15 अक्टूबर 2026
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कलकत्ता हाईकोर्ट ने इंद्रनील सेन की अग्रिम जमानत याचिका खारिज, ईडी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में घिरे पूर्व मंत्री

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कलकत्ता हाईकोर्ट ने इंद्रनील सेन की अग्रिम जमानत याचिका खारिज, ईडी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में घिरे पूर्व मंत्री

सारांश

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। ईडी उन पर दुर्गा पूजा में यूनेस्को टैग के दुरुपयोग और ₹60 करोड़ की कथित मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रहा है। ऑक्टेव रिकॉर्ड्स से ममता बनर्जी को ₹30 लाख के कथित हस्तांतरण का मामला भी जुड़ा है।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाईकोर्ट ने 15 अक्टूबर 2026 को पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की।
न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिका नामंजूर की।
ईडी दुर्गा पूजा के दौरान यूनेस्को टैग के दुरुपयोग से जुड़े कथित ₹60 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच कर रहा है।
ईडी ने सेन से दो बार पूछताछ और उनके आवास समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की है।
ईडी ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ऑक्टेव रिकॉर्ड्स से कथित ₹30 लाख हस्तांतरण का उल्लेख किया; सेन ने इसे रॉयल्टी भुगतान बताया।
राज्य के न्यायिक जांच आयोग ने सांस्कृतिक विभाग की निविदा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर अलग जांच शुरू की।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने 15 अक्टूबर 2026 को पश्चिम बंगाल के पूर्व पर्यटन मंत्री एवं सूचना व सांस्कृतिक मामलों के पूर्व राज्य मंत्री इंद्रनील सेन की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) उनके विरुद्ध धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के एक मामले में जांच कर रहा है, जिसमें कथित तौर पर करीब ₹60 करोड़ के अनियमित लेनदेन शामिल हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

गायक से राजनेता बने इंद्रनील सेन और उनकी पत्नी मधुचंदा सेन पर दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान यूनेस्को टैग का दुरुपयोग कर टूर पैकेजों के फर्जी पास बेचने और वित्तीय अनियमितताएं करने के आरोप हैं। इस मामले में कथित लेनदेन की प्रारंभिक राशि करीब ₹60 करोड़ आंकी गई है।

जांच की शुरुआत कोलकाता पुलिस के बोबाजार थाने में दर्ज एक शिकायत से हुई। इसके बाद ईडी ने प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज कर स्वतंत्र रूप से जांच आरंभ की।

ईडी की छापेमारी और पूछताछ

पिछले महीने ईडी ने कई स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया, जिसमें इंद्रनील सेन का आवास, उनके कुछ रिश्तेदारों के ठिकाने और इस मामले से जुड़े एक इवेंट मैनेजर के कार्यालय को शामिल किया गया। केंद्रीय जांच एजेंसी सेन से इससे पहले दो बार पूछताछ कर चुकी है।

गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए सेन ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से कलकत्ता हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी।

हाईकोर्ट का फैसला

गुरुवार को न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की एकल पीठ के समक्ष इस याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने इंद्रनील सेन की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। इस निर्णय के बाद सेन की गिरफ्तारी का खतरा बढ़ गया है।

ममता बनर्जी का नाम और ऑक्टेव रिकॉर्ड्स विवाद

इस महीने के आरंभ में ईडी ने एक बयान में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम इंद्रनील सेन की कंपनी ऑक्टेव रिकॉर्ड्स से जुड़े एक लेनदेन के संदर्भ में लिया। एजेंसी के अनुसार, इस कंपनी के खातों से करीब ₹30 लाख बैंकिंग माध्यमों के जरिए कथित तौर पर बनर्जी को हस्तांतरित किए गए थे। हालांकि, सेन का कहना है कि यह भुगतान रॉयल्टी के रूप में किया गया था।

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व कार्यकाल से जुड़े कई मामले जांच एजेंसियों के रडार पर हैं।

न्यायिक जांच आयोग की अलग जांच

पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कथित संस्थागत भ्रष्टाचार की पड़ताल के लिए गठित न्यायिक जांच आयोग ने भी सेन से जुड़े एक अलग मामले की जांच शुरू की है। आयोग राज्य के सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग की निविदा प्रक्रिया में कथित करोड़ों रुपये की अनियमितताओं की जांच कर रहा है — वह विभाग जिसमें सेन राज्य मंत्री रह चुके हैं। गौरतलब है कि यह जांच ईडी की मनी लॉन्ड्रिंग जांच से स्वतंत्र है।

अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद अब यह देखना होगा कि इंद्रनील सेन सर्वोच्च न्यायालय का रुख करते हैं या आत्मसमर्पण करते हैं — यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए मोड़ पर आ गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि इसे अभी आरोप-पत्र का दर्जा नहीं मिला है। अदालत और ईडी दोनों स्तरों पर एक साथ मामला चलना — साथ ही राज्य सरकार के न्यायिक आयोग की स्वतंत्र जांच — यह दर्शाता है कि इस प्रकरण की जड़ें केवल एक मंत्री तक सीमित नहीं हैं।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंद्रनील सेन के खिलाफ ईडी का मामला क्या है?
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इंद्रनील सेन और उनकी पत्नी मधुचंदा सेन पर दुर्गा पूजा के दौरान यूनेस्को टैग का दुरुपयोग कर फर्जी पास बेचने और कथित तौर पर ₹60 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग करने के आरोप की जांच कर रहा है। मामला कोलकाता के बोबाजार थाने में दर्ज शिकायत पर आधारित है, जिसके बाद ईडी ने ईसीआईआर दर्ज की।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत क्यों खारिज की?
न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की एकल पीठ ने 15 अक्टूबर 2026 को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इंद्रनील सेन की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने अपने फैसले में विस्तृत कारण फिलहाल सार्वजनिक नहीं किए हैं।
ममता बनर्जी का इस मामले से क्या संबंध है?
ईडी ने अक्टूबर 2026 की शुरुआत में जारी एक बयान में कहा कि इंद्रनील सेन की कंपनी ऑक्टेव रिकॉर्ड्स के खातों से कथित तौर पर ₹30 लाख बैंकिंग माध्यमों से पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हस्तांतरित किए गए। सेन ने इसे रॉयल्टी भुगतान बताया है और किसी गलत काम से इनकार किया है।
न्यायिक जांच आयोग की भूमिका क्या है?
पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा गठित न्यायिक जांच आयोग राज्य के सूचना एवं सांस्कृतिक मामलों के विभाग की निविदा प्रक्रिया में कथित करोड़ों रुपये की अनियमितताओं की जांच कर रहा है। यह जांच ईडी की मनी लॉन्ड्रिंग जांच से स्वतंत्र है और सेन के उसी विभाग में राज्य मंत्री रहने के कार्यकाल से जुड़ी है।
अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद इंद्रनील सेन के सामने क्या विकल्प हैं?
अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद सेन सर्वोच्च न्यायालय में अपील कर सकते हैं या ईडी के समक्ष आत्मसमर्पण कर सकते हैं। यदि वे अदालत का रुख नहीं करते, तो ईडी किसी भी समय उन्हें गिरफ्तार कर सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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