PM मोदी फ्रांस के एवियन में जी7 शिखर सम्मेलन में शामिल, ट्रंप से 17 जून को द्विपक्षीय वार्ता तय
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार, 17 जून 2025 को फ्रांस के एवियन में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने पहुँचे। यह उनके दो देशों के दौरे का तीसरा और अंतिम पड़ाव है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एवियन में उनका औपचारिक स्वागत किया।
शिखर सम्मेलन में भारत की भूमिका
पीएम मोदी 'नई साझेदारी और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को फिर से बनाना' विषय पर आयोजित एक प्रमुख कार्यकारी सत्र में हिस्सा लेंगे। इस सत्र में जी7 देशों के शासनाध्यक्षों के साथ-साथ साझेदार देशों और विश्व बैंक तथा अफ्रीकी विकास बैंक जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के प्रतिनिधि एकत्रित होंगे। चर्चा का केंद्र अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने, वैश्विक आर्थिक चुनौतियों से निपटने और सतत विकास को गति देने पर रहने की उम्मीद है।
महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें
समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी कई देशों के नेताओं से अलग-अलग द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इनमें कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ बैठकें शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी 17 जून को शिखर सम्मेलन के दौरान एक औपचारिक द्विपक्षीय बैठक करेंगे। अमेरिकी सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, दोनों नेताओं से प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर वार्ता की प्रगति की समीक्षा करने की उम्मीद है — जो दोनों देशों के बीच पहला औपचारिक व्यापार समझौता बन सकता है। बाद में, मोदी राष्ट्रपति मैक्रों द्वारा आयोजित गाला डिनर में भी शामिल होंगे।
भारत की जी7 में बढ़ती उपस्थिति
गौरतलब है कि इस वर्ष जी7 में भारत की यह 13वीं भागीदारी है और पीएम मोदी लगातार सातवीं बार इस शिखर सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, "जी7 शिखर सम्मेलन में भारत का लगातार हिस्सा लेना, शांति, सुरक्षा, विकास और पर्यावरण की स्थिरता से जुड़ी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में भारत की भूमिका और योगदान की बढ़ती पहचान दिखाता है।" मंत्रालय ने यह भी रेखांकित किया कि जी7, जी20 और वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट जैसे मंचों पर भारत ने ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं और विकास की आकांक्षाओं को लगातार सबसे आगे रखा है।
आगे क्या
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत-अमेरिका व्यापार संबंध एक निर्णायक मोड़ पर हैं और ग्लोबल साउथ की आवाज़ को बहुपक्षीय मंचों पर अधिक प्रतिनिधित्व दिलाने की माँग तेज़ हो रही है। एवियन से लौटने के बाद भारतीय कूटनीति के अगले कदमों पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।