सीईसी ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग की तैयारी: BJP बोली — 'संवैधानिक संस्थाओं पर हमला कांग्रेस की पुरानी आदत'
सारांश
मुख्य बातें
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष द्वारा महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी को लेकर नई दिल्ली में सियासी पारा 25 सितंबर 2026 को चढ़ गया। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े विवाद की पृष्ठभूमि में आई इस खबर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने विपक्ष — विशेषकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) — पर संवैधानिक संस्थाओं को लगातार निशाना बनाने का आरोप लगाया।
महाभियोग प्रस्ताव की पृष्ठभूमि
विपक्षी दल SIR प्रक्रिया को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यशैली पर सवाल उठाते रहे हैं। इसी क्रम में महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी की खबरें सामने आई हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश में विभिन्न राज्यों के चुनावों को लेकर राजनीतिक तनाव पहले से ही ऊँचा है। गौरतलब है कि भारतीय संविधान में मुख्य चुनाव आयुक्त को महाभियोग के ज़रिये हटाने का प्रावधान है, लेकिन ऐसा प्रस्ताव पारित करने के लिए संसद में विशेष बहुमत आवश्यक है।
BJP नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया
बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए कहा, 'यह प्रस्ताव गिर जाएगा। यह पहली बार नहीं है जब महाभियोग प्रस्ताव लाया जा रहा है। पहले भी कई लोगों के खिलाफ ऐसे प्रस्ताव लाए गए हैं लेकिन विपक्ष को हर बार हार का सामना करना पड़ा है। इस बार भी उन्हें निराशा ही हाथ लगेगी।'
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने कहा कि विपक्ष — खासकर कांग्रेस — राष्ट्रीय और संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करने का कोई भी अवसर नहीं छोड़ती। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने कई बार भारतीय सेना की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं और कई अवसरों पर देश के सर्वोच्च न्यायालय पर भी प्रश्नचिन्ह लगाए हैं। संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना उनकी पुरानी प्रवृत्ति रही है।'
BJP विधायक का विपक्ष पर हमला
BJP विधायक विक्रम रंधावा ने विपक्ष के इस कदम को 'पूरी तरह से बेबुनियाद' करार दिया। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस के पास करने के लिए कोई ठोस काम नहीं बचा है, इसलिए वे कोई न कोई आधारहीन मुद्दा उठाकर उसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं। पहले आप लगातार चुनाव हारते रहे, ईवीएम को दोष देते रहे। जब ईवीएम का मुद्दा नहीं चला, तो अब मुख्य चुनाव आयुक्त को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश हो रही है।' रंधावा ने यह भी कहा कि उन्हें विश्वास है कि केंद्र सरकार इस मामले के हर पहलू पर बारीकी से नज़र रख रही है।
विपक्ष के आरोप और चुनाव आयोग की स्थिति
विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और इससे मतदाता सूचियों की शुद्धता प्रभावित हो सकती है। हालाँकि, चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह पहली बार नहीं है जब किसी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग की चर्चा हुई हो — अतीत में भी ऐसे प्रयास संसद में बहुमत के अभाव में विफल रहे हैं।
आगे क्या होगा
महाभियोग प्रस्ताव को संसद में पारित कराने के लिए विपक्ष को विशेष बहुमत की ज़रूरत होगी, जो वर्तमान संसदीय संख्या-बल के हिसाब से कठिन मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम व्यावहारिक परिणाम से अधिक राजनीतिक संदेश देने का प्रयास हो सकता है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर बहस और तेज होने की संभावना है।