17 अक्टूबर 2026
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इंद्रनील सेन ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की अग्रिम जमानत याचिका, ₹60 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED की जाँच जारी

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इंद्रनील सेन ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की अग्रिम जमानत याचिका, ₹60 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED की जाँच जारी

सारांश

गायक से नेता बने इंद्रनील सेन अब सुप्रीम कोर्ट की शरण में हैं — कलकत्ता उच्च न्यायालय से झटका मिलने के बाद। ₹60 करोड़ के UNESCO दुर्गा पूजा पास घोटाले में ED की जाँच तेज़ है और ममता बनर्जी का नाम भी इसमें आ चुका है, जिससे यह मामला राजनीतिक रूप से और संवेदनशील हो गया है।

मुख्य बातें

पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन ने 17 अक्टूबर 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दायर की।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 15 अक्टूबर को न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की एकल पीठ ने याचिका खारिज की थी।
ED यूनेस्को टैग का दुरुपयोग कर फर्ज़ी दुर्गा पूजा पास बेचने के कथित ₹60 करोड़ के मामले की जाँच कर रहा है।
ED के अनुसार, सेन की कंपनी ऑक्टेव रिकॉर्ड्स से ₹30 लाख बैंकिंग चैनलों से ममता बनर्जी को हस्तांतरित हुए; सेन ने इसे रॉयल्टी बताया।
राज्य के न्यायिक जाँच आयोग ने सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग में अनियमितताओं की अलग जाँच शुरू की।
सुप्रीम कोर्ट अगले सप्ताह बंद रहेगा; उसके बाद ही सुनवाई होने की संभावना।

पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री और गायक-से-राजनेता बने इंद्रनील सेन ने शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दायर की, क्योंकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की जा रही मनी लॉन्ड्रिंग जाँच में उन्हें गिरफ्तारी का अंदेशा है। यह कदम कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल-न्यायाधीश पीठ द्वारा उनकी समान याचिका खारिज किए जाने के महज दो दिन बाद आया है।

मामले की पृष्ठभूमि

सेन और उनकी पत्नी मधुचंदा सेन पर आरोप है कि उन्होंने यूनेस्को के टैग का दुरुपयोग कर दुर्गा पूजा यात्राओं के फर्ज़ी पास बेचे। इस कथित घोटाले की कुल रकम का प्रारंभिक अनुमान लगभग ₹60 करोड़ रखा गया है। बो बाज़ार थाने में शिकायत दर्ज होने के बाद कोलकाता पुलिस ने जाँच शुरू की, जिसके बाद ED ने प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) दर्ज कर अपनी स्वतंत्र जाँच का दायरा बढ़ाया।

ED की छापेमारी और पूछताछ

पिछले महीने ED ने इंद्रनील सेन के आवास, उनके कुछ रिश्तेदारों के परिसरों और मामले से जुड़े एक इवेंट मैनेजर के कार्यालय सहित कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। एजेंसी ने अपनी जाँच के तहत सेन से दो बार पूछताछ भी की है। इस महीने की शुरुआत में ED ने एक बयान में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम भी लिया — एजेंसी के अनुसार, सेन की कंपनी ऑक्टेव रिकॉर्ड्स के खातों से बैंकिंग चैनलों के ज़रिए लगभग ₹30 लाख बनर्जी को हस्तांतरित किए गए थे। हालाँकि, सेन का दावा है कि यह भुगतान रॉयल्टी के रूप में था।

अदालती प्रक्रिया का क्रम

गिरफ्तारी की आशंका से सेन ने सबसे पहले कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख किया। 15 अक्टूबर 2026 को न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की एकल पीठ के समक्ष सुनवाई हुई, जिन्होंने याचिका खारिज कर दी। चूँकि अगले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट बंद रहेगा, इस मामले की सुनवाई अदालत खुलने के बाद होने की संभावना है।

