29 सितंबर 2026
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ईडी की पश्चिम बंगाल में बड़ी छापेमारी: पूर्व पर्यटन मंत्री इंद्रनील सेन के 10 ठिकानों पर मनी लॉन्ड्रिंग जांच

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ईडी की पश्चिम बंगाल में बड़ी छापेमारी: पूर्व पर्यटन मंत्री इंद्रनील सेन के 10 ठिकानों पर मनी लॉन्ड्रिंग जांच

सारांश

पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन के खिलाफ ईडी की यह कार्रवाई किसी साधारण छापेमारी से बढ़कर है — यूनेस्को की सांस्कृतिक विरासत की मान्यता को कथित तौर पर व्यावसायिक धोखाधड़ी का ज़रिया बनाना और तीन सालों में 61,000 लोगों तक इसका दायरा फैलाना, इसे बंगाल के हालिया घोटालों में एक अलग श्रेणी में रखता है।

मुख्य बातें

ईडी ने 29 सितंबर 2026 को कोलकाता में पूर्व पर्यटन मंत्री इंद्रनील सेन के 10 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
आरोप है कि यूनेस्को के नाम और लोगो का अनधिकृत उपयोग कर दुर्गा पूजा 'प्रीव्यू शो' के फर्जी पास ₹1,749 से ₹5,499 तक में बेचे गए।
कथित हेराफेरी की अनुमानित राशि ₹60 करोड़ बताई जा रही है।
पास खरीदारों की संख्या 2022 में 19,000 से बढ़कर 2024 में 61,000 तक पहुँची।
मामले में जून 2026 में बौबाजार पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज हुई थी; अब ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग जाँच अपने हाथ में ली है।
सेन की पत्नी मधुचंदा सेन और 'मास आर्ट' संस्था भी आरोपों के दायरे में हैं।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार, 29 सितंबर 2026 की सुबह पश्चिम बंगाल के पूर्व पर्यटन मंत्री इंद्रनील सेन के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया। कोलकाता में एक साथ 10 ठिकानों पर छापेमारी की गई, जिसमें दक्षिण कोलकाता के कस्बा स्थित पूर्व मंत्री का आवास भी शामिल है। इस मामले में कथित तौर पर यूनेस्को के नाम का दुरुपयोग कर दुर्गा पूजा टूर पास की अवैध बिक्री और करीब ₹60 करोड़ की हेराफेरी का आरोप है।

मुख्य घटनाक्रम

ईडी की अलग-अलग टीमें मंगलवार सुबह कोलकाता के हिंदुस्तान पार्क, हाईलैंड पार्क सहित कई इलाकों में एक साथ पहुँचीं। हाईलैंड पार्क में जिस परिसर की तलाशी ली जा रही है, वह एक इवेंट मैनेजमेंट से जुड़े कारोबारी का घर बताया जा रहा है। इसके अलावा, कार्रवाई में पूर्व मंत्री के रिश्तेदारों के आवास भी शामिल हैं।

गायक से राजनेता बने इंद्रनील सेन पर आरोप है कि उन्होंने अपनी पत्नी मधुचंदा सेन के साथ मिलकर 'मास आर्ट' नामक संस्था के ज़रिए यूनेस्को के नाम और लोगो का अनधिकृत उपयोग कर दुर्गा पूजा 'प्रीव्यू शो' के फर्जी पास बेचे। इन पासों की कीमत कथित तौर पर ₹1,749 से लेकर ₹5,499 तक रखी गई थी।

मामले की पृष्ठभूमि

इस मामले में जून 2026 में बौबाजार पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई थी। यह शिकायत अंतरराष्ट्रीय संगठन की ओर से जयदीप मुखर्जी ने इंद्रनील सेन, उनकी पत्नी मधुचंदा सेन और 'मास आर्ट' संस्था के खिलाफ दर्ज कराई थी।

गौरतलब है कि कोलकाता की दुर्गा पूजा को 2021 में यूनेस्को की 'अमूर्त सांस्कृतिक विरासत' की मान्यता मिली थी। इस मान्यता के छह महीने के भीतर ही 'मास आर्ट' संस्था का गठन किया गया और इसने खुद को यूनेस्को का 'आधिकारिक भागीदार' बताना शुरू कर दिया। हालाँकि जाँच में अब तक इस दावे में कोई सच्चाई नहीं मिली है।

संस्था ने दावा किया था कि यूनेस्को ने 24 पूजा पंडालों का चयन किया है, लेकिन इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। आरोप है कि इन्हीं 24 कथित 'यूनेस्को चयनित' पंडालों के 'प्रीव्यू शो' पास के नाम पर बड़े पैमाने पर धनराशि का गबन किया गया।

