कांग्रेस की गारंटी योजनाओं से कर्नाटक दिवालियेपन की कगार पर: कुमारस्वामी की चेतावनी
सारांश
Key Takeaways
- केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने 24 अप्रैल को मैसूर में कांग्रेस की गारंटी योजनाओं को कर्नाटक की आर्थिक बर्बादी का जिम्मेदार ठहराया।
- कर्नाटक पर कुल ₹7.26 लाख करोड़ का कर्ज है, जिससे प्रत्येक नागरिक पर ₹1 लाख का बोझ है।
- कुमारस्वामी ने श्रीलंका के 2022 के आर्थिक संकट से तुलना करते हुए चेतावनी दी।
- हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार पर भी वेतन संकट और आर्थिक कुप्रबंधन के आरोप लगाए।
- 'गृह लक्ष्मी' योजना के तहत ₹2,000 की नकद सहायता की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए।
- कुमारस्वामी ने राज्य सरकार को किसी भी सार्वजनिक मंच पर खुली बहस की चुनौती दी।
मैसूर, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने गुरुवार को कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि गारंटी योजनाओं ने राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ तोड़ दी है। उन्होंने चेताया कि यदि यही हाल रहा तो कर्नाटक भी श्रीलंका जैसे आर्थिक दिवालियेपन की राह पर चल पड़ेगा।
₹7.26 लाख करोड़ के कर्ज तले दबा कर्नाटक
कुमारस्वामी ने कहा कि कर्नाटक सरकार पर अब तक 7.26 लाख करोड़ रुपए का कर्ज जमा हो चुका है। इसका सीधा अर्थ यह है कि राज्य के 6.3 करोड़ नागरिकों में से प्रत्येक पर कम से कम एक लाख रुपए का कर्ज बोझ आ गया है।
उन्होंने सवाल उठाया कि 'गृह लक्ष्मी' जैसी योजनाओं के तहत महिलाओं को दिए जाने वाले 2,000 रुपए से किसी परिवार का गुजारा कैसे होगा, जबकि बढ़ती महंगाई और बढ़े हुए करों ने आम परिवारों की वास्तविक आय को पहले ही निचोड़ दिया है।
श्रीलंका और हिमाचल की तुलना — बड़ी चेतावनी
मैसूर में मंदिर उद्घाटन कार्यक्रमों के बाद मीडिया से बातचीत में कुमारस्वामी ने श्रीलंका के 2022 के आर्थिक संकट का उदाहरण देते हुए कहा कि अर्थव्यवस्था के कुप्रबंधन का अंजाम क्या होता है, यह दुनिया देख चुकी है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक उसी रास्ते पर है।
उन्होंने हिमाचल प्रदेश का भी उल्लेख किया, जहां कांग्रेस सरकार गारंटी के वादों पर सत्ता में आई और अब उस राज्य की आर्थिक स्थिति गंभीर बताई जाती है। मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि हिमाचल में मुख्य सचिव सहित अधिकारियों के वेतन में कटौती की नौबत आ गई है।
सरकार को खुली बहस की चुनौती
कुमारस्वामी ने राज्य सरकार को खुले मंच पर बहस की चुनौती देते हुए कहा कि यदि कर्नाटक सरकार में हिम्मत है तो वह इन आरोपों पर सार्वजनिक चर्चा के लिए सामने आए। उन्होंने कहा कि वे किसी भी मंच पर इन तथ्यों को साबित करने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि गारंटी योजनाओं के बोझ से राज्य का खजाना इस कदर रिक्त हो गया है कि सरकार अपने कर्मचारियों को समय पर वेतन देने में भी असमर्थ हो रही है — जो किसी भी सरकार की प्रशासनिक विफलता का सबसे बड़ा संकेत है।
मंदिर उद्घाटन में भागीदारी
कुमारस्वामी ने बसावनपुरा, गेरादादा और केंचनहल्ली गांवों में श्री मेलानकाट्टे गणपति मंदिर के उद्घाटन में भाग लिया। इसके साथ ही होसाहागराहारा में श्री बसवेश्वर स्वामी मंदिर के गोपुरम उद्घाटन और प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में भी शामिल हुए।
इस अवसर पर पूर्व मंत्री एस.आर. महेश भी उनके साथ उपस्थित रहे। कुमारस्वामी ने कहा कि प्रकृति की गोद में स्थित यह मंदिर आत्मिक शांति और भक्तिभाव का अनुभव कराता है।
गहरा विश्लेषण — गारंटी राजनीति का असली चेहरा
गौरतलब है कि 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने पाँच गारंटियों — अन्न भाग्य, गृह लक्ष्मी, गृह ज्योति, युवा निधि और शक्ति — के दम पर प्रचंड बहुमत हासिल किया था। इन योजनाओं पर सालाना अनुमानित 50,000 से 60,000 करोड़ रुपए का खर्च बताया जाता है।
विरोधाभास यह है कि कर्नाटक देश के सबसे अधिक राजस्व संग्रह करने वाले राज्यों में से एक है — बेंगलुरु अकेले देश के IT निर्यात का बड़ा हिस्सा उत्पन्न करता है — फिर भी राजकोषीय दबाव की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। यह सवाल उठाता है कि क्या समस्या केवल गारंटी योजनाओं की है या राजस्व प्रबंधन और प्राथमिकताओं की भी।
आने वाले महीनों में कर्नाटक के बजट और राजकोषीय घाटे के आंकड़े इस बहस की दिशा तय करेंगे। साथ ही, 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा राजनीतिक रूप से और गर्म होने की संभावना है।