ईडी की बड़ी कार्रवाई: कोलकाता के 15 ठिकानों पर छापा, दुर्गा पूजा 'प्रीव्यू शो' में ₹85 करोड़ से अधिक की कथित धांधली
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कोलकाता जोन-I ने 1 अक्टूबर 2026 को कोलकाता के 15 ठिकानों पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 17 के तहत एक साथ तलाशी और जब्ती अभियान चलाया। यह कार्रवाई मासआर्ट (महानिर्बान रोड मास आर्ट) सोसाइटी द्वारा दुर्गा पूजा 'प्रीव्यू शो' के प्रबंधन में कथित वित्तीय अनियमितताओं और यूनेस्को के नाम के कथित अनधिकृत इस्तेमाल से जुड़े मामले में की गई। जांच में पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्य मंत्री इंद्रनील सेन समेत कई प्रमुख नाम सामने आए हैं।
छापेमारी के प्रमुख ठिकाने और आरोपी
ईडी की तलाशी में मासआर्ट सोसाइटी के आवासीय एवं कार्यालय परिसर, उसके पदाधिकारियों और पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन के करीबी सहयोगियों के ठिकाने शामिल थे। यह अभियान जयदीप मुखर्जी की लिखित शिकायत के बाद शुरू हुआ, जिसमें इंद्रनील सेन के साथ मधुचंदा सेन (मासआर्ट की अध्यक्ष), ध्रुबज्योति बोस (सचिव), सायंतन मैत्रा (उपाध्यक्ष) और रंजन चटर्जी (कोषाध्यक्ष) का नाम लिया गया है।
ईडी की जांच बउबाजार पुलिस स्टेशन (कोलकाता पुलिस आयुक्तालय) द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 316(2), 318(4), 336(2), 336(3), 338, 340(2) और 61(2) के प्रावधान लागू किए गए हैं।
कथित धोखाधड़ी का तरीका
जांच के अनुसार, आरोपियों ने 2022 से 2025 के बीच यूनेस्को प्रायोजित इकाई होने का झूठा दावा करते हुए जनता से भारी मात्रा में धन एकत्र किया। कोलकाता के 24 चयनित दुर्गा पूजा पंडालों में 'प्रीव्यू शो' के लिए ₹1,749 से ₹5,499 प्रति टिकट की दर से टिकट बेचे गए।
ईडी के अनुसार, अकेले 2023 और 2024 में एक लाख से अधिक ऐसे टिकट जारी किए गए। टिकट बिक्री से प्राप्त आय को बैंक खातों से नकद निकासी या विविध खर्चों की आड़ में बट्टे खाते में डाला गया, जो कथित रूप से धन शोधन की श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि यूनेस्को के नाम का व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए कथित तौर पर भ्रामक और अनधिकृत इस्तेमाल इस पूरे प्रकरण का केंद्रीय तत्व बताया जा रहा है।
सरकारी टेंडर और ₹85 करोड़ का कथित घोटाला
जांच में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। ईडी के अनुसार, पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री के रूप में इंद्रनील सेन के कार्यकाल के दौरान पर्यटन और सांस्कृतिक मंत्रालय से ₹85 करोड़ से अधिक के कई टेंडर ध्रुबज्योति बोस और दीपेश रॉय के स्वामित्व वाली संस्थाओं को दिए गए। इन दोनों को इंद्रनील सेन के करीबी सहयोगी बताया जाता है।
इसके बाद इन संस्थाओं ने इंद्रनील सेन के रिश्तेदारों द्वारा नियंत्रित इकाइयों को बड़ी रकम हस्तांतरित की। इन टेंडर पाने वाली संस्थाओं के बैंक खातों से बड़े पैमाने पर नकद निकासी भी दर्ज की गई है।
ममता बनर्जी तक पहुँचा ट्रेल, ₹30 लाख के हस्तांतरण का दावा
जांच में यह भी सामने आया है कि इंद्रनील सेन की कंपनी ऑक्टेव रिकॉर्ड्स के बैंक खातों में उनके मंत्री-पद के दौरान ₹3.8 करोड़ से अधिक की नकदी जमा हुई। इसके अतिरिक्त, ऑक्टेव रिकॉर्ड्स के खाते से लगभग ₹30 लाख बैंकिंग चैनलों के माध्यम से पश्चिम बंगाल की तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हस्तांतरित किए गए। इंद्रनील सेन का दावा है कि यह राशि रॉयल्टी के रूप में चुकाई गई थी।
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पहले से ही कई जांच एजेंसियों के निशाने पर है। विपक्षी दलों ने इस कार्रवाई को ताज़ा साक्ष्य बताते हुए सरकार पर हमला बोला है।
छापेमारी में मिले साक्ष्य और आगे की जांच
तलाशी अभियान के दौरान आपत्तिजनक डिजिटल उपकरण और दस्तावेजी साक्ष्य बरामद कर पीएमएलए के तहत जब्त किए गए हैं। ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले से संबंधित आगे की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और खुलासे संभव हैं।
यह मामला न केवल धन शोधन बल्कि एक सार्वजनिक-सांस्कृतिक उत्सव के व्यावसायीकरण और अंतरराष्ट्रीय संस्था यूनेस्को के नाम के कथित दुरुपयोग के गंभीर सवाल भी उठाता है — जिसकी जांच अब और व्यापक होने के संकेत हैं।