानता पर हो वैश्विक साझेदारी

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जी-7 शिखर सम्मेलन में PM मोदी का आह्वान: भरोसे और समानता पर हो वैश्विक साझेदारी

सारांश

जी-7 के मंच पर मोदी का संदेश साफ था — दुनिया को दाता-प्राप्तकर्ता की पुरानी सोच छोड़नी होगी। 'वसुधैव कुटुम्बकम' की भावना और ठोस वैश्विक पहलों का हवाला देते हुए उन्होंने भरोसे और बराबरी पर आधारित नई विश्व व्यवस्था की वकालत की — और यह उनकी इस मंच पर लगातार 7वीं उपस्थिति थी।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 16 जून 2026 को फ्रांस के एवियान में 52वें जी-7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में भाग लिया।
मोदी ने वैश्विक साझेदारी में भरोसे और समानता को केंद्रीय तत्व बताया; 'दाता-प्राप्तकर्ता' ढाँचे से आगे बढ़ने का आह्वान किया।
भारत की पहलों — अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, CDRI, ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस, मिशन लाइफ — को 'मानवता पहले' दृष्टिकोण के उदाहरण के रूप में रखा।
फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने गर्मजोशी से स्वागत किया; अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से भी संक्षिप्त मुलाकात हुई।
यह जी-7 में भारत की 13वीं और मोदी की व्यक्तिगत रूप से लगातार 7वीं भागीदारी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 जून 2026 को फ्रांस के एवियान में आयोजित 52वें जी-7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में स्पष्ट संदेश दिया कि वैश्विक साझेदारी अब 'मदद देने और लेने' के पुराने ढाँचे से बाहर निकलकर बराबरी और एकजुटता पर टिकनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा 'मानवता सबसे पहले' के दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ा है और समावेशी वैश्विक विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

मुख्य संदेश: भरोसा और बराबरी

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की गई जानकारी में बताया कि मोदी ने अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को मज़बूत करने के लिए विश्वास को सबसे ज़रूरी तत्व बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया को अब दाता-प्राप्तकर्ता संबंध से आगे बढ़कर समान और एकजुट साझेदारी की दिशा में जाना होगा।

मोदी ने भारत की अंतरराष्ट्रीय सोच की जड़ें 'वसुधैव कुटुम्बकम' — अर्थात 'पूरी दुनिया एक परिवार है' — के विचार में बताईं। उन्होंने कहा कि यही भावना भारत की हर वैश्विक पहल में झलकती है।

भारत की वैश्विक पहलें: 'मानवता पहले' की व्यावहारिक अभिव्यक्ति

मोदी ने रेखांकित किया कि भारत का 'मानवता पहले' का दृष्टिकोण केवल शब्दों तक सीमित नहीं है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा-रोधी बुनियादी ढाँचे के लिए गठबंधन (CDRI), ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस, मिशन 'लाइफ' और 'एक पेड़ माँ के नाम' जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सभी इसी सोच की व्यावहारिक अभिव्यक्ति हैं।

गौरतलब है कि भारत ने इनमें से कई पहलें वैश्विक मंचों पर प्रस्तुत की हैं और विकासशील देशों के बीच इन्हें व्यापक समर्थन मिला है।

मैक्रों और ट्रंप से मुलाकात

एवियान पहुँचने पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाया। आउटरीच सत्र में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य देशों के नेता भी उपस्थित रहे।

सत्र शुरू होने से पहले मोदी और ट्रंप ने हाथ मिलाया और संक्षिप्त बातचीत की। मोदी ने एवियान पहुँचने के बाद कहा कि वे विश्व नेताओं से मिलने और महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर विचार साझा करने को लेकर उत्साहित हैं।

भारत की जी-7 में ऐतिहासिक भागीदारी

15 से 17 जून तक चलने वाले इस शिखर सम्मेलन में भारत को साझेदार देश के रूप में आमंत्रित किया गया है। यह जी-7 में भारत की 13वीं भागीदारी है, जबकि प्रधानमंत्री मोदी की इस मंच पर यह लगातार 7वीं उपस्थिति है — जो भारत की बढ़ती वैश्विक कूटनीतिक साख को रेखांकित करती है।

मोदी ने एक्स पर लिखा कि भारत दुनिया को अधिक टिकाऊ और समृद्ध बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों के प्रति प्रतिबद्ध है। इस सम्मेलन में वे भारत और ग्लोबल साउथ से जुड़े अहम मुद्दों पर विश्व नेताओं के साथ विचार-विमर्श कर रहे हैं।

आगे की राह

जी-7 शिखर सम्मेलन 17 जून को समाप्त होगा। उम्मीद है कि सम्मेलन के अंत में जारी संयुक्त घोषणापत्र में ग्लोबल साउथ की चिंताओं और टिकाऊ विकास के एजेंडे को प्रमुखता मिलेगी, जिसमें भारत की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार इसकी धार तेज़ है — क्योंकि ट्रंप के अमेरिका-फर्स्ट एजेंडे और पश्चिमी गठबंधनों में बढ़ती दरारों के बीच ग्लोबल साउथ की आवाज़ उठाने वाला कोई चाहिए। असली सवाल यह है कि क्या भारत की ये पहलें — सौर गठबंधन से लेकर बायोफ्यूल अलायंस तक — केवल कूटनीतिक ब्रांडिंग हैं या इनके पीछे ठोस वित्तीय और संस्थागत प्रतिबद्धता भी है। जी-7 में 13वीं भागीदारी के बावजूद भारत अभी भी स्थायी सदस्य नहीं है — और यह खाई 'बराबरी' के नारे को एक सीमा तक ही विश्वसनीय बनाती है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जी-7 शिखर सम्मेलन 2026 में PM मोदी ने क्या कहा?
मोदी ने 16 जून 2026 को फ्रांस के एवियान में आयोजित जी-7 आउटरीच सत्र में कहा कि वैश्विक साझेदारी भरोसे और बराबरी पर आधारित होनी चाहिए, न कि दाता-प्राप्तकर्ता संबंध पर। उन्होंने 'वसुधैव कुटुम्बकम' और भारत की वैश्विक पहलों का हवाला दिया।
जी-7 में भारत की भागीदारी क्यों अहम है?
भारत जी-7 का स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन साझेदार देश के रूप में यह उसकी 13वीं भागीदारी है। इस मंच पर भारत ग्लोबल साउथ की चिंताएँ उठाता है और अपनी बढ़ती कूटनीतिक भूमिका को रेखांकित करता है।
मोदी ने किन वैश्विक पहलों का उल्लेख किया?
मोदी ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा-रोधी बुनियादी ढाँचे के लिए गठबंधन (CDRI), ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस, मिशन 'लाइफ' और 'एक पेड़ माँ के नाम' का उल्लेख किया। उन्होंने इन्हें भारत के 'मानवता पहले' दृष्टिकोण की व्यावहारिक अभिव्यक्ति बताया।
मोदी की ट्रंप और मैक्रों से मुलाकात कैसी रही?
फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने एवियान में मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया और दोनों ने गले मिले। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से मोदी ने सत्र शुरू होने से पहले हाथ मिलाया और संक्षिप्त बातचीत की।
52वाँ जी-7 शिखर सम्मेलन कब और कहाँ हो रहा है?
52वाँ जी-7 शिखर सम्मेलन 15 से 17 जून 2026 तक फ्रांस के एवियान में आयोजित हो रहा है। भारत को इसमें साझेदार देश के रूप में आमंत्रित किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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