आंकड़े और वित्तीय पहलू

शुरुआती जाँच में पता चला है कि पास खरीदने वाले पंजीकृत लोगों की संख्या हर साल तेज़ी से बढ़ती रही — 2022 में करीब 19,000, 2023 में 34,000 और 2024 में 61,000 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया। सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले में कुल हेराफेरी का अनुमान फिलहाल करीब ₹60 करोड़ लगाया जा रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में केंद्रीय जाँच एजेंसियों और राज्य सरकार के बीच तनाव का दौर चल रहा है। आलोचकों का कहना है कि इस मामले से सांस्कृतिक आयोजनों की आड़ में वित्तीय अनियमितताओं का एक नया पहलू सामने आया है।

जाँच की स्थिति

इस मामले की प्रारंभिक जाँच कोलकाता पुलिस ने शुरू की थी, लेकिन बाद में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से अपनी स्वतंत्र जाँच शुरू की। यह पहला मौका नहीं है जब ईडी ने बंगाल में किसी पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता के खिलाफ इस प्रकार की कार्रवाई की हो — राज्य में पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं।

मंगलवार तक इंद्रनील सेन या उनके परिजनों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ईडी की जाँच जारी है और आने वाले दिनों में गिरफ्तारी या समन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यूनेस्को जैसी प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्था के ब्रांड की आड़ में आम लोगों को ठगने की कथित सुनियोजित योजना है — और यही इसे बंगाल के अन्य भ्रष्टाचार मामलों से अलग करता है। तीन वर्षों में 19,000 से 61,000 तक पहुँचने वाली पंजीकरण संख्या बताती है कि यह संभवतः एक संगठित और बढ़ता हुआ नेटवर्क था। असली सवाल यह है कि कोलकाता पुलिस ने जून में शिकायत मिलने के बाद मामले में कितनी तेज़ी दिखाई, और ईडी को अलग से हस्तक्षेप क्यों करना पड़ा। जब तक अदालत में आरोप साबित नहीं होते, सभी आरोप कथित हैं — लेकिन सवाल यह भी है कि राज्य में सांस्कृतिक आयोजनों के नाम पर वित्तीय पारदर्शिता की जवाबदेही कौन तय करेगा।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंद्रनील सेन के खिलाफ ईडी की छापेमारी किस मामले में हुई है?
ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में यह कार्रवाई की है, जिसमें आरोप है कि पूर्व पर्यटन मंत्री इंद्रनील सेन और उनकी पत्नी मधुचंदा सेन ने यूनेस्को के नाम व लोगो का अनधिकृत इस्तेमाल कर कोलकाता दुर्गा पूजा के फर्जी 'प्रीव्यू शो' पास बेचे। इस मामले में कथित तौर पर ₹60 करोड़ की हेराफेरी का अनुमान है।
यूनेस्को के नाम से फर्जी पास बेचने का मामला क्या है?
'मास आर्ट' नामक संस्था ने खुद को कोलकाता दुर्गा पूजा का यूनेस्को 'आधिकारिक भागीदार' बताकर 24 पूजा पंडालों के 'प्रीव्यू शो' पास ₹1,749 से ₹5,499 तक में बेचे। आरोप है कि यूनेस्को से कोई आधिकारिक संबंध नहीं था और ये दावे झूठे थे।
इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
जून 2026 में बौबाजार पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज हुई थी, जिसके बाद कोलकाता पुलिस ने प्रारंभिक जाँच शुरू की। बाद में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के कोण से अपनी स्वतंत्र जाँच शुरू की और 29 सितंबर 2026 को कोलकाता में 10 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
कितने लोग इस कथित घोटाले से प्रभावित हुए?
शुरुआती जाँच के अनुसार, 2022 में 19,000, 2023 में 34,000 और 2024 में 61,000 लोगों ने इन पासों के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था। यानी तीन वर्षों में कुल एक लाख से अधिक लोग इस कथित धोखाधड़ी के दायरे में आए।
इंद्रनील सेन कौन हैं और इस मामले में उनकी क्या भूमिका बताई जा रही है?
इंद्रनील सेन बंगाल के जाने-माने गायक हैं जो बाद में राजनीति में आए और पश्चिम बंगाल में पर्यटन मंत्री रहे। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपनी पत्नी मधुचंदा सेन के साथ मिलकर 'मास आर्ट' संस्था के माध्यम से यूनेस्को के नाम का दुरुपयोग कर फर्जी पास बेचे और धन का गबन किया।
राष्ट्र प्रेस
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