जी-7 शिखर सम्मेलन: एवियन में PM मोदी का मैक्रों ने किया गर्मजोशी से स्वागत, भारत की 13वीं भागीदारी
सारांश
मुख्य बातें
फ्रांस के एवियन में 16 जून 2026 को जी-7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र से पहले फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाकर शुभकामनाएं दीं। यह जी-7 सम्मेलन में भारत की 13वीं भागीदारी है और मोदी लगातार सातवीं बार इस मंच पर देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
प्रधानमंत्री मोदी फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के व्यक्तिगत निमंत्रण पर एवियन पहुंचे। आउटरीच सत्र में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत अन्य जी-7 देशों के नेता भी भाग ले रहे हैं। एवियन पहुंचने पर मोदी ने एक्स पर लिखा, 'मेरे दोस्त राष्ट्रपति मैक्रों, एवियन में स्वागत के लिए आपका धन्यवाद।'
उन्होंने आगे कहा, 'जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए फ्रांस के एवियन पहुंच गया हूं। दुनिया के नेताओं के साथ बातचीत करने और महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने का इंतजार है। भारत एक ज़्यादा टिकाऊ और समृद्ध दुनिया के लिए मिलकर काम करने की कोशिशों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।'
जिनेवा में भी हुआ स्वागत
एवियन से पहले प्रधानमंत्री मोदी जिनेवा पहुंचे, जहां स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय पार्मेलीन ने हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से मुलाकात की और भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। जायसवाल ने एक्स पर लिखा कि दोनों नेताओं ने 'भारत-स्विट्जरलैंड साझेदारी को और मजबूत करने की बात दोहराई।'
शिखर सम्मेलन का एजेंडा
इस वर्ष फ्रांस की अध्यक्षता में हो रहे जी-7 सम्मेलन में कई अहम मुद्दों को प्राथमिकता दी गई है — आर्थिक असंतुलन को कम करना, ज़रूरी खनिज और आपूर्ति शृंखला को मजबूत बनाना, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, बड़े भू-राजनीतिक संकटों का समाधान, तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को सुरक्षित और तेज़ तरीके से लागू करना। प्रधानमंत्री मोदी सम्मेलन के दौरान कई देशों के नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे।
भारत की भूमिका और वैश्विक पहचान
विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने कहा कि जी-7 में भारत की लगातार भागीदारी यह दर्शाती है कि दुनिया भारत की भूमिका और योगदान को तेज़ी से स्वीकार रही है। उन्होंने कहा कि भारत ने जी-20 और 'वॉइस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट' जैसे मंचों की तरह ही जी-7 में भी विकासशील देशों की चिंताओं और ज़रूरतों को प्रमुखता से उठाया है। गौरतलब है कि भारत जी-7 का स्थायी सदस्य नहीं है, फिर भी इस मंच पर उसकी उपस्थिति वैश्विक कूटनीति में उसकी बढ़ती साख को रेखांकित करती है।
आगे का कार्यक्रम
एवियन में कार्यक्रम समाप्त होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी गुरुवार को पेरिस जाएंगे, जहां वे द्विपक्षीय बैठकों में भाग लेंगे और यूरोप के सबसे बड़े प्रौद्योगिकी व स्टार्टअप कार्यक्रम 'विवटेक' में शामिल होंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, मोदी पेरिस में भारतीय समुदाय को भी संबोधित कर सकते हैं।