UP वेरिफिकेशन नियमों पर सपा सांसद नदवी का हमला: 'सरकार नौकरी न देने के बहाने ढूँढ रही है'
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने 29 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश सरकार के सरकारी नौकरियों के लिए लागू किए गए कड़े वेरिफिकेशन नियमों की कड़ी आलोचना की और आरोप लगाया कि सरकार युवाओं को रोज़गार देने के बजाय उन्हें रोकने के नए-नए बहाने तलाश रही है। उन्होंने एमएलसी चुनाव, 1 नवंबर को दिल्ली में प्रस्तावित विपक्षी रैली और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सरकार को घेरा।
वेरिफिकेशन नियमों पर सीधा हमला
नदवी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार विभिन्न विषयों की मनमानी परिभाषाएँ तय कर रही है, जिससे युवाओं को नौकरी मिलने के बजाय परेशानी बढ़ रही है। उन्होंने तर्क दिया कि सरकार का ध्यान किसानों को राहत, बच्चों की शिक्षा और युवाओं के रोज़गार पर केंद्रित होना चाहिए था, लेकिन उसकी प्राथमिकताएँ उलटी हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों परिवारों को नुकसान पहुँचाया और अब प्रदर्शनकारी युवाओं को अपराधी की तरह ट्रीट किया जा रहा है। 'जो सरकार परीक्षाएँ सही तरह से नहीं करा पाई, वह अब युवाओं को रोज़गार न देने के लिए नए बहाने ढूँढ रही है' — यह उनका सीधा सवाल था।
नोटबंदी और आर्थिक विफलताओं का संदर्भ
नदवी ने नोटबंदी का हवाला देते हुए कहा कि काले धन की वापसी का वादा पूरा नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि बैंकों से हज़ारों करोड़ रुपये लेकर विदेश भागे लोगों पर सरकार ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। यह ऐसे समय में आया है जब बेरोज़गारी भत्ते के वादे भी अधूरे बताए जा रहे हैं।
गौरतलब है कि नदवी ने सरकार की नीतियों और नीयत दोनों पर सवाल उठाए — यह सपा की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार को रोज़गार और शासन के मोर्चे पर विफल बताया जाता है।
एमएलसी चुनाव और बैलेट पेपर की माँग
बैलेट पेपर से हुए एमएलसी चुनाव के नतीजों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेताओं की टिप्पणियों के संदर्भ में नदवी ने माँग की कि पूरे देश में बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाएँ। उन्होंने कहा कि बूथ कैप्चरिंग, दबाव डालकर मतदान और प्रशासनिक हस्तक्षेप बंद होना चाहिए।
उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की कांग्रेस के प्रदर्शन पर की गई टिप्पणी का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार को आगामी चुनावों में बैलेट पेपर से मतदान की घोषणा करनी चाहिए। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित गड़बड़ियों पर भी उन्होंने चिंता जताई।
1 नवंबर की रैली और विरोध के अधिकार
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल के उस आरोप के संदर्भ में कि 1 नवंबर की दिल्ली रैली में आने वाले कार्यकर्ताओं को रोका जा रहा है, नदवी ने कहा कि संविधान ने नागरिकों को आवाज़ उठाने का अधिकार दिया है। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल को किसी भी माध्यम से इस अधिकार को दबाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
नदवी ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में असहमति की जगह होनी चाहिए और शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक व्यवस्था का बुनियादी हिस्सा है। चुनावों के दौरान महिलाओं के खातों में पैसे भेजे जाने की परंपरा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और बिहार का उदाहरण दिया और आरोप लगाया कि BJP किसी भी तरह सत्ता हासिल करने पर ध्यान केंद्रित करती है।
सरकार की जवाबदेही पर नदवी का संदेश
नदवी ने अपनी बात समेटते हुए कहा कि एक सच्चा देशभक्त लोगों को बाँटने के बजाय जोड़ने का काम करता है। उन्होंने ज़ोर दिया कि देश की तरक्की आपसी एकता और सहयोग से होती है, न कि समाज में टकराव पैदा करने से। आने वाले दिनों में विपक्षी गठजोड़ इन मुद्दों को और तेज़ करने की तैयारी में है।