कर्नाटक में गारंटी योजनाओं की निगरानी को नई ताकत: 5,927 पंचायतों में 35,562 सदस्यों की होगी नियुक्ति
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक सरकार ने 16 सितंबर 2026 को अपनी पाँचों गारंटी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। सरकार ने राज्य के 5,927 ग्राम पंचायतों और समस्त वार्डों में 6 सदस्यीय गारंटी कमेटियों के गठन का आदेश जारी किया है, जिससे कुल 35,562 सदस्यों की नियुक्ति होगी। ये कमेटियाँ योजनाओं की पहुँच सुनिश्चित करने और लाभार्थियों की समस्याएँ सुनने का काम करेंगी।
कमेटियों की संरचना और आरक्षण
प्रत्येक कमेटी में सदस्यों की नियुक्ति आरक्षण के नियमों के अनुसार तय की गई है। हर 6 सदस्यीय कमेटी में 1 सदस्य अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (SC/ST) वर्ग से, 1 सदस्य अल्पसंख्यक समुदाय से, 2 महिलाएँ, 1 सदस्य अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से और 1 सदस्य सामान्य वर्ग से होगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी क्षेत्र में अल्पसंख्यक वर्ग का सदस्य उपलब्ध नहीं होता, तो उस स्थान पर सामान्य वर्ग के सदस्य को नियुक्त किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि इन कमेटी सदस्यों को कोई मानदेय या वेतन नहीं दिया जाएगा।
कमेटियों की भूमिका और कार्य
गाँव और वार्ड स्तर पर गठित ये कमेटियाँ यह सुनिश्चित करेंगी कि सरकार की पाँचों गारंटी योजनाओं का लाभ सही लाभार्थियों तक पहुँच रहा है या नहीं। इसके अलावा, ये कमेटियाँ स्थानीय नागरिकों की समस्याएँ सुनकर उन्हें उचित मंच तक पहुँचाने का काम भी करेंगी।
सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ेगी और जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र मजबूत होगा। यह कदम बेंगलुरु से जारी आदेश के तहत पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।
राजनीतिक संदर्भ और विपक्ष की नज़र
यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में स्थानीय निकाय, जिला पंचायत और तालुक पंचायत चुनाव निकट हैं। आलोचकों का कहना है कि कमेटियों के गठन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की प्रमुख भूमिका रहने की संभावना है, जो इसे एक प्रशासनिक के साथ-साथ राजनीतिक कदम भी बनाता है।
गौरतलब है कि बिना किसी वेतन के स्वयंसेवी आधार पर काम करने वाली ऐसी कमेटियाँ पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने का भी एक माध्यम बन सकती हैं। राज्य सरकार इसे शासन-सुधार के रूप में प्रस्तुत कर रही है, जबकि विपक्ष इस पर सवाल उठा सकता है।
आगे क्या होगा
कमेटियों के गठन की प्रक्रिया को सरकार ने अधिकृत कर दिया है और नियुक्तियाँ शीघ्र शुरू होने की उम्मीद है। एक बार कमेटियाँ कार्यशील हो जाने के बाद यह देखना अहम होगा कि निगरानी तंत्र किस हद तक स्वतंत्र रूप से काम करता है और योजनाओं की जवाबदेही वास्तव में बढ़ती है या यह व्यवस्था केवल कागज़ों तक सीमित रह जाती है।