न्यायिक जाँच आयोग की समानांतर जाँच

ED की जाँच से अलग, पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा गठित न्यायिक जाँच आयोग ने भी सेन से संबंधित एक अलग जाँच शुरू की है। यह आयोग राज्य के सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग की निविदा प्रक्रिया में कथित तौर पर करोड़ों रुपए की अनियमितताओं की पड़ताल कर रहा है — वह विभाग जहाँ सेन राज्य मंत्री के रूप में कार्यरत थे। गौरतलब है कि यह आयोग तृणमूल कांग्रेस के पूर्व शासनकाल में संस्थागत भ्रष्टाचार की जाँच के लिए गठित किया गया था।

आगे क्या होगा

सुप्रीम कोर्ट के अवकाश के बाद जैसे ही पीठ बैठेगी, सेन की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई अपेक्षित है। यदि सर्वोच्च न्यायालय भी याचिका खारिज करता है, तो ED के पास गिरफ्तारी का रास्ता खुल जाएगा। इस मामले में ममता बनर्जी के नाम का उल्लेख राजनीतिक रूप से संवेदनशील है और यह पश्चिम बंगाल की राजनीति को नया मोड़ दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

भले ही अभी यह केवल एक लेन-देन के संदर्भ में हो। असली सवाल यह है कि क्या समानांतर चल रही दो जाँचें — केंद्रीय एजेंसी और राज्य आयोग — एक-दूसरे के साक्ष्य को पुष्ट करेंगी या अदालतों में टकराएँगी। सुप्रीम कोर्ट का रुख सेन के लिए अंतिम कानूनी ढाल है; यदि वहाँ भी राहत नहीं मिली, तो ED की गिरफ्तारी से राज्य की सियासत में नया तूफान आना तय है।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंद्रनील सेन पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला क्या है?
इंद्रनील सेन और उनकी पत्नी मधुचंदा सेन पर यूनेस्को के टैग का दुरुपयोग कर दुर्गा पूजा यात्राओं के फर्ज़ी पास बेचने का आरोप है, जिसकी कथित रकम लगभग ₹60 करोड़ है। बो बाज़ार थाने में शिकायत के बाद कोलकाता पुलिस और फिर ED ने जाँच शुरू की।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सेन की अग्रिम जमानत याचिका क्यों खारिज की?
न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की एकल पीठ ने 15 अक्टूबर 2026 को सुनवाई के बाद याचिका खारिज कर दी। खारिज करने के विस्तृत कारण अभी सार्वजनिक नहीं हुए हैं, लेकिन इसके बाद ही सेन ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया।
ED ने ममता बनर्जी का नाम इस मामले में क्यों लिया?
ED के अनुसार, सेन की कंपनी ऑक्टेव रिकॉर्ड्स के खातों से बैंकिंग चैनलों के ज़रिए लगभग ₹30 लाख ममता बनर्जी को हस्तांतरित हुए। हालाँकि सेन का कहना है कि यह भुगतान रॉयल्टी के रूप में किया गया था; ED ने इसे अपनी जाँच के तहत रेखांकित किया है।
सुप्रीम कोर्ट में सेन की याचिका पर सुनवाई कब होगी?
अगले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट बंद रहेगा, इसलिए सुनवाई उसके बाद ही होने की संभावना है। यदि सर्वोच्च न्यायालय राहत नहीं देता, तो ED के लिए गिरफ्तारी का रास्ता खुल जाएगा।
न्यायिक जाँच आयोग की जाँच ED की जाँच से किस तरह अलग है?
राज्य सरकार द्वारा गठित न्यायिक जाँच आयोग TMC शासनकाल के संस्थागत भ्रष्टाचार की जाँच के लिए है और वह सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग की निविदा प्रक्रिया में करोड़ों की अनियमितताओं की पड़ताल कर रहा है। ED की जाँच मनी लॉन्ड्रिंग के केंद्रीय क़ानून (PMLA) के तहत है और दोनों समानांतर चल रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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