जी-7 समिट: मोदी-ट्रंप की एवियन में मुलाकात, बुधवार को होगी द्विपक्षीय वार्ता
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार, 16 जून को फ्रांस के एवियन में आयोजित 52वें जी-7 शिखर सम्मेलन के एक आउटरीच सत्र से पूर्व संक्षिप्त मुलाकात की और परस्पर अभिवादन किया। दोनों नेता बुधवार, 17 जून को औपचारिक द्विपक्षीय बैठक करेंगे, जो ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों के बीच पहली सीधी मुलाकात होगी।
मुख्य घटनाक्रम
दोनों नेताओं ने जी-7 के 'नई साझेदारी बनाना और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को मज़बूत करना' विषयक सत्र से पहले हाथ मिलाए और संक्षिप्त बातचीत की। इस सत्र में जी-7 सदस्य देशों के साथ-साथ साझेदार देश, विश्व बैंक और अफ्रीकी विकास बैंक के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
इससे पहले फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री मोदी का एवियन पहुँचने पर गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेताओं ने गले मिलकर अभिवादन किया, जबकि राष्ट्रपति ट्रंप और अन्य जी-7 नेता भी उस अवसर पर उपस्थित थे।
द्विपक्षीय वार्ता का एजेंडा
बुधवार को होने वाली मोदी-ट्रंप द्विपक्षीय बैठक में आर्थिक विकास, सप्लाई चेन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), निवेश साझेदारी और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। व्हाइट हाउस के अनुसार, यह बैठक एक वर्किंग लंच से पहले होगी, जिसमें जी-7 नेता, आउटरीच पार्टनर और प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनियों के अधिकारी शामिल होंगे।
गौरतलब है कि यह बैठक पाकिस्तान के खिलाफ हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों नेताओं के बीच पहली औपचारिक द्विपक्षीय मुलाकात होगी, जिससे इसका रणनीतिक महत्व और बढ़ जाता है।
भारत की जी-7 में भूमिका
भारत को 52वें जी-7 शिखर सम्मेलन में साझेदार देश के रूप में आमंत्रित किया गया है, जो 15 से 17 जून तक एवियन में आयोजित हो रहा है। यह जी-7 में भारत की 13वीं भागीदारी है और प्रधानमंत्री मोदी की इसमें लगातार 7वीं उपस्थिति।
एवियन पहुँचने पर प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'जी-7 समिट के लिए एवियन, फ्रांस पहुंच गया हूं। दुनिया के नेताओं के साथ बातचीत करने और महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर विचार साझा करने को लेकर उत्सुक हूं। भारत एक ज़्यादा टिकाऊ और समृद्ध दुनिया के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।'
आउटरीच सत्रों का एजेंडा
विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, 16 और 17 जून के आउटरीच सत्रों में अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को मज़बूत करने, विकास सहयोग बढ़ाने, संतुलित आर्थिक विकास और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी इन सत्रों में भारत और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाएंगे।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि जी-7 में भारत की निरंतर भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि शांति, सुरक्षा, विकास और पर्यावरण जैसे वैश्विक मुद्दों के समाधान में भारत की भूमिका को अंतरराष्ट्रीय समुदाय में बढ़ती मान्यता मिल रही है। भारत इससे पहले जी-20 और 'वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट' जैसे मंचों पर भी विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को सशक्त रूप से उठाता रहा है।
आगे क्या होगा
बुधवार को होने वाली द्विपक्षीय वार्ता के नतीजे भारत-अमेरिका संबंधों की नई दिशा तय कर सकते हैं, विशेषकर व्यापार, तकनीक और रक्षा सहयोग के क्षेत्र में। शिखर सम्मेलन 17 जून को समाप्त होगा।