जी7 शिखर सम्मेलन: PM मोदी फ्रांस के एवियन पहुंचे, वैश्विक सहयोग और सतत भविष्य पर देंगे जोर
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16 जून को 52वें जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए फ्रांस के रिसॉर्ट शहर एवियां-ले-बैंस पहुंचे। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा सोमवार को औपचारिक रूप से उद्घाटन किए गए इस तीन दिवसीय समिट में भारत वैश्विक आर्थिक, राजनीतिक और पर्यावरणीय चुनौतियों पर अपनी भूमिका रेखांकित करने के लिए तैयार है।
एवियन आगमन और एक्स पर मोदी का संदेश
एवियन पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने आगमन की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि वे विश्व नेताओं के साथ मुलाकात और वैश्विक महत्व के प्रमुख मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने के लिए उत्सुक हैं। मोदी ने स्पष्ट किया, 'भारत एक अधिक सतत और समृद्ध भविष्य के लिए सामूहिक वैश्विक प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।'
जिनेवा में स्विस राष्ट्रपति से मुलाकात
प्रधानमंत्री स्लोवाकिया से जिनेवा होते हुए एवियन पहुंचे। जिनेवा हवाईअड्डे पर स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय पारमेलिन ने उनका स्वागत किया। मोदी ने एक्स पर लिखा, 'एयरपोर्ट पर मैं स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति से मिला और हम दोनों के बीच अच्छी बातचीत हुई।' विदेश मंत्रालय ने इस मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए बताया कि दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से अभिवादन किया और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।
समिट में कौन-कौन से नेता शामिल
तीन दिवसीय इस शिखर सम्मेलन में सबसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहुंचे। इसके बाद जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्त्ज, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची समेत कई विश्वस्तरीय नेता एवियन पहुंचे। यह समिट दुनिया की प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं और आमंत्रित साझेदार देशों को एक मंच पर लाता है।
किन मुद्दों पर होगी चर्चा
इस समिट में अमेरिका-ईरान शांति समझौते के साथ-साथ वैश्विक सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और जलवायु परिवर्तन से जुड़े बड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श होने की उम्मीद है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार तनाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितता चरम पर है।
यूरोप यात्रा का अंतिम पड़ाव
प्रधानमंत्री मोदी की यह यूरोप यात्रा का आखिरी चरण है। इससे पहले उन्होंने स्लोवाकिया का दो दिवसीय दौरा पूरा किया, जिसे उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने वाला बताया। एवियन में जी7 की बैठकों के बाद भारत की वैश्विक कूटनीतिक सक्रियता का यह दौर और स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आएगा।