दुर्गा पूजा पास घोटाला: बंगाल के पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन 13 दिन की पुलिस हिरासत में भेजे गए
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता की एक निचली अदालत ने 29 अक्टूबर 2026 को पश्चिम बंगाल के पूर्व पर्यटन मंत्री एवं सूचना व संस्कृति मामलों के पूर्व राज्य मंत्री इंद्रनील सेन को 13 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। कोलकाता पुलिस ने उन पर यूनेस्को-मान्यता प्राप्त उत्सव टूर से जुड़े कथित फर्जी दुर्गा पूजा पास घोटाले में शामिल होने का आरोप लगाया है। बुधवार को साल्ट लेक स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ED) कार्यालय में लंबी पूछताछ के बाद बाहर निकलते ही उन्हें गिरफ्तार किया गया था।
मामले का पूरा घटनाक्रम
गायक से राजनेता बने इंद्रनील सेन को 28 अक्टूबर को कोलकाता पुलिस ने हिरासत में लिया। गुरुवार को उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहाँ सरकारी वकील अभिजीत चट्टोपाध्याय ने 13 दिन की पुलिस हिरासत की माँग की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने यह माँग स्वीकार कर ली। गिरफ्तारी के बाद सेन से लालबाजार स्थित कोलकाता पुलिस मुख्यालय में कई घंटों तक पूछताछ की गई।
अभियोजन पक्ष के आरोप
सरकारी वकील चट्टोपाध्याय ने अदालत को बताया कि 2025 में सेन की पत्नी मधुछंदा सेन के स्वामित्व वाली संस्था 'मास आर्ट सोसाइटी' ने यूनेस्को के साथ एक समझौता किया था। कथित तौर पर 2022 से 2025 के बीच इस संस्था ने व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए यूनेस्को के नाम और लोगो का इस्तेमाल करते हुए दुर्गा पूजा टूर पैकेज की मार्केटिंग और बिक्री की, जबकि यूनेस्को के नियमों के अनुसार उसके लोगो का व्यावसायिक उपयोग वर्जित है।
अभियोजन पक्ष ने यह भी कहा कि जिस दिन 'मास आर्ट सोसाइटी' के खाते में धनराशि जमा हुई, उसी दिन पूर्व मंत्री के बैंक खाते में भी धनराशि स्थानांतरित की गई। इसके अतिरिक्त, तीन गवाहों के दर्ज बयानों के अनुसार सेन इन कथित अनियमितताओं में सीधे तौर पर संलिप्त थे।
बचाव पक्ष की दलीलें
सेन के वकील ने जमानत की माँग करते हुए तर्क दिया कि दुर्गा पूजा पास की बिक्री में उनके मुवक्किल की कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि जाँच के दौरान सामने आई 'मास आर्ट सोसाइटी' या किसी अन्य संस्था से सेन का कोई प्रत्यक्ष संबंध साबित नहीं होता। बचाव पक्ष ने सेन पर लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया।
जाँच का दायरा और एजेंसियाँ
यूनेस्को के नाम से जुड़े इस कथित दुर्गा पूजा पास घोटाले की जाँच कोलकाता पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ED) दोनों अलग-अलग कर रहे हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार जाँच का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि इस कथित घोटाले में और कौन-से लोग शामिल हो सकते हैं, जिसके लिए सेन से विस्तृत पूछताछ आवश्यक मानी गई।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्तारूढ़ दल के खिलाफ आरोपों की श्रृंखला जारी है। 13 दिन की हिरासत के दौरान पुलिस अन्य संभावित आरोपियों की तलाश करेगी और वित्तीय लेनदेन की और गहराई से जाँच करेगी। अगली सुनवाई में अदालत हिरासत की स्थिति पर पुनर्विचार कर सकती है।